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ट्रक ड्राइवर पिता के बीमार होने पर छोड़ने वाले थे क्रिकेट, अब खेलेंगे आईपीएल

तेजेंद्र को 8 साल की उम्र में चाचा लेकर गए मैदान, अंडर-16 में ऑलराउंड प्रदर्शन से आए थे सुर्खियों में

Danik Bhaskar | Jan 30, 2018, 03:48 AM IST
अपने माता पिता के साथ आईपीएल में सलेक्ट तेजेंद्रसिंह। अपने माता पिता के साथ आईपीएल में सलेक्ट तेजेंद्रसिंह।

धौलपुर. राजस्थान के दो खिलाड़ियों ने आईपीएल-11 की नीलामी में जगह बनाकर धौलपुर को क्रिकेट जगत में नई पहचान दी है। धौलपुर से अपने क्रिकेट कॅरियर की शुरुआत करने वाले राहुल चाहर और तेजेंद्र सिंह सरदार को घर से हमेशा सपोर्ट मिला। राहुल चाहर के पिता देशराज चाहर आगरा में बिल्डर का काम करते हैं। तो वहीं तेजेंद्र के पिता नरेंद्र सिंह सरदार के शुरुआत में खुद के दो ट्रक थे, उन्हें चलाकर अपने परिवार का गुजर बसर करते थे। इस दौरान दोनों की क्रिकेट कॅरियर में घर परिवार के एक सदस्य की भूमिका अहम रही। राहुल चाहर के कॅरियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उनके ताऊ लोकेंद्र चाहर रहे, जिन्होंने अपने भतीजे के साथ साथ अपने पुत्र दीपक चाहर (जिसे आईपीएल में चेन्नई सुपरकिंग्स ने 80 लाख रुपए में खरीदा है) को भी क्रिकेट में मुकाम तक पहुंचाया है। वहीं आठ साल की उम्र में तेजेंद्र के चाचा स्व सरदार रंजीत सिंह ही उसे पहली बार ग्राउंड लेकर गए, क्योंकि उनके चाचा व भैया भी क्रिकेट खेलते थे। तब वहां से तेजेंद्र के क्रिकेट कॅरियर ने रफ्तार पकड़ी। दोनों खिलाड़ियों ने डीसीए सचिव सोमेंद्र तिवारी की अहम भूमिका बताई।

#तेजेंद्र को 8 साल की उम्र में चाचा लेकर गए मैदान अंडर, 16 में ऑलराउंड प्रदर्शन से आए थे सुर्खियों में

- आईपीएल में मुंबई इंडियन की टीम में 55 लाख रुपए में खरीदे गए 25 साल के तेजेंद्र कहते हैं कि वह मूल रूप से श्रीगंगानगर से हैं। जन्म उनकी सिस्टर के यहां राजाखेड़ा में हुआ।

- अंडर-16 में पहले मैच में उन्होंने 134 रन बनाकर 5 विकेट लिए। दूसरे मैच में 63 रन और 6 विकेट झटके तब डीसीए सचिव सोमेंद्र की निगाहों में तेजेंद्र चढ़ गए।

- एक कोच के रुप में सोमेंद्र ने खेल के साथ कॅरियर में काफी सहयोग किया। पिता नरेंद्र सिंह और मां सरबजीत कौर ने हमेशा क्रिकेट खेलने में सपोर्ट किया।

#पिता ट्रक चलाते थे

- तेजेंद्र ने बताया, ''पिता नरेंद्र सिंह सरदार शुरुआत में खुद के दो ट्रक थे। जिन्हें चलाकर अपने परिवार का गुजर बसर करते थे, लेकिन एक समय ऐसा भी आया कि पापा को बिजनेस में काफी लॉस हुआ और वह बीमार पड़ गए। तब ऐसा लगा कि क्रिकेट को छोड़ना पड़ेगा, लेकिन उस समय एक चमत्कार के रूप में मेरे मार्गदर्शक देवेश जायसवाल आए। वे आगरा में मुझे मेरे चाचा और भैया के साथ शुरुआती दौर में आगरा में क्रिकेट खेलते देखा करते थे। उन्होंने मेरी क्रिकेट कॅरियर में आर्थिक रुप से काफी मदद की। बिना कहे और मांगे वह मेरे लिए बैट, किट, टीशर्ट, जूते जैसी सुविधाएं जुटाने में कभी पीछे नहीं रहे।

