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टीचर को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश रद्द, दो महीने में नियुक्ति दें

शिक्षा विभाग ने नए नियमों के अनुसार तय योग्यता नहीं होने पर 2012 के आदेश से प्रार्थी को बर्खास्त कर दिया।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 06:33 AM IST
Teacher dismisses order for dismissal from service

जयपुर. हाईकोर्ट ने सेकंडरी शिक्षा के उप निदेशक के 31 अगस्त 2012 के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें प्रार्थी शिक्षक के नियुक्ति आदेश 2011 को निरस्त कर उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया था। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रार्थी को द्वितीय श्रेणी के विज्ञान विषय शिक्षक पद पर नियुक्ति दे और आदेश का पालन दो महीने में हो। यह आदेश लखन सिंह की याचिका को मंजूर करते हुए दिया।

अधिवक्ता आरडी मीणा ने बताया कि प्रार्थी ने द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती-2008 में भर्ती नियमों के अनुसार बीएससी में दो विषय जूलॉजी व बॉटनी के आधार पर आवेदन किया। मेरिट में आने पर उसका चयन हुआ और शिक्षा विभाग ने उसे 7 जुलाई 2011 के आदेश से द्वितीय श्रेणी के विज्ञान विषय के शिक्षक पद पर नियुक्ति दी, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के दौरान शिक्षा विभाग ने 2010 में नियमों को बदल दिया और जिन अभ्यर्थियों के पास स्नातक में जूलॉजी, बांटनी व कैमिस्ट्री विषय रहे हों उन्हें ही द्वितीय श्रेणी के विज्ञान विषय शिक्षक पद पर नियुक्ति योग्य माना।

शिक्षा विभाग ने नए नियमों के अनुसार तय योग्यता नहीं होने पर 2012 के आदेश से प्रार्थी को बर्खास्त कर दिया। वहीं कुछ अभ्यर्थियों ने 2010 के नए नियमों को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नियमों को सही माना।

इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों के पास भर्ती विज्ञापन के समय मांगी शैक्षणिक योग्यता थी, उन्होंने आवेदन किया व उनकी नियुक्ति हुई है उस हद तक उनकी नियुक्तियां सही हैं।

प्रार्थी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि उसकी नियुक्ति पुराने भर्ती नियमों के अनुसार हुई थी। सुप्रीम कोर्ट से उसे सही माना है, इसलिए उसे सेवा से बर्खास्त करने वाला आदेश रद्द कर उसे द्वितीय श्रेणी विज्ञान विषय के शिक्षक पद पर नियुक्ति दी जाए।

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