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मेघालय के नतीजे प्रदेश में करवा सकते हैं किरोड़ी की भाजपा में वापसी

News - त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के चुनाव नतीजों ने साबित कर दिया है कि मोदी लहर का असर देश में अब भी है। पिछले विधानसभा...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:50 AM IST
मेघालय के नतीजे प्रदेश में करवा सकते हैं किरोड़ी की भाजपा में वापसी
त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय के चुनाव नतीजों ने साबित कर दिया है कि मोदी लहर का असर देश में अब भी है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास तीनों राज्यों में से सिर्फ नगालैंड में एक सीट थी। शनिवार को आए 2018 के चुनाव नतीजों में भाजपा त्रिपुरा में अकेले के दम पर सरकार बना रही है। नगालैंड में 11 और मेघालय में 2 सीटों पर जीत रही है। हालांकि भाजपा तीनों ही राज्यों में सरकार बनाने का दावा कर रही है। मेघालय में एनडीए की एलायंस नेशनल पीपुल्स पार्टी, कांग्रेस के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। कांग्रेस ने यहां 21 सीटें जीती हैं जबकि 19 सीटों पर एनपीपी ने कब्जा जमाया है। एनपीपी, 2016 में भाजपा के गठबंधन एनडीए में शामिल हो चुकी है। चुनाव नतीजों से उत्साहित भाजपा तीनों ही राज्यों में सरकार बनाने की बात कह रही है। ऐसे में मेघालय में भाजपा और एनपीपी गठबंधन बन जाती है तो इसका असर राजस्थान की राजनीति पर भी आ सकता है।

इन वजहों से हो सकती है वापसी

भाजपा से पहले रहा है जुड़ाव : किरोड़ी लाल मीणा पिछली वसुंधरा सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद 2008 में आई गहलोत सरकार में किरोड़ी सीधे तो शामिल नहीं हुए लेकिन उनकी प|ी गोलमा को मंत्री बन गईं। इसके बाद से भाजपा और किरोड़ी के संबंधों में खटास आ गई थी। प्रदेश में 200 विधानसभा सीटों में से एनपीपी के चार विधायक हैं। इसमें किरोड़ी लाल लालसोट से, उनकी प|ी गोलमा देवी राजगढ़ लक्ष्मणगढ़ से, गीता वर्मा सिकराय से और आमेर से नवीन पिलानिया हैं।

शीर्ष नेताओं से संपर्क कायम : मीणा के भाजपा के शीर्ष नेताओं से अच्छे संबंध रहे हैं। पिछले काफी से उनके पार्टी में शामिल होने की अटकलें भी चल रही थीं। किरोड़ी कई बार केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात कर चुके हैं। इसके अलावा पिछले दिनों वे मध्यप्रदेश में हुए उपचुनावों के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ चुनावी रैली में शामिल भी हुए थे।

जातीय नेता के रूप में पहचान : किरोड़ी लाल मीणा प्रदेश के कद्दावर जातीय नेता के रूप में पहचाने जाते हैं। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं। हालांकि अब उन्हीं के समाज के कई नेता खुलकर उन्हें चुनौती दे रहे हैं। मीणा ने प्रदेश में 2013 के विधानसभा चुनावों में नई गठित एनपीपी के बैनर तले 134 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे। लेकिन इनमें से सिर्फ 4 ही जीते और 110 की तो जमानत जब्त हो गई।

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