• Home
  • Rajasthan News
  • Jaipur News
  • News
  • लोकतंत्र है, बहुमत से सरकारें बदल सकती हैं तो बिल क्यों वापस लिया नहीं जा सकता?
--Advertisement--

लोकतंत्र है, बहुमत से सरकारें बदल सकती हैं तो बिल क्यों वापस लिया नहीं जा सकता?

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद लोकतंत्र में पारित और राज्यसभा में अटके तलाक बिल के खिलाफ बुधवार को जयपुर...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:35 AM IST
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद लोकतंत्र में पारित और राज्यसभा में अटके तलाक बिल के खिलाफ बुधवार को जयपुर शहर की मुस्लिम महिलाओं ने मोर्चा खोला। उन्होंने खामोश जुलूस निकाला, हाथों मेंं तख्तियां लेकर विरोध जताया और एमडी रोड पर सभा कर एकमत से प्रस्ताव पारित किया कि जब लोकतंत्र में बहुमत से सरकारें बदल जाती हैं तो तीन तलाक के विरोध में ढाई करोड़ से ज्यादा दस्तखत क्यों नजरअंदाज किए गए। सभा में बिल की खामियां गिनाई गईं, परिवार पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव पर बयान किया गया और 11 महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन जाकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर बिल वापस लेने की मांग की। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सहित अन्य संस्थाओं के आह्वान पर जुलूस सुबह 10 बजे चार दरवाजा से शुरू हुआ। महिलाओं का यहां पहुंचना जारी रहा और जुलूस में महिलाओं की कतारें एमडी रोड तक जा पहुंचीं। यह पहला मौका है, जब करीब एक लाख से ज्यादा मुस्लिम बुर्कानशीं महिलाएं किसी मुहिम के तहत सड़कों पर उतरी हों।

खामोश, लेकिन तख्तियों से दिया संदेश : जुलूस में न कोई नारा लगाया गया, न कोई हुड़दंग, लेकिन काले बुर्के और हाथों में सफेद तख्तियां पूरी बात कह गईं। तख्तियों पर “तीन तलाक बिल मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल है’, “हम तलाक बिल की वापसी की मुतालबा करते हैं’ जैसे नारों ने महिलाओं की भावना उजागर की।





ये दीं बिल के विरोध में दलीलें

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वीमेन विंग की नेशनल चीफ डॉ. असमा जोहरा, चेन्नई से बोर्ड की सदस्य फातिमा मुजफ्फर, जयपुर से बोर्ड की सदस्य यास्मीन फारूकी सहित अन्य वक्ताओं ने तलाक बिल के विरोध की ये दलीलें दीं।

- बिल की धारा 2 के अनुसार एक साथ तीन तलाक नहीं होगी जबकि धारा 3 में तीन तलाक पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। दलील यह है कि जब तलाक ही नहीं होगी तो उसकी सजा क्यों?

- उन्होंने कहा कि तलाक नहीं होगी और शोहर जेल में रहेगा, तो बीवी व बच्चों का तीन साल खर्च कौन चलाएगा?

- पूरी दुनिया में किसी भी समुदाय के कानूनों में बदलाव के लिए उससे जुड़े लोगों से राय ली जाती है, जबकि यहां विरोध में 2.80 करोड़ दस्तखत नजर अंदाज किए गए और समुदाय से बात नहीं की गई।

- मुस्लिम महिलाएं इस्लामी शरीयत को अपनाना चाहती हैं, हर किसी को अपना धर्म अपनाने का संवैधानिक अधिकार है, ऐसे में तीन तलाक पर रोक बिल संविधान की भावना का उल्लंघन है।