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चित्तौड़गढ़ किले की 250 जवानों कर रहे घेराबंदी, विदेशी पर्यटकों को आईडी से एंट्री

चेतावनी मिली थी कि यदि फिल्म पर रोक नहीं लगी तो क्षत्राणी मंच से जुड़ी महिलाएं जौहर की याद ताजा करवा देंगी।

Danik Bhaskar | Jan 25, 2018, 08:24 AM IST

चित्तौड़गढ़. फिल्म पद्‌मावत के जारी होने के एक दिन पहले ही बुधवार को पुलिस व प्रशासन ने चित्तौड़गढ़ दुर्ग की घेराबंदी कर दी। मंगलवार आधी रात के बाद ही किले के दरवाजे के सामने पुलिस जवान डट गए। प्रशासन की इस किलाबंदी में 250 अधिकारी-कर्मचारी और पुलिस जवान लगे हैं। रिजर्व टीम को मिलाकर यह संख्या 500 तक है। मंगलवार रात दो बजे तक कलेक्ट्रेट में मीटिंग चली। प्रशासन यह सारी कवायद इसलिए कर रहा है कि कुछ दिन पहले चेतावनी मिली थी कि यदि फिल्म पर रोक नहीं लगी तो क्षत्राणी मंच से जुड़ी महिलाएं जौहर की याद ताजा करवा देंगी।

चेतावनी की वजह से बुधवार सुबह 11 बजे बाद जौहर क्षत्राणी मंच से जुड़ी महिलाएं जौहर कुंड व देवी दर्शन के बहाने किले पर जाने लगी तो रोक दिया। पूरे दिन महिलाओं सहित जौहर भवन में मौजूद लोगों पर निगाहें रहीं। हालांकि ये सब दोपहर 2.30 बजे केंद्रीय फिल्म ट्रिब्यूनल में इस मामले की तय सुनवाई का इंतजार करने की बात करते रहे। पदमावत फिल्म का प्रदर्शन रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रास्ता भी पूरी तरह बंद होने के बाद जौहर क्षत्राणी मंच की महिलाओं ने 24 जनवरी को प्रदर्शन व जौहर की याद ताजा करने की चेतावनी दी थी। पुलिस सुबह ही पाडनपोल पर दीवार बन कर खड़ी हो गई। किले पर रहने वालों को पहचान पत्र देखाने के बाद प्रवेश दिया जा रहा है। विदेशी पर्यटकों को भी जाने दे रहे है।

रात 12 बजे किले पर घूम रहे करणी सेना जिलाध्यक्ष सहित तीन जनों को पकड़ा

राजपूत करणी सेना जिलाध्यक्ष गोविंदसिंह खंगारोत सहित दो तीन कार्यकर्ता मंगलवार देर रात टायर आदि लेकर किले पर पहुंच गए। भनक पड़ते ही पुलिस ने रात करीब 12 बजे इन लोगों को हिरासत में ले लिया। रातों रात रिव्यू कर किले की और कड़ी सुरक्षा की व्यूह रचना बनी। कलेक्टर इंद्रजीतसिंह व एसपी प्रसन्न कुमार खमेसरा सहित अन्य अधिकारी मंगलवार रात दो बजे तक कलेक्ट्रेट में ही रहे।

सुरक्षा के लिए किले को पांच सेक्टर में बांटा, सबसे ज्यादा पुलिस जौहर स्थल पर
संभावित विरोध प्रदर्शन पर नजर के लिए एसपी ने छह सेक्टर, चार मोबाइल और एक रिजर्व पार्टी में 248 जवान या अधिकारी तैनात किए। पांच सेक्टर किले व एक चंद्रलोक सिनेमा को बनाया। पाडनपोल व विजयस्तंभ के पास जौहर स्थली सेक्टर पर तो एक-एक एएसपी व दो डीएसपी के साथ आधा दर्जन एसएचओ और क्रमश: 82-82 अन्य पुलिसकर्मी लगाए गए। पदमिनी महल, रामपोल, लाइट एंड साउंड को सेक्टर बनाया। एसडीएम ने तहसील के 6 गिरदावरों व 17 पटवारियों की डयूटी पर प्रदर्शन पर नजर रखने के लिए लगाई।


सिरोही से परिवार बालक के मुंडन के लिए आया, पुलिस ने लौटा दिया
सिरोही जिले के सिगवन गांव का बालक ईश्वरसिंह। सवा पांच साल का हो गया पर अब तक सिर से कभी बाल नहीं कटे। चित्तौड़ दुर्ग की बाणमाता के यहां उसका मुंडन कर मन्नत पूरी करने के लिए पूरा परिवार सुबह यहां पहुंचा। रातभर गाडी में सफर कर जैसे ही पाडनपोल पर पहुंचा, पुलिस ने कदम रोक दिए। खूब मन्नतें की पर नहीं मानी। परिवार निराश होकर लौट गया।

किले पर रसोई बनाने के लिए सामान पहुंच गया, पर हलवाई रुक गए
गांधीनगर के एक परिवार की ओर से दुर्ग की बिरला धर्मशाला में 125 लोगों की रसोई बनाने के लिए शहर से हलवाई सुनील सुखवाल बाइक पर ऊपर चढने वाला था कि पुलिस ने रोक दिया। टीम भी ऑटो में आ गई थी। सुखवाल ने कहा कि खाना बनाने की सामग्री रात में ही पहुंचा दी। जिसकी चाबी भी मेरे पास है। पुलिस बोली, जब खाने वाले ही नहीं आएंगे तो खाना क्या बनाओगे?


बंदरों के लिए रोज 5 बोरी आलू लेकर जाते हैं, उनको भी रोक दिया
शहर के कुछ धर्मप्रेमी लोगों की ओर से किले के बंदरों, कुत्तों व मछलियों आदि को खिलाने के लिए रोज करीब 5 बोरी आलू, बिस्किट व चना आदि एक गाड़ी में पहुंचाए जाते हैं। सुबह पाडनपोल पर यह गाडी भी रुक गई। इनका कहना था कि यह काम डेढ़ साल से चल रहा है, पर अफसरों की अनुमति बिना जवान टस के मस नहीं हुए।

ट्रिब्यूनल में भी याचिका खारिज
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन अपीलेंट ट्रिब्यूनल ने पदमावत फिल्म को सेंसर बोर्ड से जारी प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। परिवादी जौहर स्मृति संस्थान ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चित्तौड़गढ़ के जौहर स्मृति संस्थान की ओर से ट्रिब्यूनल में पेश याचिका पर बुधवार दोपहर ढाई बजे सुनवाई हुई। बहस सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी।

आदेश की स्पष्ट जानकारी अभी नहीं मिली, लेकिन यह कहा गया कि ट्रिब्यूनल मुख्य रूप से सेंसर बोर्ड के खिलाफ फिल्म प्राडयूसर या डायरेक्टर की अपील सुनता है। यह नया मामला है और इसके लिए परिवादी को पहले हाईकोर्ट में जाना चाहिए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में भी जा सकते हैं। संस्थान के महामंत्री भंवरसिंह खरडीबावड़ी ने बताया कि बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका पेश कर दी।