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महिला हो या पुरुष विरोध में दृढ़ता जरूरी : ब्रजेंद्र कुमार

News - महिला हो या पुरुष उनके विरोध में दृढ़ता होनी चाहिए। नारी की अस्मिता और नारी का संघर्ष हम मीरा और पद्मिनी से सीख...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:30 AM IST
महिला हो या पुरुष विरोध में दृढ़ता जरूरी : ब्रजेंद्र कुमार
महिला हो या पुरुष उनके विरोध में दृढ़ता होनी चाहिए। नारी की अस्मिता और नारी का संघर्ष हम मीरा और पद्मिनी से सीख सकते हैं। ये कहना था साहित्यकार ब्रजेंद्र कुमार सिंहल का। उन्होंने बुधवार को होटल मैरियट में दैनिक भास्कर कलम सीरीज के दौरान अपनी किताब ‘पद्मिनी’ पर बात की। सेशन में साहित्यकार नंद भारद्वाज ने उनसे सवाल पूछे। सिंहल ने महिलाओं की अस्मिता और दृढ़ता से इतिहास बदलने की शक्ति पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, इतिहास को याद करें तो हम पद्मिनी के बुलंद हौसले और दृढ़ता से इतिहास के बदलते स्वरूप को देख सकते हैं। वहीं मीरा की भक्ति भाव में भी कृष्ण के प्रति एक दृढ़ता के भाव झलकते हैं। जो आम लोगों के लिए बड़ी प्रेरणा है।





रानी पद्मिनी ने अलाउदीन खिलजी का विरोध इस तेवर से किया कि इतिहास उनके तल्ख विरोध को कभी भूल नहीं पाया। कह सकते हैं कि एक अकेली नारी ने पूरा इतिहास बदल दिया।

प्रभा खेतान की ओर से आयोजित कलम दैनिक भास्कर संवाद के प्रस्तुतकर्ता श्री सीमेंट रहे। वी केयर होटल मैरियट सहभागी थे।

संत साहित्य से रहा खास लगाव

अपनी लेखनी पर ब्रजेंद्र ने कहा कि मेरा ज्यादातर काम संतों पर आधारित रहा है। इसलिए मेरी पहचान संत साहित्य के तौर पर ज्यादा है। शायद मेरे पूर्व जन्म के कुछ संस्कार रहे होंगे जो संतों से मेरा खास वास्ता रहा है। मेरी मां संस्कृत की विदूषी थी। इसलिए 4-5 साल की उम्र से ही ग्रंथों को पढ़ने में रुचि रही, 10 से 11 वर्ष की उम्र में मैंने भगवद् गीता पढ़ ली और 15 साल की उम्र तक आते-आते मैंने करीब एक हजार से भी ज्यादा किताबें पढ़ ली थीं। जब काम शुरू किया तो संतों पर लिखने का ख्याल आया, जिसमें मैंने संतों के साधना और दर्शन पक्ष, दोनों पर लिखा। सन 2000 में जब मैंने मीरा पर किताब लिखी तब एहसास हुआ कि आप साहित्य लिख रहे हैं तो आपको साहित्य के साथ मुख्य पात्र की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी ज्ञान होना चाहिए। इससे पहले मुझे इतिहास में कोई खास रुचि या ज्ञान नहीं था। मैं लिखना कभी नहीं भूलता हूं, मुझे लगता है कि मैं हर समय लिख सकता हूं।

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