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आज रजनी से समझिए बजट... आप पर क्या और कैसा रहेगा असर

डिस्क्लेमर: मैं दिसंबर से पहले 1.08 लाख नौकरियां देने का ऐलान करती हूं-वसुंधरा

Bhaskar News | Last Modified - Feb 13, 2018, 05:11 AM IST

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    जयपुर. चुनावी साल है। इसलिए बजट से उम्मीदें भी खूब थीं। सरकार ने पूरी भी कीं। घोषणाओं का पिटारा खुला तो हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ निकला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक और खेत से लेकर घर तक के लिए घोषणाएं हुईं। फोकस युवा, महिला और किसानों पर रहा। युवाओं को 1.08 लाख नौकरियां देने का वादा किया गया, वह भी इसी साल दिसंबर तक। लघु-सीमांत किसानों का 50 हजार तक का कर्ज माफ करने की घोषणा हुई। अस्सी साल और इससे अधिक उम्र वाले बुजुर्गों के लिए रोडवेज बस में यात्रा फ्री कर दी गई तो महिलाओं को दो साल के लिए चाइल्ड केयर लीव का तोहफा दिया गया। वहीं बच्चों के लिए मिड डे मील में पहली बार दूध को शामिल किया। मौजूदा सरकार का यह आखिरी बजट रहा। पिछले चार बजटों की तुलना में थोड़ा छोटा, लेकिन चारों की तुलना में घोषणाएं बड़ी।

    मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने करीब 2.11 घंटे में 78 पेज पढ़ें। (इससे पूर्व बजट करीब 100 पन्नों का होता था) लाइन एक ही रही-सत्ता में वापसी। लेकिन पाने की कोशिशों के तरीके अलग-अलग रहे। बजट की दिशा हर एक विधानसभा सीट तक पहुंचने की रही। हर विधानसभा क्षेत्र में 15 किमी नई सड़कें और सौ हैंडपंप मंजूर किए।

    सात लाख घरेलू एवं दो लाख किसानों के लंबित कृषि कनेक्शन दिए जाने की घोषणा की। बजरी समस्या का भी बजट में जिक्र करते हुए पहली बार इसके समाधान के लिए छोटे आकार के खनन पट्टे जारी करने की घोषणा की गई। मुख्यमंत्री ने कुल 2 लाख 12 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया। बजट इंजीनियरिंग का सबसे ज्यादा जोर इंफ्रा और सोशल सेक्टर पर रहा।

    बजट में गांव कितने आगे बढ़े,
    शहरों को क्या मिला आैर हमें
    क्या फायदा हुआ।

    पढ़ें भास्कर की विशेष प्रस्तुति

    पहली बार एक महिला के मन की बात
    दैनिक भास्कर आज से रजनी को लॉन्च कर रहा है। रजनी और कोई नहीं, एक अाम महिला के मन की बात है, जिसे भास्कर आज बजट सूत्रधार के रूप में पेश कर रहा है। बजट सबसे ज्यादा महिलाओं को ही प्रभावित करता है। हर नया टैक्स...उन्हीं की बचत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसलिए भास्कर महिलाओं के मन की बात को सर्वोच्च मानते हुए आज एक महिला किरदार के माध्यम से ही बजट के जटिल आंकड़ों काे समझाने का प्रयास कर रहा है।
    बजट सिर्फ एक शुरुआत है...रजनी अब हर मौके पर खुलकर बोलेगी।
    इंतजार करते रहिए...

