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लाल. इनसे शहर की रफ्तार पर ब्रेक

1) स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट : लागत : 2400 करोड़ रु. 3 साल में खर्च करने की योजना सबसे महत्वाकांक्षी, लेकिन इन...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:30 AM IST
1) स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट : लागत : 2400 करोड़ रु. 3 साल में खर्च करने की योजना

सबसे महत्वाकांक्षी, लेकिन इन प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा विवाद

मौके पर स्थिति : अभी तक सिर्फ अजमेरी गेट के फाउंटेन का काम ही हो पाया है। इसके आगे हैरिटेज स्ट्रीट लाइट से अंडरग्राउंड डक्टिंग तक के हर काम पर विवाद ही खड़ा हुआ है। जेडीए ने भी स्मार्ट सिटी के करीब 85 करोड़ के कामों के टेंडर किए, ज्यादातर में भ्रष्टाचार की शिकायतें रहीं। यही वजह है कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट अब तक अटका हुआ है।

2) सीतापुरा आरओबी

लागत : 87 करोड़ रु.

शिलान्यास : अगस्त, 2016

डेडलाइन : मई, 2018

मौके पर स्थिति : आधा काम भी नहीं हुआ है। मौके पर काम रुका हुआ है।

फायदा क्या होता : जयपुर-सवाई माधोपुर रेलवे लाइन पर महात्मा गांधी अस्पताल के पास बनने वाला था। बन जाए तो टोंक रोड के समानांतर बनाए गए महल रोड पर ट्रैफिक कन्वर्ट होगा।

3) बस्सी रेलवेओवरब्रिज

लागत : 57 करोड़ रु. से ज्यादा

शुरुआत : 21 जनवरी, 2017 को शिलान्यास

मौके पर स्थिति : काम आगे नहीं बढ़ पाया है। संबंधित उपायुक्त अभी तक जमीन से जुड़े विवाद ही नहीं निपटा पाए हैं।

क्या होता फायदा : जयपुर-दिल्ली रेलमार्ग पर बस्सी-तूंगा को जोड़ने वाली सड़क पर बनना है। फिलहाल हर दिन करीब 8-10 बार ट्रेनों की आवाजाही के साथ बड़ा जाम लगता है। ओवरब्रिज से ये जाम खत्म होता।

फायदा यह होता : यह जयपुर को दुनिया के बड़े शहरों के समकक्ष खड़ा करने का प्रोजेक्ट है। ये पूरा होता है तो शहर की सूरत ही बदल जाएगी।