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अामेर महल अाैर अल्बर्ट हॉल पर सजी कथक की महफिल

सिटी रिपोर्टर | शहर में नाइट टूरिज्म काे प्रमाेट करने के लिए हर पूर्णिमा काे अामेर महल अाैर अल्बर्ट हॉल पर सजाई जा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:05 AM IST

अामेर महल अाैर अल्बर्ट हॉल पर सजी कथक की महफिल
सिटी रिपोर्टर | शहर में नाइट टूरिज्म काे प्रमाेट करने के लिए हर पूर्णिमा काे अामेर महल अाैर अल्बर्ट हॉल पर सजाई जा रही कथक नृत्याें की शृंखला में इस बार नृत्य गुरु संगीता मित्तल अाैर मेहा झा कासलीवाल के निर्देशन में नृत्य प्रस्तुतियां हुईं। जिनमें कलाकाराें ने कथक के पारंपरिक स्वरूप के अलावा लाेक नृत्य की बानगी भी पेश की। अामेर महल की बारहदरी में हुए कार्यक्रम में संगीता मित्तल के निर्देशन में उनके शिष्याें ने राम स्तुति पर नृत्य पेश कर एक बार फिर रामनवमी के परिवेश काे जीवंत कर दिया। इसके बाद कलाकाराें ने जयपुर घराने के कथक के पारंपरिक स्वरूप काे जीवंत किया जिसमें अामद, फरमाइशी परनें, चक्करदार ताेड़े, तिहाइयां अाैर 33 चक्कराें की अावृत्ति का प्रदर्शन खास था।

नाइट टूरिज्म काे प्रमाेट करने के लिए हर पूर्णिमा पर हाेता है एेसा अायाेजन

जीवंत हुए कथक अाैर लाेक नृत्य के रूप : अल्बर्ट हॉल में मेहा झा कासलीवाल अाैर उनकी शिष्य मंडली ने अपनी प्रारंभिक प्रस्तुति में शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को मंच पर साकार किया। उन्होंने इस माैके पर लखनऊ घराने का कथक भी पेश किया जिसमें परन, टुकड़े, लड़ी, 23 चक्कर का टुकड़ा अादि देखने याेग्य थे। अंत में लोक गीत “आन बसो नी परदेस, साजन जी म्हारा झिर मिर बरसे नैन’ में परदेस जा बसे अपने पति की वापसी की राह देखती नायिका की विरह कथा काे अपनी भावपूर्ण मुद्राअाें से जीवंत किया।

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