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50 लाख की अपनी लैब कबाड़, प्राइवेट लैब में होती है सड़कों की जांच

पीडब्ल्यूडी में सड़कों की जांच के लिए सेंट्रल लैब है और इसमें सड़कों की जांच होनी चाहिए ताकि ठेकेदारों के माध्यम से...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:55 AM IST
50 लाख की अपनी लैब कबाड़, प्राइवेट लैब में 
 होती है सड़कों की जांच
पीडब्ल्यूडी में सड़कों की जांच के लिए सेंट्रल लैब है और इसमें सड़कों की जांच होनी चाहिए ताकि ठेकेदारों के माध्यम से लगाई जा रही घटिया सामग्री उजागर हो सके, लेकिन विभाग में ऐसा नहीं हो रहा है। इंजीनियर ठेकेदारों से मिलकर प्राइवेट लैब पर सड़कों की जांच करा रहे हैं। इससे 50 लाख की लागत से बनी सेंट्रल लैब कबाड़ हो रही है। लैब में पहले जहां हर महीने 400 से अधिक सैंपल आते थे, लेकिन चार साल से गिने-चुने सैंपल आ रहे हैं।

एक साल से एक भी सैंपल नहीं आया। लैब में नियुक्त 20 कर्मचारियों को बिना किसी काम हर माह 12 लाख रु. वेतन दिया जा रहा है। प्राइवेट लैब में सैंपल जाने से प्रदेश में बन नहीं सड़कों की क्वालिटी पर सवाल खड़ा हो गया है। यही नहीं जिन लैब से इंजीनियर सैंपलों की जांच करा रहे हैं, वे लैब भी विभाग से अधिकृत नहीं है। सेंट्रल लैंब में चार साल पहले सड़कों-बिल्डिंग में काम आने वाली रोडी, सीमेंट, बजरी, सरिया, डामर, गिट्टी की जांच के लिए हर महीने 400 से अधिक सैंपल आते थे। जांच में 20 प्रतिशत सैंपल फेल तक साबित हुए। अब चार साल से इंजीनियर मनमर्जी से प्राइवेट लैंब पर सैंपलों की जांच करा रहे हैं।

ठेकेदार लेकर जा रहे हैं जांच के लिए सैंपल

सड़कों की जांच के लिए इंजीनियर को मनमाफिक सड़क का किनारा काट कर ले जाना चाहिए, लेकिन विभाग में इसका उल्टा हो रहा है। ठेकेदार ही सड़क की जांच के लिए प्राइवेट लैब पर सैंपल ले जा रहा है। रिपोर्ट को बिलों में लगा कर भुगतान उठा रहे हैं। ताकि घटिया सामग्री का पता तक नहीं चले।


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 होती है सड़कों की जांच
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