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इस गांव में कोई अपनी बेटी ब्याहने को तैयार नहीं, 60 फीसदी लड़के रह गए कुंआरे

हाथ की चक्की से आटा पीसती हैं महिलाएं, बच्चे चिमनी की रोशनी में पढ़ते हैं, सरकारी योजनाएं महज ख्वाब

Dainik Bhaskar

Jan 29, 2018, 04:51 AM IST
youth unmarried due to Lack of basic necessities in village

जयपुर. दुनिया साइबर युग में जी रही है। रिश्ते ऑनलाइन तय हो रहे हैं, लेकिन राजस्थान के करौली जिले में करणपुर डांग इलाके की चार ग्राम पंचायतों दौलतपुरा, निभैरा, राहिर और बहादुरपुर के 60 फीसदी युवाओं की सिर्फ इसलिए शादी नहीं हो रही है कि उनके गांव में न सड़कें हैं, न बिजली। लोग इस गांव में अपनी लड़की ब्याहना ही नहीं चाह रहे। लड़के अपने भाग्य को कोस रहे हैं कि उन्होंने इस गांव में जन्म ही क्यों लिया।


- आज स्थिति यह है कि वे जवानी से अधेड़ावस्था में पदार्पण कर चुके हैं, लेकिन हाथ पीले होने की हसरत आज भी पूरी नहीं हो पाई है। सरकार एक ओर गांव और ढाणियों को बिजली से रोशन करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर करणपुर क्षेत्र के 18 गांवों में कल भी अंधेरा था और आज भी है। लोगों ने आज तक बिजली के दर्शन नहीं किए।


- इन पंचायतों के गांवों में बिजली नहीं होने से ग्रामीण महिलाएं आज भी हाथ की चक्की से आटा पीसती हैं या फिर दूर गांव में डीजल इंजन की चक्कियों पर जाकर आटा पिसवा कर लाती हैं। बच्चे तो चिमनी की रोशनी में ही पढ़ाई करते हैं।

सबसे बड़ा दर्द : 21 गांवों में सड़क नहीं
भर्रपुरा, दोहरी, चिरमिल, पालरी, बामूदा, वासौली, झूकरी, बंधबारा, दर्रा, धीमरपुरा, नीदरियापुरा, फजितपुरा, फत्तेपुरा, मोहनीपुरा, रोधईयापुरा, गोठियापुरा, हसनपुर गुर्जर बस्ती, हसनपुर बैरवा बस्ती, गौटा मीणा, चचेड़ी, हसनपुर। ये सभी गांव कैलादेवी अभयारण्य की सीमा से बाहर हैं।

दुर्भाग्य : अभयारण्य के सड़क विहीन गांव
बीरमकी, मरमदा, भोपारा, मोरोची, रायबेली, कलारीपुरा, आरामपुरा, चरीकाहार, रायबेली मथुरेकी, धाधुरेत, चूरियाकी, करई, मातोरियाकी, पहाड़पुरा, पातीपुरा, धोधाकी, रतनूपुरा, चाडक्या खुर्द, चाडक्या कला, रसीलपुर, रावतपुरा, चैड़ियाखाता, बहरदा, लड़ेकी डंगरिया, पाटोरन, राहिर, बीचकापुरा, सैमरी, आमरेकी, बिजोदेकी, गुआड़ी, कूरतकी, बनीजरा, सोनपुरा, माणिकपुरा, गजरेटा, दयारामपुरा, पाटोरन।

ख्वाब :18 गांवों को बिजली का इंतजार
दलापुरा, दोहरी, भर्रपुरा, पाटोर, रोधईयापुरा, फत्तेपुरा, खेड़ा, मोहनीपुरा, गोठियापुरा, फरीदापुरा, टाटूकापुरा, पालरी, चिरमिल, मल्हापुरा, बंधबारा, बासौली, दर्रा, अंगदकापुरा। ये सभी गांव कैलादेवी अभयारण्य की सीमा से बाहर हैं।

यूं करते हैं मोबाइल चार्ज
बिजली के बिना मरमदा गांव के लोग 3 किमी दूर लखरुकी गांव में अपने मोबाइलों को चार्ज करने जाते हैं। पहले मरमदा में सौर ऊर्जा प्लांट था। अब कई साल से वह खराब पड़ा है।

