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6 माह जेडीए ने पैसा नहीं दिया, अब जेवीवीएनएल तैयार नहीं

जमवारामगढ़ स्टेट हाईवे पर 8 माह से रुके काम को जल्द पूरा करने के लिए सीएम के निर्देश मिले तो जेडीए एक्शन में आ गया।...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:20 AM IST
जमवारामगढ़ स्टेट हाईवे पर 8 माह से रुके काम को जल्द पूरा करने के लिए सीएम के निर्देश मिले तो जेडीए एक्शन में आ गया। बिजली-पानी की लाइनें शिफ्ट करने के लिए जेडीए ने दोनों विभागों में साढ़े 4 करोड़ रुपए जमा करा दिए। हालांकि अब मुख्यमंत्री स्तर पर काम में जल्दबाजी देख संबंधित विभाग बैकफुट पर है। जेवीवीएनएल ने जेडीए को लिखा है अगर जल्दबाजी में काम कराना है तो खुद के स्तर पर काम करा लें। भले ही वो पैसा वापस ले लें। इसके पीछे काम में देरी की आशंका पर सरकार की नाराजगी का डर है। दूसरी ओर, जेडीए के लिए फिर मुसीबत खड़ी हो गई कि जिस काम की प्लानिंग ही जेवीवीएनएल के स्तर पर आगे बढ़ने की बात थी, उसको अब वो अपने स्तर पर कैसे करें? बहरहाल काम कौन करेगा? यह तय नहीं हो पा रहा है। उधर जब तक रोड साइड से बिजली की लाइनें नहीं हटेंगी, तब तक काम आगे बढ़ना संभव नहीं।

23 मार्च को पैसे जमा कराए, 26 मार्च को लौटाने का पत्र मिला

काम पूरा होने की डेडलाइन तक तो जेडीए ही संबंधित विभागों को लाइनें शिफ्ट करने का पैसा जमा नहीं करा पाया। संबंधित विधायक जगदीश मीणा ने चुनाव नजदीक आते देख सरकार के वादे पूरे कराने के लिए सीएम को शिकायत की। इसके बाद जेडीए को जल्द काम कराने के आदेश मिले। जेडीए ने 23 मार्च को 2 करोड़ 13 लाख रुपए ट्रांसफर करके एचटी-एलटी लाइनों को शिफ्ट कराने को कहा। मामले में मुख्यमंत्री स्तर पर जल्द काम करने की हिदायत देख जेवीवीएनएल ने 2 दिन बाद ही जेडीए को पैसा रिफंड करने को कह दिया।

जेवीवीएनएल ने क्वालिटी पर उठाया सवाल?

कॉलोनियों में इलेक्ट्रिफिकेशन के जो काम जेडीए, हाउसिंग बोर्ड, यूआईटी के जरिए हो रहे हैं, उनकी क्वालिटी पर सवाल उठाते हुए जेवीवीएनएल ने खुद काम कराने की बात कही है। इस संबंध में इन विभागों को पत्र भी लिखा है। अब तक संबंधित विभाग 15% सुपरविजन चार्ज देकर खुद के स्तर पर यह काम कराते थे। जेवीवीएनएल के चीफ इंजीनियर एस.के. माथुर का पत्र मिलते ही विभागों में हड़कंप है। लेकिन जेवीवीएनलएल ने पत्र में क्वालिटी के संदर्भ में स्प्ष्ट नहीं किया है कि कहां गड़बड़ी हुई। ऐसा हुआ तो इन विभागों में डेपुटेशन पर बैठे करीब 70 इंजीनियरों के पास काम नहीं रहेगा और उन्हें वापस जाना होगा। पत्र के पीछे पावर-गेम और खरीद-फरोख्त से जुड़े काम खुद के स्तर पर लेना बताया जा रहा है। मौजूदा प्रक्रिया में जो रेगुलर सप्लायर हैं, उनसे ही माल लिया जाता है। माल की जांच भी सेंट्रल टेस्टिंग लैब में ही होती है। ऐसे में गुणवत्ता की बात गले नहीं उतर रही। दूसरी ओर आरएसआरडीसी, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई आदि में भी तो काम हो रहे हैं। अगर ऐसा है तो फिर सवाल उठता है कि वहां के काम भी क्या जेवीवीएनएल को कराने चाहिए? फिलहाल सप्ताहभर पहले जारी जेवीवीएनएल के पत्रों का जवाब नहीं भेजा जा रहा। उधेड़बुन हैं कि संबंधित बोर्ड-निगमों का मकसद प्राथमिकता के आधार पर जल्द काम कराने का है। हर स्कीम के साथ ही लाइन शिफ्ट और इलेक्ट्रिफिकेशन के काम साथ-साथ करने होते हैं। अगर जेवीवीएनएल के पास काम चले जाएंगे तो फिर उनकी प्राथमिकता से काम होंगे।

हाईवे से जुड़े तथ्य

काम : दिल्ली रोड पर सड़वा मोड से आगे सायपुरा से जमवारामगढ़ तक की रोड

मंजूरी: डेढ़ से 2 लेन की रोड को फोर लेन में तब्दील करना

बजट: 22 करोड़ 80 लाख के दो वर्कऑर्डर

शुरू हुआ: 5 मई 2017 से

डेडलाइन: मई 2018

जिम्मेदारों ने कहा