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मार्च में चुकाया, अब अप्रैल में फिर आएगा बिजली का बिल

मार्च में बिजली बिल अदा करने वाले उपभोक्ताओं को अब अप्रैल में भी बिल भरना पड़ेगा। अब हर माह बिजली बिल आएगा। तीनों...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:20 AM IST
मार्च में बिजली बिल अदा करने वाले उपभोक्ताओं को अब अप्रैल में भी बिल भरना पड़ेगा। अब हर माह बिजली बिल आएगा। तीनों बिजली कंपनियों की टैरिफ याचिका पर विद्युत नियामक आयोग की पालना में बिलिंग में यह बदलाव अप्रैल से होना है। अभी तीनों डिस्कॉम में इसकी कोई तैयारी नहीं की गई है। संभवतया अप्रैल में कुछ ही सर्कल्स में हर माह बिलिंग का सिस्टम लागू हो पाए। मई में सभी सर्कल्स के बिजली उपभोक्ताओं को हर महीने बिलिंग और हर महीने भुगतान के लिए तैयार रहना ही पड़ेगा।

छोटे उपभोक्ताओं को राहत

दो महीने के बजाय एक ही महीने में बिल की गणना होने से टैरिफ के अनुसार छोटे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। चूंकि एक महीने के उपभोग में कंज्यूमर छोटी श्रेणी के स्लैब में अाता है और उसके लिए बिजली की दर भी कम होती है। जबकि दो महीने की गणना करने पर बिजली की उपभोग दुगुना हो जाता है और टैरिफ स्लैब के अनुसार उसकी दर भी ज्यादा होती है। हालांकि कंपनियां दो महीने के बिलों में उपभोग की गणना एक ही महीने में करने का दावा करती रही हैं, लेकिन कुछ मामलों में इस गणना में गड़बडिय़ां भी सामने आई हैं।

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ऐसे होगा फायदा

किसी परिवार में यदि दो महीने में 350 यूनिट बिजली की खपत होती है। दो महीने के बिलिंग सिस्टम से उसका औसतन उपभोग 175 माना जाता है चाहे उसने एक महीने में 140 व दूसरे महीने में 210 यूनिट खर्च किए हो। अब यदि उसका एक महीने की वास्तविक खपत 140 यूनिट होती है तो उसे 6 रुपए 10 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से बिल आएग। पहले इसी खपत के लिए इसे 6 रुपए 40 पैसे प्रति यूनिट भुगतान करना पड़ता था।

यूं समझें बिलों की गणना

2 माह में बिल आता है तो

कुल यूनिट 350

औसत यूनिट 175

स्लैब 6.40 रु./यूनिट

बिल इस तरह बनेगा

350 X 6.40 रु.

= 2240 रुपए

1 माह में बिल आता है तो

पहले महीने 140 यूनिट, स्लैब 6.10 रु./यूनिट और बिल 854 रु.

दूसरे माह 210 यूनिट, स्लैब 6.40 रु./यूनिट और बिल 1344 रु.

2 महीनों का कुल बिल

2198 रु.

भ्रांति और वास्तविकता

आम तौर पर लोगों में भ्रांति है कि 2 माह के बिल में उपभोग ज्यादा होता है, जिससे बड़ी स्लैब से गणना की जाती है और एक महीने के बिल में छोटा स्लैब होगा, यानी बिजली की दर भी कम लगेगी। जबकि 2 माह के बिल की गणना का कंप्यूटराइज्ड तरीका यह है कि कुल रीडिंग को औसतन आधा कर लिया जाता है, उसके अनुसार स्लैब तय होता है।