- उन्होंने बताया कि आठ साल की उम्र में तेजेंद्र के चाचा स्व सरदार रंजीत सिंह ही उसे पहली बार मैदान पर लेकर गए, क्योंकि उनके चाचा व भैया भी क्रिकेट खेलते थे। तब वहां से तेजेंद्र के क्रिकेट कॅरियर ने रफ्तार पकड़ी।

#नहीं टूटने दिया मनोबल: तिवारी
- डीसीए सचिव सोमेंद्र तिवारी कहते हैं कि राहुल का अंडर-19 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट में चयन न होने पर निराश हो गया। उससे कहा था कि यह तो शुरुआत है। तुम्हें इंडिया टीम मेंं जगह बनाना है। 25 साल पहले मैं नहीं खेल पाया जो मेरे अंदर दर्द रहा। नए खिलाड़ी इस दर्द को दूर कर रहे हैं।

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मुंबई इंडियंस के लिए खेलेंगे धौलपुर के स्पिनर राहुल चाहर। मुंबई इंडियंस के लिए खेलेंगे धौलपुर के स्पिनर राहुल चाहर।
राहुल चाहर डीसीए सचिव सोमेंद्र तिवारी के साथ। राहुल चाहर डीसीए सचिव सोमेंद्र तिवारी के साथ।

मूल भरतपुर के सारस चौराहा निवासी बिल्डर देशराज चाहर के पुत्र राहुल चाहर अंडर 19 इंडिया खेले, तब उनके नाम सर्वाधिक विकेट थे। नवंबर 2017 में अंडर 19 वर्ल्ड कप के लिए टीम में जब चयन नहीं हुआ तो काफी टूट गया था। लेकिन जब मन ने कहा कि अभी और मेहनत करनी है और क्रिकेट में यह सब चलता है, जानकर लगा रहा। इस दौरान जनवरी 2018 में मुश्ताक अली टूर्नामेंट में राजस्थान टीम में चयन हुआ, लेकिन शुरुआत के चार मैच नहीं खिलाए। बाद के मैच खिलाए और पंजाब की टीम के युवराज सिंह और दिल्ली की टीम के गौतम गंभीर को आउट कर चयनकर्ताओं की निगाहों में ऐसे चढ़ गए कि आईपीएल 2018 में वह एक करोड़ 90 लाख रुपए में मुंबई इंडियन को लेना पड़ा। कूच बिहार ट्राफी, चैलेंजर ट्रॉफी वह धौलपुर से ही खेले। 

 

कोचिंग देने के लिए छोड़ दी एयरफोर्स की नौकरी अब बेटा व भतीजा दोनों साथ में आईपीएल खेलेंगे कोचिंग देने के लिए छोड़ दी एयरफोर्स की नौकरी अब बेटा व भतीजा दोनों साथ में आईपीएल खेलेंगे

घर में इकलौते पुत्र राहुल की बहन एमबीबीएस कर रही हैं। राहुल चाहर पहले भी आईपीएल में सनराइजर्स पुणे से खेले थे। राहुल चाहर के ताऊ लोकेंद्र चाहर ने अपने भतीजे राहुल व पुत्र दीपक चाहर को कोचिंग देने के लिए एयरफोर्स की नौकरी छोड़ दी। उन्होंने कहा कि मुझे इन दोनों को अच्छा क्रिकेटर बनाना था, इसलिए नौकरी की परवाह नहीं की। क्योंकि नौकरी करता तो इतना टाइम कोचिंग व मार्गदर्शन के लिए  नहीं दे पाता। राहुल शरारती था। कई बार उसे चार दिन के लिए प्रेक्टिस नहीं कराता था, तो वह दीवार पर ही बैठे-बैठे देखता था, तब मैं खुद उसे बुलाकर प्रेक्टिस करने के लिए बोलता था। उन्होंने बताया कि डीसीए सचिव सोमेंद्र का पुत्र विनायक भी स्पिन गेंदबाजी व बल्लेबाजी की प्रेक्टिस यहां हमारे पास रहकर कर रहा है। घर वालों ने कई बार राहुल व दीपक के क्रिकेट खेलने पर आपत्ति जताई, लेकिन मैं ही घर का कमांडर हूं। इसलिए कभी कोई चक्कर इनके क्रिकेट कॅरियर में सामने नहीं आया, नतीजा सामने है।