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बच्चों का पेट भरने के लिए ये महिला बन गई कुली, राष्ट्रपति भी स्टोरी सुन हुए थे भावुक

गांधीनगर रेलवे स्टेशन प्रदेश का पहला, देश का दूसरा ऑल वुमंस स्टेशन

Bhaskar News | Last Modified - Mar 08, 2018, 05:30 AM IST

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    राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुकी हैं ये।

    जयपुर.इंटरनेशनल वुमन्स डे पर हम आपको बता रहे हैं ऐसी महिलाओं के बारे जिन्होंने पुरूषों के साथ खड़े होकर उनसे भी आगे निकल गई हैं। इसलिए आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी महिलाओं के बारे में जिन्होंने कई क्षेत्रों में अपना नाम आगे बढ़ाया। ये हैं मंजू देवी, जो कि ग्राम पंचायत रामजीपुरा कलां के ग्राम सुन्दरपुरा की रहने वाली हैं। वे इन दिनों जयपुर रेलवे स्टेशन पर कुली का काम कर रही है और अपना नाम राजस्थान की प्रथम महिला कुली में दर्ज करवाया है। हालांकि महिला कुली मंजू देवी ने यह कार्य अपने पति के देहांत के बाद मजबूरी वश बच्चों का पेट भरने की जिम्मेदारी के कारण करना शुरू किया था, लेकिन अब उसे न तो इस कार्य में शर्म आती है और न ही वजन उठाने में तकलीफ महसूस होती है।

    प्रेरणा स्त्रोत हैं मंजू देवी

    - मंजू देवी देश की अन्य ऐसी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत भी बन गई है। इसी कारण मंजूदेवी को राष्ट्रपति ने भी सम्मानित किया है।

    - मंजू ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व पति का अकस्मात निधन होने पर बच्चों को पालने के साथ ही परिवार की सभी जिम्मेदारियां पड़ने से कुली का व्यवसाय चुनकर परिजनों की मदद से इस कार्य को शुरू किया।

    - मंजू की दो लडकियां और एक लड़का है। शुरुआत में यात्रियों के सामान ढोने व भाग दौड़ में थकान व परेशानियों के साथ शर्म महसूस हुई, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के आगे यह कार्य धीरे-धीरे सहज और छोटा लगने लगा।

    - परेशानी के बाद हर बार हिम्मत करके आगे बढ़ती रही और आज इस कार्य को करने में कोई शर्म व परेशानी नहीं होती है। बाद में इस कार्य के लिए 6 महीने की ट्रेनिंग भी ली है।

    राष्ट्रपति भी मंजू की कहानी सुनकर हो गए थे भावुक

    - 20 जनवरी 2018 को जब देशभर की 90 महिलाओं को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पुरस्कृत करने के लिए राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया।

    - मंजू की कहानी सुन राष्ट्रपति भी भावुक हो गए थे।

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    रेलवे का सबसे वजनी काम करती हैं।

    छोटी-सी गलती यात्रियों पर भारी पड़ सकती है।

    ये फोटो है नीलम जाटव (32) की जो गांधीनगर रेलवे स्टेशन पर बतौर स्टेशन अधीक्षक के रूप में तैनात हैं। वे फोटो में सिग्नल के मैन्युअली पॉइंट सेट कर रही हैं। यह काम सबसे मुश्किल माना जाता है...क्योंकि इसमें लगभग 60 किलो के क्लैम को उठाकर पॉइंट बॉक्स तक ले जाना पड़ता है

    - यह स्थिति तब आती है जब ऑटोमैटिक पॉइंट्स फेल हो जाएं और ट्रेन को चलने के लिए सिग्नल न मिल पाए।

    - मैन्यूअली पॉइंट सेट करना काफी भारी-भरकम काम तो है ही, साथ ही काफी जटिल भी है।

    - इसमें छोटी-सी गलती यात्रियों पर भारी पड़ सकती है। इसे सेट करने में करीब 40 मिनट लगते हैं।

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    चार साल की उम्र में आंखों की ज्योति खो दी मगर लिम्का बुक रिकॉर्ड में नाम दर्ज