नियम ही ऐसे हैं
करणपुर क्षेत्र की निभैरा, राहिर, दौलतपुरा, बहादुरपुर ग्राम पंचायत के 52 गांवों में बिजली लाने में वन विभाग बाधक बना हुआ है। दरअसल इन पंचायतों के गांव कैलादेवी वन अभयारण्य क्षेत्र में हैं। जंगल में बसे गांवों में बिजली के तार गुजरने की अनुमति नहीं दी जाती है। ग्रामीणों को सौर ऊर्जा का इंतजार है।


बिजली उपकरण बने शोपीस
भूले-भटके जिस परिवार को गिफ्ट के तौर पर या किसी समारोह में टीवी, कूलर या पंखे मिले हैं, बिजली न होने के कारण सारा सामान घर में शोपीस की तरह रखा है।

सौर ऊर्जा की प्रतीक्षा में ये गांव
निभेरा, वीरमकी, मरमदा, भोपारा, आशाकी, मोरोची, मूलापुरा, रायबेली, खिजूरा, बंधवारा, दौलतपुरा, वहरदा, चैड़ियाखाता, रावतपुरा, रसीलपुर, डंगरा, चाडक्याकलां, रतनूपुरा, चाडक्याखुर्द, धोधाकी, पातीपुरा, पहाड़पुरा, मातोरियाकी, कल्याणपुरा, नैनियाकी, हरीकी, पुलनकी, करई, चूरियाकी, धांधूरेत, रायबेली मथुरेकी, चरीकाहार, आरामपुरा, कलारीपुरा, मांडीभाट, चैनापुरा, विसूरी, बहादुरपुर, राहिर, सैमरी, सोनपुरा, माणिकपुरा, बनीजरा, कूरतकी, बिजोदेकी, गुआड़ी, आमरेकी, बीचकापुरा, घेरकापुरा, गसीनपुरा, चोवेकी, अलबतकी।

पूरी उम्र दुख में गुजर गई
आशाकी गांव की वृद्धा ननकी देवी बोली- मेरी तो उमर ही गुजर गई। आज तक बिजली कौ उजेरो नहीं देखौ। ये कैसे होवे। पूरी जिंदगी दुखन में निकार दई।

जिम्मेदार बोले - रिश्ते होने ही बंद हुए
करणपुर डांग क्षेत्र की ग्राम पंचायत निभैरा, दौलतपुरा, चैड़ियाखाता, राहिर में चिमनी की रोशनी से ही घरों में उजाला होता है। कई बार सौर ऊर्जा की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। इन गांवों में शादी-विवाह के रिश्ते भी होने बंद हो गए हैं।

- गायत्री देवी, सरपंच, निभैरा

सब जगह पहुंच गई बिजली
कोई गांव बिजली से वंचित नहीं है। सभी गांवों में बिजली पहुंच चुकी है। जो ढाणियां बिजली से वंचित हैं, उनमें कार्य चल रहा है। कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र के बसे गांवों में बिजली नहीं पहुंचाई जा सकती है।
- प्रमिन्द्र रंजन, एक्सईएन, बिजली निगम, करौली

सड़क बनाने को तैयार हैं
सपोटरा क्षेत्र में 53 गांव ऐसे हैं जिनमें वन विभाग सड़क बनाने की अनुमति नहीं दे रहा है। कई बार प्रस्ताव बनाकर ऊपर भेजा। आज तक अनुमति नहीं मिली। हम तो सड़क बनाने को तैयार हैं।
- रामकिशोर मीना, एक्सईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, सपोटरा

सरकार बनाएगी सड़क
कैलादेवी अभयारण्य के गांवों में सड़क व बिजली की सुविधा नहीं दी जा सकती है। अभयारण्य सीमा से बाहर के गांवों में सार्वजनिक निर्माण विभाग की मदद से मिशन लिंक व गौरव पथ योजना के तहत सड़क बनाने का प्रयास किया जाएगा।
- राजपाल यादव, उपखंड अधिकारी, सपोटरा

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