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नर्सिंगकर्मी 500 कैंपों के माध्यम से 1 लाख लोगों को दे चुके हैं बेसिक लाइफ सपोर्ट के साथ सीपीआर की ट्रेनिंग

हैल्थ रिपोर्टर. जयपुर | सड़क दुर्घटनाओं में मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहे लोगों को बचाने के लिए एसएमएस अस्पताल के एक...

Danik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:50 AM IST
हैल्थ रिपोर्टर. जयपुर | सड़क दुर्घटनाओं में मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहे लोगों को बचाने के लिए एसएमएस अस्पताल के एक नर्सिंग कर्मी नौकरी के साथ 10 साल से बेसिक लाइफ सपोर्ट के जरिए सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद कर जान बचाने में लगे हुए हैं। वे स्वयं के साथ लोगों को भी सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को बेसिक लाइफ सपोर्ट के साथ सीपीआर की ट्रेनिंग के जरिए मदद करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह शक्स है अस्पताल के ट्रोमा सेंटर और परिवहन विभाग के रोड सेफ्टी सेल में कार्यरत राजकुमार राजपाल। राजपाल 10 साल में स्कूलों, कॉलेजों, गार्डन, ऑफिसों में 500 से अधिक कैंपों के जरिए 1 लाख से अधिक लोगों को बेसिक लाइफ सपोर्ट की ट्रेनिंग दे चुके हैं। इसमें आम आदमी के साथ आईएएस, आरएएस, आईएफएस, आईपीएस सहित अन्य अफसर तक शामिल हैं। इतना ही नहीं इनसे जिन व्यक्तियों ने अपने परिजनों को खोया है, वे लोग भी राजपाल से जुडे हुए हैं।

राजकुमार राजपाल की ओर से लोगों को ट्रेनिंग दी गई।

यह बताते हैं ट्रेनिंग में

ट्रेनिंग में राजपाल लोगों को बेसिक लाइफ सपोर्ट के साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश गुड समेरिटन के बारे में बताते है कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने पर पु‍लिस और अस्पताल प्रशासन कोई सवाल-जवाब नहीं करेगा। दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति को किस तरीके से उठा कर एंबुलेंस या गाड़ी में शिफ्ट करना चाहिए। वे बताते है कि घायल व्यक्ति के अगर मुंह में से खून और उल्टी हो रही है तो उसे करवट दिलाना जरूरी है। ताकि घायल की श्वास नली अवरूद्ध नहीं हो। घायल की नब्ज और श्वास नहीं चल रही है तो तुरंत सीपीआर दिया जाए। सीपीआर 1 मिनिट में 100 से 120 बार छाती स्टरनम बोन पर 2 से 2.4 इंच तक दबाव व प्रत्येक 30 दबाव के बाद मुंह से दो बार कृत्रिम श्वास दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रखी जाए, जब तक काई चिकित्सीय सहायता या एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंचती है।

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