    सबको खुश करने वाला बजट: अब तो हमें वोट दो

    सस्ते घर : डीएलसी रेट 10% तक घटाई

    किसान कर्ज : 50 हजार रुपए तक माफ

    महिलाएं : दो साल की चाइल्ड केयर लीव

    बुजुर्ग : रोडवेज में फ्री, अटेंडेंट का आधा किराया

    पहली बार

    1. महिलाओं को बड़ी राहत

    सरकारी सेवा में महिला कर्मचारियों को 18 साल की उम्र तक के बच्चों की देखभाल के लिए पूरी सेवा अवधि में अधिकतम दो साल की चाइल्ड केयर लीव। अभी तक राज्य में मैटर्निटी लीव का तो प्रावधान था, लेकिन चाइल्ड केयर लीव पहली बार दी गई है।

    2. सुंदर सिंह भंडारी और भैरोसिंह शेखावत के नाम पर योजना लॉन्च की गई
    पहली बार इन दो बड़े दिग्गज नेताओं के नाम पर कोई योजनाएं लॉन्च की गई हैं।

    3. बजरी के लिए खनन के छोटे पट्‌टे
    बजरी का मामला भी बजट में उठा। पहली बार बजरी खनन के लिए छोटे पट्‌टे जारी करने की बात की गई।

    4. को-ब्रांडेड रूपे कार्ड
    सहकारी बैंकों के खाताधारियों को 9.47 लाख भामाशाह को-ब्रांडेड रूपे कार्ड जारी किए। इस तरह की योजना में राजस्थान अकेला राज्य।

    जो याद रहेगा

    डीएलसी रेट : छोटे आवासों (ईडब्ल्यूएस और एलआईजी) में स्टाम्प ड्यूटी 50 से 75% तक घटाई। दस्तावेजों पर स्टाम्प ड्यूटी की अधिकतम सीमा 4 लाख रु. से घटाकर 3 लाख रुपए की। मार्च 19 तक डीएलसी में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।

    अनाथ को सहारा : वयस्क होने पर सरकारी अनाथालय को छोड़कर बाहर आने वाले युवाओं को स्वरोजगार के लिए एक लाख रु. का अनुदान देगी।

    पेपरलेस वर्किंग :व्हीकल रजिस्ट्रेशन और ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह खत्म करने की बात की गई। सभी जिला परिवहन कार्यालयों में फुली ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रैक बनाने की बात की गई।

    आदर्श मदरसे :500 मदरसों के लिए 25 करोड़ रुपए दिए। वाई फाई की सुविधा होगी।

    वो तीन बड़ी बातें, जिन्हें छुआ तक नहीं

    मेट्रो: लगातार दूसरे बजट में जयपुर मेट्रो को कुछ नहीं दिया। फेज-2 के लिए बजट में कोई घोषणा नहीं की गई। हालांकि, चांदपाेल से बड़ी चौपड़ तक का मेट्रो संचालन इसी साल प्रस्तावित है।

    नए जिले:49 जिलों की मांग चल रही है। प्रस्ताव राज्य सरकार को विभिन्न संगठनों से मिले थे। सरकार ने कमेटी बनाई। कमेटी की रिपोर्ट भी आ गई, लेकिन बजट में एक भी नए जिले को लेकर घोषणा नहीं हुई।

    थाना चौकी: विधायकों की तरफ से सबसे ज्यादा मांग थाने और चौकियों को लेकर उठाई जाती है। सरकार को मिले प्रस्तावों के आधार पर एक कमेटी बनाई गई थी, कमेटी रिपोर्ट दे चुकी है। फिर भी नए थानों की घोषणा नहीं हुई।

    #बजट पर पक्ष-विपक्ष

    न हम थकेंगे, न रुकेंगे : राजे
    विकास एवं सुशासन निरंतर चलने वाली यात्रा है। किसानों की आय बढ़े, कमजोर तबकों का सामाजिक-आर्थिक उत्थान हो, महिलाएं शिक्षित-सुरक्षित हों, नौजवानों को काम मिले, ऐसे खुशहाल राजस्थान का सपना साकार होने तक हम न रुकेंगे और न थकेंगे।
    -वसुंधरा राजे, मुख्यमंत्री

    अधूरी कर्जमाफी : सचिन पायलट
    घोषणाओं में उप चुनाव की हार का असर है। किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की जगह सिर्फ 50 हजार तक के अल्पकालीन ऋण माफ किए जाने से कर्जे में डूबे व आपदाओं के शिकार किसानों को राहत मिलना मुश्किल है।
    -सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

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