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ये कैसा ट्रिपल आईटी?... सभी 22 पोस्ट खाली, ठेके के शिक्षकों के भरोसे संस्थान

केन्द्र सरकार ने भले ही ट्रिपल आईटी कोटा को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दे रखा हो लेकिन हैरत की बात है कि...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 03:00 AM IST
केन्द्र सरकार ने भले ही ट्रिपल आईटी कोटा को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दे रखा हो लेकिन हैरत की बात है कि पांच साल बाद भी संस्थान के पास पढ़ाने के लिए एक भी नियमित शिक्षक नहीं है। संस्थान में फैकल्टी के नाम पर स्वीकृत सभी 22 पोस्ट खाली हैं। संस्थान में पढ़ रहे 299 बच्चों का भविष्य कॉन्ट्रेक्ट पर लाये गये 11 शिक्षकों के भरोसे है। हालात ये हैं कि पिछले 5 साल में भी यह पद तो नहीं भरे जा सके हैं, लेकिन कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग का एक बैच जरूर पासआउट हो गया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि कोटा में खुला यह संस्थान अब भी जयपुर के एमएनआईटी कैंपस में चल रहा है। कारण है कि अभी तक कोटा में संस्थान की बिल्डिंग नहीं बन सकी है।

कोटा ट्रिपल आईटी खुले पांच साल हो गए, अब तक न खुद का भवन , ना ही फैकल्टी

पद बना दिए, भरे नहीं

स्ट्रीम कुल पोस्ट खाली पोस्ट

कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग 9 9

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन 9 9

मैथ्स 2 2

अंग्रेजी 1 1

मैनेजमेंट/इकोनॉमिक्स 1 1

राज्य सरकार को 35% राशि देनी थी, 5 साल में एक पैसा भी नहीं दिया

साल 2013 में हुए एमओयू के मुताबिक कोटा ट्रिपल आईटी में 50% पैसा केन्द्र सरकार, 35% राज्य सरकार और बाकी 15% पैसा चार निजी कंपनियों को देना था। इसके अलावा राज्य सरकार को इस संस्थान के लिए 100 एकड़ तक जमीन भी देनी थी। राजस्थान सरकार ने कोटा में 100.37 एकड़ जमीन संस्थान के लिए आवंटित की है। इस जमीन पर चार दीवारी, साइकिल ट्रैक और सिक्योरिटी ऑफिस बन चुके हैं। लेकिन मुख्य भवन के लिए सरकार ने पैसा रिलीज नहीं किया है। वैसे सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी है कि पैसा जारी करने का मामला विचाराधीन है।

कहां से मिला कितना पैसा

गौरतलब है कि दिसंबर 2010 में यूनियन कैबिनेट ने देशभर में 20 ट्रिपल आईटी पीपीपी मोड पर खोलने की मंजूरी दी थी। इनमें से 15 ट्रिपल आईटी सत्र 2013-14 से शुरू हो गईं और इन्हें राष्ट्रीय महत्व का संस्थान भी घोषित कर दिया। केन्द्र और राज्य सरकार के अलावा राजस्थान में केयर्न इंडिया, जेनपैक्ट इंडिया, नेशनल इंजीनियरिंग इंड्रस्ट्रीज और वक्रांगी सॉफ्टवेयर लिमिटेड पार्टनर हैं। कोटा ट्रिपल आईटी की कुल लागत 128 करोड़ रुपए है। इसमें से 9.2 करोड़ मानव संसाधन विकास मंत्रालय और 14.40 करोड़ रुपए 4 निजी कंपनियों से अब तक मिले हैं। लेकिन राजस्थान सरकार ने अपने हिस्से के करीब 35% यानी करीब 44 करोड़ रुपए में से एक भी नया पैसा जारी नहीं किया है। हालांकि चार निजी कंपनियों में से केयर्न इंडिया ने ही अपने हिस्से का 6.40 करोड़ रुपए संस्थान के दिया है। बाकी ने एमओयू के वक्त 50% पैसा ही संस्थान को दिया है।

‘परमानेंट फैकल्टी नहीं होने से रिसर्च वर्क नहीं होता’

ट्रिपल आईटी कोटा के कॉर्डिनेटर राकेश जैन के अनुसार परमानेंट फैकल्टी नहीं होने से संस्थान में रिसर्च के काम रुक जाते हैं। रिसर्च ही नहीं होगी तो संस्थानों का मुख्य मकसद पूरा नहीं होता। स्थाई नौकरी नहीं होने से कॉन्ट्रेक्ट पर लगे टीचर्स का दूसरी जगह जाने का रिस्क बढ़ जाता है। वहीं, ऐसे टीचर पीएचडी नहीं करा सकते और इनके प्रमोशन, पे-स्केल ग्रोथ के मौके भी कम होते जाते हैं। केन्द्र की ओर से मिलने वाली सहायताओं में भी परेशानी आती है।