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विद्यार्थी मित्रों को नियमित करने ‘संकल्प’, अब सदन में मुकरे मंत्री

News - राज्य में कार्यरत विद्यार्थी मित्रों का नियमित होने का सपना एक बार फिर टूट गया। अब तक तो उन्हें उम्मीद थी कि चाहे...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 03:00 AM IST
विद्यार्थी मित्रों को नियमित करने ‘संकल्प’, अब सदन में मुकरे मंत्री
राज्य में कार्यरत विद्यार्थी मित्रों का नियमित होने का सपना एक बार फिर टूट गया। अब तक तो उन्हें उम्मीद थी कि चाहे देर-सवेर ही सही, मौजूदा भाजपा सरकार उन्हें जरूर सरकारी सेवा में नियमित करेगी। इसके पीछे कारण भी था। बीते विधानसभा चुनाव में उतरते समय भाजपा के सुराज संकल्प पत्र में दो जगह विद्यार्थी मित्रों को नियमित किए जाने का भरोसा दिलाया गया था। लेकिन इसी बजट सत्र में संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ विधानसभा में इस बात से साफ मुकर गए।

राठौड़ ने विधानसभा में यह कहा कि सुराज संकल्प पत्र में भाजपा ने यह कभी नहीं कहा कि विद्यार्थी मित्रों और अन्य को सरकारी नौकरी देंगे। ऐसे में अब विद्यार्थी मित्रों की नियमित होने की रही-सही उम्मीद भी खत्म हो गई है। विद्यार्थी मित्रों को लेकर कब किसने क्या कहा? उनकी पीड़ा किसने किस तरह महसूस की और क्या वादे किए।

पेश है इसी को लेकर भास्कर की विशेष रिपोर्ट:

सुराज संकल्प पत्र में दो जगह नियमित करने का दावा

विपक्ष में सताती है पीड़ा, सरकार में आते ही भूल गए

विद्यार्थी मित्रों के मामले में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां विपक्ष में तो खूब पीड़ा जताती हैं लेकिन सरकार में आते ही अपने वादे भूल जाती हैं। 27 मार्च, 2012 को मौजूदा गृहमंत्री और तत्कालीन विधायक गुलाबंचद कटारिया ने विधानसभा में कहा कि ‘मैं सिर्फ भाषण के लिए ही नहीं बोल रहा हूं बल्कि अपनी अंत: पीड़ा से बोल रहा हूं। चार-चार हजार रुपए की नौकरी करके क्या कोई विद्यार्थी मित्र अपने बच्चों को दूध पिला सकता है। उसके बच्चों की पीड़ा आप समझते हो। वह किराए के मकान में कैसे रहता है और कैसे जीवन गुजारता है। शादी की होगी, बाल-बच्चे होंगे। आप सलेक्शन करते नहीं, शिक्षकों के 80 हजार से ज्यादा पद खाली हैं।’ उसी दिन कालीचरण सराफ ने कहा था कि विद्यार्थी मित्रों पर लाठियां बरसाना सरकार की संवेदनहीनता है। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे विद्यार्थी मित्रों पर आधी रात को लाठियां बरसाकर इस सरकार ने अन्याय किया है। विद्यार्थी मित्रों की मांगंे जायज हैं, सरकार उनकी मांगें नहीं मानकर अन्याय कर रही है।

देखिए...कैसे नौकरी का इंतजार करते-करते गई 28 की जान : प्रदेश में चार साल पहले 24 हजार 163 विद्यार्थी मित्र कार्यरत थे। इनमें से 18 हजार विद्यार्थी मित्रों को पंचायत सहायक के पद पर नियुक्ति मिल चुकी है जबकि 6000 अभी भी स्कूलाें में 6 हजार रुपए महीना मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनका कॉन्ट्रेक्ट भी इस साल मई में खत्म हो रहा है। उसके बाद ये विद्यार्थी मित्र भी बेरोजगार हो जाएंगे। नौकरी के इंतजार में अब तक 28 विद्यार्थी मित्रों की मौत हो चुकी है।



िवद्यार्थी मित्र


शिक्षा मंत्री


-वासुदेव देवनानी

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