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ऑफ द रिकॉर्ड -श्याम आचार्य

जब प्रोटम स्पीकर (अस्थाई अध्यक्ष) ने स्पीकर (अध्यक्ष) का गुस्सा शांत किया राजस्थान विधानसभा में विपक्ष की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:25 AM IST

ऑफ द रिकॉर्ड -श्याम आचार्य
जब प्रोटम स्पीकर (अस्थाई अध्यक्ष) ने स्पीकर (अध्यक्ष) का गुस्सा शांत किया

राजस्थान विधानसभा में विपक्ष की लॉबी में अक्सर यह चर्चा रहती है कि आखिर स्पीकर कैलाश चन्द्र मेघवाल को गुस्सा क्यों आता है? हां पक्ष की लॉबी का कहना है कि जब विपक्ष के कुछ सदस्य नियमों की अवहेलना कर व्यवधान पैदा करते हैं तब व्यवस्था कायम करने के लिए स्पीकर को गुस्सा आता है। चौदहवीं विधानसभा के प्रोटम स्पीकर थे प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा) उन्होंने ही वर्तमान विधानसभा के 200 सदस्यों को शपथ ग्रहण करवाई। उसके बाद कैलाश चन्द्र मेघवाल स्पीकर चुने गए। बात 22 जुलाई 2014 की है। कांग्रेस प्रद्युम्न सिंह (राजाखेड़ा) ने स्पीकर से अनुरोध किया कि वे सदस्यों की बात पूरी सुने फिर निर्णय दें। उनका निर्णय शिरोधार्य होगा। …अंकित न हो, अंकित नहीं, बार-बार न कहें।…पूरक प्रश्न यदि ज्यादा भी हो जाएं तो भी नियमों में रियायत (रिलेक्स) देकर पूछने दें.. जैसा मैंने सिंचाई मंत्री के नाते स्व. भैरोंसिंह शेखावत के नाथपा झाखरी प्रश्न का 59 मिनट तक जवाब दिया। प्रद्युम्न सिंह व अध्यक्ष महोदय के बीच करीब 15 मिनट तक सवाल जवाब होते रहे। अध्यक्ष ने यहां तक कहा कि सदन में मुझे “गुंडा” “तानाशाह” और “हिटलर शाही” चलाने वाला तक कहा गया है। लेकिन काफी संवाद के बाद जब प्रद्युम्न सिंह कहा कि आप आज क्रोध में है। मेरी बात सुनेंगे तो प्रसन्न हो जाएंगे। अध्यक्ष मैं प्रसन्न होऊंगा? प्रद्युम्न सिंह-हां निश्चित रूप से। अध्यक्ष अच्छा तब बोलो। प्रद्युम्न सिंह ने कहा- आपको अंकित नहीं होगा। बैठ जाइये मत कहिये।.. अगर मैंने आपसे कई बार निवेदन किया .. (जोरों की हंसी) इस पर अध्यक्ष मेघवाल ने मुस्कराते हुए जब कहा आप दो बार इनका अंकित कीजिए तो सदन में हंसी गूंज उठी। प्रद्युम्न सिंह ने यह भी कहा, आप गुस्सा छोड़ दीजिये .. पी लीजिये और जैसे ….(हंसी) जब अध्यक्ष ने कहा- आपने आदेश दिया, पी गया फिर सदन में हंसी गूंज उठी।

“खुली पलक से झूठा गुस्सा, बंद पलक से प्यार”

चौदहवीं विधानसभा। 28 जुलाई 1914 । आसन पर अध्यक्ष कैलाश मेघवाल। शून्यकाल। सांगानेर के घनश्याम तिवाड़ी (भाजपा) का ध्यानाकर्षक प्रस्ताव। प्रस्ताव था पृथ्वीराजनगर नगर (जयपुर) ने नवीन भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अन्तर्गत नियमन प्रक्रिया पूरी कर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धि से संबंधित। ध्यानाकर्षण पेश करने की प्रक्रिया के बारे में जब घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि इसमें दो प्रक्रियाएं हैं। एक तो मैं ध्यानाकर्षण करके बैठ जाऊं फिर मंत्री वक्तव्य दे और दूसरी मैं अपनी बात संक्षेप में कह दूं और उसके बाद मंत्री अपना जवाब दें। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि आपकी दूसरी प्रक्रिया मुझे दिखी नहीं। इस पर तिवाड़ी ने कहा कि इसके बिना मैं कह नहीं सकता। तो अध्यक्ष ने तनिक पलकें झपकते हुए कहा कि आप संक्षेप में कहिये। तब तिवाड़ी ने कहा- इसीलिए तो मैं कहता हूं कि अध्यक्ष महोदय आपके लिए कि “खुली पलक से झूठा गुस्सा, बंद पलक से प्यार।” यह जो आपने बंद पलक की तभी इजाजत मिल गई। इस कथन पर अध्यक्ष तो मंद-मंद मुस्कराते रहे, सत्तापक्ष में भी हंसी सुनाई दी।

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