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डीजल नहीं हवा से चलता है ये इंजन, अनपढ़ दोस्तों ने 11 साल में किया तैयार

अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकीचंद गांव में ही एक दुकान पर मोटर गाड़ियों के टायरों में हवा भरने का काम करते थे।

Dainik Bhaskar

Dec 21, 2017, 12:25 AM IST
हवा से चलता इंजन। 80 फीट की गहराई से इसी हवा के इंजन से पानी तक खींचा जाता है। हवा से चलता इंजन। 80 फीट की गहराई से इसी हवा के इंजन से पानी तक खींचा जाता है।

भरतपुर/जयपुर. गाड़ियों के टायरों में हवा भरने वाले दो अनपढ़ दोस्तों ने कुछ अलग करने की ठानी तो हवा से चलने वाला इंजन ही बना दिया। 80 फीट की गहराई से इसी हवा के इंजन से पानी तक खींचा जाता है। 11 साल की मेहनत के बाद यह इंजन बनकर तैयार हुआ है। अब वे बाइक को हवा से चलाने के लिए एक प्रोजेक्ट बना रहे हैं।

- दरअसल, राजस्थान के भरतपुर जिले में रूपवास के खेड़िया विल्लोज के रहने वाले अर्जुन कुशवाह और मिस्त्री त्रिलोकीचंद गांव में ही एक दुकान पर मोटर गाड़ियों के टायरों में हवा भरने का काम करते थे।

- करीब 11 साल पहले जून में एक दिन ट्रक के टायरों की हवा जांच रहे थे तो उनका इंजन खराब हो गया। उसे सही कराने तक के लिए जेब में पैसे नहीं थे। इतने में ही इंजन का वॉल खुल गया और टैंक में भरी हवा बाहर आने लगी। इंजन का पहिया दवाब के कारण उल्टा चलने लगा। फिर यहीं से दोनों ने शुरू की हवा से इंजन चलाने के आविष्कार की कोशिश की। साल 2014 में वे इसमें सफल भी हो गए। आज वे इसी हवा के इंजन से खेतों की सिंचाई करते हैं।


11 साल में साढ़े तीन लाख रुपए किए खर्च
- त्रिलोकीचंद ने बताया कि 11 साल से वे लगातार हवा के इंजन पर ही शोध कर रहे हैं। अब तक बहुत कुछ सीख चुके हैं ।
- इसे बनाने में करीब 3.5 लाख रुपए के उपकरण सामान ला चुके हैं। अब दुपहिया चौपहिया वाहनों को हवा से चलाने की योजना बना रहे हैं।

ऐसे बनाया 8 हॉर्स पावर का इंजन
- अर्जुन कुशवाह ने बताया, ''चमड़े के दो फेफड़े बनाए। इसमें एक छह फुट और दूसरा ढाई फुट का। इसमें से एक बड़े फेफड़े इंजन के ऊपर लगाया। जबकि इंजन के एक पहिए में गाड़ी के तीन पटा दूसरे बड़े पहिए में पांच पटा लगाकर इस तरह सेट किया कि वह थोड़ा से धक्का देने पर भार के कारण फिरते ही रहें। पिस्टन वॉल तो लगाई ही नहीं है। जब इंजन के पहिए को थोड़ा सा घुमाते हैं तो वह बड़े फेफड़े में हवा देता है। इससे छोटे फेफड़े में हवा पहुंचती है और इंजन धीरे-धीरे स्पीड पकड़ने लगता है। इससे इंजन से पानी खिंचता है। बंद करने के लिए पहिए को ही फिरने से रोकते हैं। हवा से चल नहीं जाए, इसके लिए लोहे की रॉड फंसाते हैं।''

इसे बनाने में  करीब 3.5 लाख रुपए के उपकरण सामान ला चुके हैं। इसे बनाने में करीब 3.5 लाख रुपए के उपकरण सामान ला चुके हैं।
आज वे इसी हवा के इंजन से खेतों की सिंचाई करते हैं। आज वे इसी हवा के इंजन से खेतों की सिंचाई करते हैं।
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हवा से चलता इंजन। 80 फीट की गहराई से इसी हवा के इंजन से पानी तक खींचा जाता है।हवा से चलता इंजन। 80 फीट की गहराई से इसी हवा के इंजन से पानी तक खींचा जाता है।
इसे बनाने में  करीब 3.5 लाख रुपए के उपकरण सामान ला चुके हैं।इसे बनाने में करीब 3.5 लाख रुपए के उपकरण सामान ला चुके हैं।
आज वे इसी हवा के इंजन से खेतों की सिंचाई करते हैं।आज वे इसी हवा के इंजन से खेतों की सिंचाई करते हैं।
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