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नाटक विचार अभिव्यक्ति का एक सेक्युलर मीडियम

थिएटर ओलिंपिक्स के तहत शनिवार को सेमिनार का आयोजन हुआ जिसका विषय था एंगेजिंग विद दि कम्यूनिटी। प्रोबीर गुहा की...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:00 AM IST
थिएटर ओलिंपिक्स के तहत शनिवार को सेमिनार का आयोजन हुआ जिसका विषय था एंगेजिंग विद दि कम्यूनिटी। प्रोबीर गुहा की अध्यक्षता में हुए इस सेशन में अतुल पेठे, हिमांशु राय, अंबालाल दमामी और दैनिक भास्कर की न्यूज एडिटर प्रेरणा साहनी ने हिस्सा लिया।

अतुल पेठे का मानना था कि नाटक की स्क्रिप्ट में उसका कंटेंट, फॉर्म, आशय और उद्देश्य तय होना चाहिए। नई थिएटर स्पेस लगातार बननी चाहिए जिससे कम्यूनिटी से संवाद हो सके। प्रोबीर गुहा ने बताया कि थिएटर सेक्युलर मीडियम है जिसके जरिए रंगकर्मी अपने विचार रख सकता है। आज भी पहले स्थान पर कमर्शियल थिएटर आता है, दूसरे स्थान पर डायरेक्टर्स थिएटर और तीसरे स्थान पर वो थिएटर आता है जिसमें न डायरेक्टर होता है, न तय स्क्रिप्ट, न प्रोड्यूसर और न ही टेक्नीशियन। वही थिएटर लोगों के बीच से उठता है और उनके दिलों तक पहुंचता है, बिना आडंबर के। हिमांशु राय का कहना था कि दर्शक क्या देखना चाहते हैं यह सवाल किसी चक्रव्यूह से कम नहीं। दरअसल सारा खेल बाजार की ताकत का है। वहीं प्रेरणा साहनी का कहना था कि अखबार के जरिए नाटक को दर्शकों से कहीं ज्यादा पाठकों तक पहुंचाया जा सकता है। नाटक वही है जो उनमें उसे देखने की बेचैनी पैदा करे। मेवाड़ के गांवों में खेले जाने वाला गवरी भी कम्यूनिटी के सामाजिक और धार्मिक पहलुओं को समझाने और सुलझाने का बेहतरीन जरिया है। नाटक सिर्फ कला या साहित्य तक सीमित रखने वाली विधा नहीं। साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट में भी थिएटर के कई ऐसे प्रयोग हैं जो हर कॉनसेप्ट को नए नजरिए से देखना सिखाते हैं।