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निभाया सुख-दुख में साथ रहने का वादा, पति को दी किडनी

रिसिपिएंट के कम से कम 20 साल किडनी बेहतर काम करती है।

Danik Bhaskar | Dec 18, 2017, 04:04 AM IST

जयपुर. सुख-दुख में साथ निभाने का वादा निभाया है जगतपुरा निवासी अर्चना चाैहान ने। अर्चना ने लंबे समय से किडनी की समस्या से जूझ रहे पति गजेन्द्र सिंह चौहान को किडनी देकर न केवल उन्हें नई जिंदगी दी है बल्कि हर महीने डायलिसिस के दर्द से भी निजात दिलाई है। ईएचसीसी हॉस्पिटल में हुए इस ट्रांसप्लांट के बाद पति-पत्नी पूरी तरह स्वस्थ हैं।


- जगतपुरा निवासी गजेन्द्र सिंह चौहान को करीब 8 माह से परेशानी थी। जांच में सामने आया कि उनका क्रिटेनिन काफी बढ़ गया है और ट्रांसप्लांट से ही पूरी तरह सही हो सकते हैं। कई दिनों तक डोनर की तलाश हुई, लेकिन नहीं मिला। अन्तत: उनकी पत्नी अर्चना से क्रास मैच हो गया और वे ट्रांसप्लांट के लिए तैयार हो गई।

- इसके बाद ईएचसीसी में डॉ. रवि गुप्ता ने उनका ट्रांसलांट किया। करीब 4 घंटे सर्जरी चली और 7 दिन बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।

लोगों को जागरूक करने की जरूरत
- ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि अभी राजस्थान में कैडेवर डोनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन बहुत कम हैं। जिन लोगों को जरूरत है, उन्हें अधिक से अधिक संख्या में रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए।

-उन्होंने बताया कि किडनी देने में बिलकुल नहीं डरना चाहिए। रिसिपिएंट के कम से कम 20 साल किडनी बेहतर काम करती है।

- इसके अलावा आज इतनी उच्च तकनीक हैं कि ट्रांसप्लांट में कोई भी रिस्क नहीं है। हालांकि अधिक वजन वाले लोग किडनी डोनेट करने से डरते हैं, लेकिन उन्हें डरने की जरूरत नहीं, क्योंकि अधिक वजन से ट्रांसप्लांट से कोई फर्क नहीं पड़ता है।