    बार काउसिंल में चयनित, पीएचडी में अध्ययनरत

    जटवाड़ा (बस्सी)| कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, इस कहावत पर खरा उतरी है यह शख्स जिसने आंखों की रोशनी नहीं होने के बावजूद केवल सुनकर पढ़ा और एलएलबी में सफलता हासिल की। बचपन में जब लोग खेलते थे, तो मेरा भी खेलने का मन करता मगर कोई खिलाता नहीं। कहते अंधा क्या खेलेगा, पढ़कर क्या करेगा ये ताने मिलते। घर आकर रोती अपना गुस्सा खुद पर निकालता, लेकिन मां हौसला देती और इस हौसले ने ताकत दी। कविता फिर दिमाग में घर कर गई थी. कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।


    बस्सी उपखंड के ग्राम पंचायत बांसखो निवासी आयुषी पुत्री जगदीश पारीक का जन्म 29 मार्च 1991 को हुआ, 4 वर्ष की आयु में ग्लूकोमा रोग से पीड़ित होने के कारण अपनी आंखों की ज्योति खो बैठी लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 11 साल की आयु में 10वीं की परीक्षा दी। आयुषी जब फोर्थ क्लास में पढ़ती थी तब एक बार वह 3 दिन तक स्कूल नहीं गई, इसकी वजह से उसे स्कूल से निकाल दिया गया। शायद उसकी जगह कोई अाेर होता तो हार मान लेता। वह दोबारा स्कूल नहीं गई और प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर ओपन बोर्ड से 2002 में 11 वर्ष की आयु में परीक्षा दी जिसमें 77.17 प्रतिशत अंक अर्जित कर उतीर्ण हुई।

    मां ने दिया आयुषी का हर पल साथ
    आयुषी का साथ हमेशा उसकी मां हेमलता पारीक ने दिया जोकि महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक पद से रिटायर्ड है। उसकी रात भर आयुषी पढ़ाया करती थी जिसके कारण आज इस मुकाम तक पहुंची है।

    ये उपलब्धियां हासिल की
    राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी और डबल एलएलएम किया जिसके कारण हाई कोर्ट में पहली महिला दृष्टिहीन वकील रजिस्टर्ड हुई। 2012 में वह पहली विजुअली चैलेंज फीमेल कैंडिडेट बनी जोकि बार काउंसलिंग ऑफ राजस्थान में चयनित हुई। अपने इस अचीवमेंट की वजह से उनका नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।

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    यशा मुद‌्गल कलेक्टर

    यशा मुद‌्गल : कश्मीर के उधमपुर-बारामुला में रहीं कलेक्टर

    करौली शहर के रहने वाले अरुण कुमार मुद‌्गल एवं कमलेश मुद‌्गल की बेटी यशा मुद‌्गल ने जिले का नाम को कश्मीर और श्रीनगर तक राेशन किया है। यशा मुदगल 2007 बैच की आईएएस है। उनको पहली नियुक्ति एसडीएम के रूप में मिली। इसके बाद वह सर्व शिक्षा अभियान की डायरेक्टर रही और इसके बाद जम्मू के उधमपुर में तथा कश्मीर के बारामूला में कलेक्टर रही और अब दिल्ली में रेजिडेंट कमिश्नर कार्यालय में अतिरिक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत है।

    अपने कार्यकाल में यशा मुदगल ने जहां सराहना बटोरी वहीं बच्चों की स्कूली शिक्षा सुलभ मुहैया कराने के लिए एक साल में ही 3 हजार स्कूल भवनों को पूर्ण कराया।

