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डॉक्टर विनम्रता छोड़ देंगे तो यश नहीं कमा पाएंगे : डॉ. हर्षवर्धन

मैंने जब स्कूल छोड़ा तब अपने फेवरेट इंग्लिश टीचर के पास गया। उनसे पूछा, जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है? क्योंकि...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 03:05 AM IST
डॉक्टर विनम्रता छोड़ देंगे तो यश नहीं कमा पाएंगे : डॉ. हर्षवर्धन
मैंने जब स्कूल छोड़ा तब अपने फेवरेट इंग्लिश टीचर के पास गया। उनसे पूछा, जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है? क्योंकि वो अंग्रेजी के टीचर थे। उन्होंने मेरी डायरी में लिखा, ईमानदारी के साथ जीवन में कामयाबी संभव है। वो डायरी आज तक मेरे पास है। साथ ही कहा, डॉक्टर के प्रोफेशन में पैसे बहुत कमा लोगे। मगर उसूल और विनम्रता छोड़ दोगे तो यश कभी नहीं कमा पाओगे। ये बातें शनिवार को केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी, भू-विज्ञान मंत्री डाॅ. हर्षवर्धन ने कही। मौका था, महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी आॅफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के दूसरे एनुअल फंक्शन का। इस मौके पर 500 से ज्यादा स्टूडेंट्स को डिग्रियां मिलीं।

इस मौके पर यूनिवर्सिटी चेयरपर्सन प्रो. डॉ. एमएल स्वर्णकार ने कहा अपने पेशेंट्स के साथ हमेशा विनम्र और ईमानदार रहें। पद्मभूषण डॉ. शिव कुमार सरीन ने कहा, हमेशा अपने मरीजों के साथ जुड़े रहें। अपनी गलतियों से सबक लें।

Convocation

डॉ. शोभित स्वर्णकार और डॉ. अंकित मंगलूनिया को गोल्ड मेडल से सम्मानित करते हुए डॉ. हर्षवर्धन

पीडियाट्रिशियंस ने घेरकर मुझे पोलियो की गंभीर स्थिति की जानकारी दी

डॉ. वर्धन ने कहा, प्रैक्टिस के दौरान डाइग्नोसिस गलत होने पर लोग बुरा नहीं मानेंगे। मगर अपने पेशेंट के साथ बुरा कभी ना करें। वरना वो कभी आपकी कद्र नहीं करेगा। डिग्री मिलने के साथ ही पढ़ाई पूरी नहीं होती। आगे पढ़ते रहना। डिग्री तो कोई भी ले सकता है। मगर असाधारण योग्यता वाले ही नरेंद्र मोदी बनते हैं। 1993 में स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद पहली दफे मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के फंक्शन में बुलाया गया। स्टेज पर पर्ची में लिखकर किसी ने संदेश भेजा कि आपसे मिलना है। मंच से नीचे उतरा तो कुछ पीडियाट्रिशियन ने ग्रुप बनाकार मुझे घेर लिया और कोने में ले गए। उन्होंने बताया कि 60 फीसदी पोलियो भारत में है। उसमें से 10 फीसदी अकेले ईस्ट दिल्ली में है। घर लौट कर मैंने काफी सोचने के बाद डब्ल्यूएचओ को ख़त लिखा। उन्होंने मुझे डॉक्यूमेंट्स भिजवाए। पेपर्स को पढ़कर बीमारी की गंभीरता को पूरी तरह से जान पाया। डॉक्टर्स की एक आवाज और जागरूकता से देश की सेहत सुधर सकती है।

इन्हें मिले गोल्ड मेडल

डाॅ. शोभित स्वर्णकार को एमबीबीएस में टॉपर के रूप में शाह गणेशचंद लोढा स्मृति गोल्ड मेडल दिया गया। यूनिवर्सिटी गोल्ड मेडल डाॅ. शुभि सक्सैना को एम डी पैथोलोजी में प्रथम स्थान हासिल करने के लिए, डाॅ. अंकित मंगलूनिया को एम डी जनरल मेडिसिन में प्रथम स्थान पाने पर, डाॅ. सम्राट करण सहगल को एमडी साइकेट्री, डाॅ. सोनल गुप्ता को एमडी पीडियाट्रिक्स, डाॅ. रुचिका चौधरी को एमडी एनेस्थीसिया में, डाॅ. अंकित जैन को एमडी रेडियोडायग्नोसिस में, डाॅ. महाक्षित को एमएस जनरल सर्जरी, डाॅ. मोनिका जैन को एमएस गायनी, डाॅ. अभिषेक को एसएस आर्थोपेडिक्स, डाॅ. रसिक प्रिया संधु को एमएस ऑप्थेल्मोलॉजी के लिए गोल्ड मेडल मिला।

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