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राजस्थानी बुनकरी के नए रूप

दीप्ति भले ही राजस्थानी कारीगरी को अपने कार्य के माध्यम से प्रोत्साहित कर रही हों लेकिन वह महाराष्ट्रियन हैं और...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:25 AM IST

राजस्थानी बुनकरी के नए रूप
दीप्ति भले ही राजस्थानी कारीगरी को अपने कार्य के माध्यम से प्रोत्साहित कर रही हों लेकिन वह महाराष्ट्रियन हैं और मुंबई से हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने फैशन में ग्रेजुएशन एसएनडीटी गर्ल्स कॉलेज जुहू, मुंबई से किया है और वह अपने परिवार में पांच भाई-बहनों में सबसे छोटी थीं। वह कहती हैं कि मैं शुरू से ही रचनात्मक स्वभाव की रही हूं, जिसने मुझे आगे बढ़ाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। दीप्ति कहती हैं कि मेरी बचपन से ही फैशन में रूचि थी, मुझे अपने और दूसरों के कपड़ों को चुनना अच्छा लगता था। मेरे परिवार, दोस्त और आसपास मौजूद लोग हमेशा मेरे फैशन सेंस की तारीफ करते थे। मुझे अलग-अलग तरह के कपड़ों, रंगों और पूरे फैशन उद्योग में रुचि थी। इसलिए फैशन डिजाइनिंग को कैरियर के रूप में चुनना नेचुरल था। फैशन के प्रति लगाव की वजह से ही मैं राजस्थान पहुंची। इसलिए अपने आपको स्थापित करने के लिए मैं दो साल जयपुर में रही। स्थानीय कारीगरों के साथ लगातार संपर्क में रहने के कारण स्थानीय शिल्प, कढ़ाई की तकनीक और समकालीन तरीके से प्रिंटिंग तकनीक को मैंने जाना। तभी मैंने अपना पहला लेबल परिक्रमा शुरू किया और उसके बाद जोरया और अब नॉरा तैयार हुआ। हमारे कलेक्शन में हम ऐसे आरामदायक कट्स और पीस तैयार करते हैं जिन्हें अलग-अलग स्टाइल से कैरी किया जा सके। सिल्क, जॉर्जेट, सिल्क, वेलवेट, सिल्क नेट और सिल्क हबताई पर फिनिशिंग के साथ कपड़े तैयार किए जाते हैं। अधिकांश कपड़ा स्थानीय लोगों से खरीदते हैं।

फैशन & स्टाइल

अस्मिता अग्रवाल

फैशन राइटर, नई दिल्ली

नॉरा के कपड़ाें में राजस्थानी कढ़ाई और प्रिंट्स के साथ समकालीन सिलहूट्स भी दिखाई देते हैं...

महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र मगर सामाजिक तौर पर नहीं

जयपुर के आसपास बसी ग्रामीण महिलाओं, उनकी जीवनशैली और चुनौतियों के बारे में दीप्ति कहती हैं कि हमारी संस्था इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि हम समाज को कुछ दे सकें। मुनाफे का कुछ हिस्सा उन कारीगरों को अवश्य दिया जाता है जो हमारे साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। हमारी एक सेल सिर्फ महिला कर्मचारियों के लिए कार्य कर रही है। यहां पर ऐसी बहुत सी महिलाएं हैं, जो आर्थिक रूप से भले स्वतंत्र हैं, मगर सामाजिक तौर पर उन पर कई पाबंदिया हैं। यह सेल उन महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, आत्मनिर्भर बनाने, परिवार और समाज से जुड़े निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती है। दीप्ति को सबसे ज्यादा डिजाइनर राहुल मिश्रा पसंद हैं, वह कहती हैं कि वह अपने एम्ब्रॉयडरी और थ्री डी पैटर्न के डिजाइन में जटिलता लाते हैं और वे मॉडर्न सिलहूट्स के साथ मैच होते हैं।

पारंपरिक बुनकरी और आधुनिक डिजाइन का संयोजन

नॉरा का यह नाम इसलिए रखा गया है क्योंकि यह पारंपरिक कला और समकालीन स्टाइल को कलात्मक तकनीक और अखंडता को बनाए रखते हुए दुनिया को रोशन कर रहा है। दीप्ति अपने कपड़ों में राजस्थानी तत्व इस्तेमाल करती हैं। ऐसे में उन्हें आधुनिक बनाने के तरीके के बारे में वह कहती हैं, कि मुझे प्रेरणा राजस्थान से मिलती है। यह ऐसी कपड़ों की लाइन है, जो हर महिला के ड्रीम वॉर्डरोब में होती है - स्मार्ट कट्स, क्लासी टेस्ट, बोल्ड एटीट्यूड, स्टाइलिंग, सॉफ्ट फेब्रिक हो। यह कलेक्शन एक असली महिला के लिए है, जो अपने लिए शक्ति की प्रेरणा खुद से लेती है। यह महिलाएं पैरोडाइज या फैशन ट्रेंड का पीछा नहीं करती है। उनके आत्मविश्वास और दृढ़संकल्प के कारण उन्हें नॉरा वुमन भी कह सकते हैं।

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