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खुद खर्च उठाने को तैयार, फिर भी सरकारी मंजूरी की आड़ में अटका रखे हैं 200 शिक्षकों के प्रमोशन

विश्वविद्यालय में पदोन्नतियों का मामला 5 साल से अटका हुआ है। अगर पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हो तो करीब 250 असोसिएट...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:35 AM IST
विश्वविद्यालय में पदोन्नतियों का मामला 5 साल से अटका हुआ है। अगर पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू हो तो करीब 250 असोसिएट प्रोफेसरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नति मिलेगी। मजेदार बात यह है कि इस सूची में आने वाले 50 से 60 असोसिएट प्रोफेसर तो ऐसे हैं जो पदोन्नति की आस लिए ही रिटायर हो चुके हैं।

पदोन्नति नहीं होने से विश्वविद्यालय पर यह पड़ रहा है असर







रिसर्च के लिए आने वाले ‌‌ Rs.65 करोड़ सालाना नुकसान

विश्वविद्यालय में पर्याप्त संख्या में प्रोफेसर होंगे तो वे रिसर्च के लिए मिलने वाले बजट को यहां ला सकेंगे। विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि विज्ञान वर्ग में एक प्रोफेसर करीब 50 लाख, कला और वाणिज्य वर्ग में एक प्रोफेसर करीब 10 लाख का रिसर्च बजट ला सकता है। पदोन्नत होने वालों में करीब 100 विज्ञान वर्ग के और 150 कला व वाणिज्य वर्ग के हैं। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय को रिसर्च के लिए सालाना 65 करोड़ रुपए मिल सकते हैं। लेकिन पदोन्नति अटकने के कारण इस बजट का नुकसान हो रहा है।

400 शोधार्थियों को मिल सकते हैं गाइड

शिक्षकों के अनुसार असोसिएट प्रोफेसर 6 विद्यार्थियों को पीएचडी करा सकता है। अगर यही शिक्षक पदोन्नत होकर प्रोफेसर बन जाए तो 8 विद्यार्थियों को पीएचडी करा सकते हैं। पदोन्नति करीब 200 की होनी है। इसके हिसाब से देखे तो 400 अतिरिक्त विद्यार्थियों को गाइड मिल सकते हैं।

सरकार की अनुमति मिलते ही कर देंगे प्रमोशन