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    TI उर्मिला मीना

    जिले की पहली महिला थानाधिकारी

    कुडगांव थानाधिकारी उर्मिला मीना का नाम अपने विभाग में सम्मान के साथ लिया जाता है। उर्मिला मीना का जन्म गगवाना जिला दौसा में रामभरोसी मीना एवं भौती मीना के घर पर 20 जुलाई 1987 को हुआ था। उन्हें पहली नियुक्त महिला थाना करौली में मिली। इसके बाद उन्हें यातायात प्रभारी करौली के पद पर नियुक्त किया। यातायात प्रभारी के कार्यभार के बाद वह जिले की पहली महिला थानाधिकारी के रूप में कुडगांव नियुक्त हुई। उन्होंने थाने का नक्शा ही बदल दिया और जिले के सबसे अच्छे थानों में कुडगांव थाना है।

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    स्वर्णकार बहनें : शिवांगी स्वर्णकार कलेक्टर, देवांगी आयकर अधिकारी

    एक कलेक्टर, दूसरी आयकर अिधकारी

    मासलपुर तहसील के गांव चैनपुर में जन्मे रामगोपाल स्वर्णकार एवं सुजाता स्वर्णकार की दोनों बेटियों ने एक मिसाल पेश की है। उनकी बड़ी बेटी शिवांगी स्वर्णकार बूंदी में जिला कलेक्टर है तो छोटी बेटी आयकर विभाग में उप आयुक्त है। शिवांगी का 2010 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन हुआ और 2011 के बैंच की वो आईएएस बनी। उन्हें अपनी पहली नियुक्ति उपखंड अधिकारी जोधपुर के रूप में मिली। इसके बाद शिवांगी ने फाइनेंस सेक्रेट्री जयपुर के पद पर कार्य किया और अब वे बूंदी जिले में कलेक्टर के पद पर आसीन है।

    जहां उन्होंने बेरोजगारों को रोजगार दिलाने और बूंदी जिले के लोगों को आसानी से सुविधा मुहैया कराने के लिए एक एप तैयार कराया है। इस एप के लिए राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उनकी प्रशंसा की। शिवांगी की छोटी बहन देवांगी स्वर्णकार जयपुर के आयकर विभाग में उप आयुक्त है।

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    डॉ. सौम्या गुर्जर : महिला सशक्तिकरण की मिसाल

    महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन कर उभर रही हैं।

    नागौर जिले के लाडनूं तहसील में ओमप्रकाश गुर्जर एवं विमला गुर्जर के घर में 8 जनवरी 1984 को जन्मी सौम्या गुर्जर आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनकर उभरी है। पूर्व महिला आयोग की सदस्य एवं वर्तमान में करौली जिला परिषद सदस्य डॉ. सौम्या गुर्जर एक दशक से प्रदेश के पिछड़े जिले करौली में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन कर उभर रही है। वह हर क्षेत्र में गांव-गांव, ढाणी-ढाणी जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों, स्वास्थ्य, शिक्षा के बारे में जागृत कर बालिकाओं को शिक्षा से जोड़कर का प्रयास कर रही है। साथ ही दहेज प्रथा लगाम लगाने का संदेश देकर बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं की मिसाल पेश कर रही है।

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    श्याम नगर मेट्रो स्टेशन ऐसा अकेला स्टेशन जहां सारे काम महिलाओं के जिम्मे हैं

    जयपुर मेट्रो दुनिया में ऐसी अकेली. जहां सर्वाधिक 30% महिलाएं, ये रोज 134 ट्रेनों को संभालती हैं

    देश के पहले महिला शक्ति मेट्रो स्टेशन श्याम नगर को 30 माह पूरे हो गए हैं। यहां 32 महिला कर्मचारी दो शिफ्टों में काम करती है। स्टेशन मैनेजर से लेकर हाउसकीपिंग और पुलिसिंग तक महिलाएं ही संभालती हैं। रोज़ 134 ट्रेनों के ऑपरेशन को अंजाम देती हैं। गौरतलब है कि दुनिया में जयपुर मेट्रो ही ऐसा अकेला मेट्रो सिस्टम है, जहां सर्वाधिक 30% स्टाफ महिलाओं का है। आमतौर पर रेलवे और मेट्रो को सबसे ज्यादा मुश्किल पेशा माना जाता है...यही वजह है कि दुनिया में कहीं भी इस सिस्टम में 5 से 7 फीसदी महिलाएं ही काम कर रही हैं।

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