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भारत का लादेन कहलाने वाला और राजस्थान में वांटेड आतंकी अब्दुल अरेस्ट

इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला कुरैशी बम बनाने में माहिर है।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 06:09 AM IST

नई दिल्ली/जयपुर/जोधपुर. भारत का बिन लादेन कहा जाने वाला कुख्यात आतंकी और इंडियन मुजाहिद्दीन का काे-फाउंडर अब्दुल सुभान कुरैशी उर्फ तौकीर को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया। गुजरात में 2008 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल को दिल्ली पुलिस ने पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर इलाके में शनिवार शाम को मुठभेड़ के बाद पकड़ा। वह राजस्थान में भी मोस्ट वांटेड था। तौकीर वर्ष 2007 में सवाई माधोपुर और बारां में सक्रिय रहा। इसके अलावा जोधपुर में भी अपना नेटवर्क खड़ा किया था।

- दिल्ली पुलिस के उपायुक्त (स्पेशल सैल) पीएस कुशवाह ने बताया कि अब्दुल ने पकड़े जाने से बचने के लिए स्पेशल सेल के लोगों पर फायरिंग भी की।

- इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला कुरैशी बम बनाने में माहिर है। सुरक्षा एजेंसियों को 11 जुलाई 2006 में मुंबई में हुए ट्रेन ब्लास्ट में इसकी तलाश थी।

- पुलिस के अनुसार 46 वर्षीय कुरैशी नेपाल में नाम बदलकर रह रहा था। 2015-17 के बीच वह सऊदी अरब गया था। वह सिमी की मैगजीन का एडिटर भी रह चुका है।

- दिल्ली, बेंगलुरू और अहमदाबाद में हुए बम ब्लास्ट में भी कुरैशी का हाथ बताया जाता है। आईएम के सारे ऑनलाइन काम कुरैशी ही करता है।

सवाईमाधोपुर-बारां में सिमी के स्लीपर सेल बनाए, बम बनाने की ट्रेनिंग दी

- अब्दुल वर्ष 2007 में सवाई माधोपुर व बारां में सक्रिय रहा। दोनों जिलों में उसने प्रतिबंधित संगठन सिमी के लिए कैंप किए और स्लीपर सैल तैयार किया। कैंपों में बम बनाने की ट्रेनिंग दी।

- एटीएस में मामला भी दर्ज है। उसके खिलाफ चालान पेश हो चुका है। जिसमें वह वांटेड है। एटीएस एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि तौकीर से पूछताछ के लिए दिल्ली टीम भेजी जाएगी।

जयपुर ब्लास्ट के बाद सामने आया था नाम
- तौकीर ने जब बारां व सवाई माधोपुर में सैल खड़ा किया था तब एटीएस ने तौकीर के कई साथियों को गिरफ्तार किया था मगर वह फरार हो गया था।

- जयपुर में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के बाद भी तौकीर का नाम सामने आया था। वह 10 साल पहले जोधपुर में नेटवर्क खड़ा कर चुका था। जिसका पता जयपुर बम ब्लास्ट के बाद पता चला।
- 26 जुलाई 2008 को गुजरात के अहमदाबाद में 90 मिनट के अंदर 16 बम ब्लास्ट हुए थे। इनमें 56 लोग मारे गए थे और 200 लोग घायल हुए थे।