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शस्त्र संतान में दिखा अपनों के बीच सत्ता के लिए संघर्ष

सिटी रिपोर्टर | जयपुर सत्ता का मोह जिंदगी में बहुत ही बड़ा मोह कहलाता है। सत्ता एक ऐसी मोह-माया है जो घर, परिवार...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:40 AM IST
सिटी रिपोर्टर | जयपुर

सत्ता का मोह जिंदगी में बहुत ही बड़ा मोह कहलाता है। सत्ता एक ऐसी मोह-माया है जो घर, परिवार और समाज में लोगों के बीच एक कड़वाहट और संघर्ष पैदा करती है। फिर चाहे वो राजा-महाराजाओं का दौर रहा हो या आज का दौर। खून के रिश्तों पर भी कई बार सत्ता-मोह प्रहार कर डालता है। थिएटर ओलिंपिक के आखिरी दिन रविवार को अशोक सागर निर्देशित नाटक ‘शस्त्र संतान’ में ऐसी ही संवेदनाओं को दर्शाया गया। पंद्रह दिन चले इस थिएटर फेस्ट में देश भर से कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। शहर में 15 नाटकों का मंचन हुआ जिनमें रीजनल और हिंदी नाटक शामिल थे।

रिश्तों को खोने की कहानी : यह नाटक दो भाइयों के बीच सत्ता के लिए चल रहे संघर्ष पर आधारित है। किस तरह भाई-भाई के बीच तनाव, षड्यंत्र भव्य रूप लेते हैं। अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के पीछे लोग अपने रिश्तों को खोने के लिए भी तैयार हैं। राजगद्दी एक ऐसा लालच है जो कहीं बेवजह रिश्तों को जोड़े रखता है तो कहीं ये लालच इंसान पर इस कदर हावी हो जाता है कि उसे अपने स्वार्थ के अलावा कुछ और नजर ही नहीं आता। ये कहीं चापलूसी तो कहीं आपसी संघर्ष को जन्म देता है। रिश्तों और सत्ता के बीच के नाटकीय खेल को स्टीक संवादों के जरिए पेश किया गया।