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2 साल पहले एसएमएस से सम्बद्ध किए तीन अस्पताल, अब एक ने लिखा फैसला वापस लो

एसएमएस अस्पताल जैसी इलाज की सुविधा देने के लिए करीब सम्बद्ध किए गए तीनों अस्पतालों को लगभग दो साल बाद भी “इलाज” की...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:55 AM IST
एसएमएस अस्पताल जैसी इलाज की सुविधा देने के लिए करीब सम्बद्ध किए गए तीनों अस्पतालों को लगभग दो साल बाद भी “इलाज” की जरूरत है। कहीं जगह की कमी, कहीं बजट की दिक्कत तो कहीं निर्माण कार्य की देरी की वजह से शहरवासियों को इलाज के लिए अन्तत: एसएमएस अस्पताल ही आना पड़ रहा है। यहां तक कि बनीपार्क स्थित सेटेलाइट अस्पताल में तो जगह की इतनी कमी है कि वे यहां किसी भी स्तर पर मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध नहीं हो सकते। ऐसे में यहां के अस्पताल प्रशाासन ने वापस से चिकित्सा विभाग के अधीन जाने का निवेदन किया है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन अस्पतालाें को मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध करने का मरीजों को कितना फायदा हुआ होगा। अस्पतालों की दो साल पहले और आज की स्थिति पर विशेष रिपोर्ट।

एसएमएस मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध अस्पतालों में सुविधाओं का रियलिटी चैक

बनीपार्क सेटेलाइट हॉस्पिटल : जगह की कमी, अभी तक ट्रस्ट की जमीन पर

इस हॉस्पिटल के पास खुद की जमीन ही नहीं है। करीब 400 वर्गगज में ट्रस्ट की जमीन पर यह बना हुआ है। ऐसे में यहां चिकित्सा विभाग कोई निर्माण कार्य नहीं करा सकता। 60 साल से अधिक समय पहले बनाए गए ढांचे में समय-समय पर ट्रस्ट की तरफ से काम कराया जाता रहा। हालात ऐसे हैं कि न तो मरीजों के बैठने की जगह है और ना ही स्टाफ को। ओपीडी में पर्ची कटाने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है। स्टाफ ने बताया कि सोनोग्राफी रूम में सीलन कभी खत्म ही नहीं होती और अन्य जांचों के लिए भी एक छोटा सा कमरा है जिसमें स्टाफ के तीन जने भी नहीं आ पाते। अधिकांश इमरजेंसी केस रैफर ही किए जाते हैं। ऐसे में अब परेशान अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल और चिकित्सा विभाग को वापस चिकित्सा विभाग के अधीन जाने का निवेदन किया है।

दो साल पहले भी आईपीडी करीब 15 मरीजों की थी और आज भी लगभग वही स्थिति है। आईसीयू नहीं है। इमरजेंसी मरीजों के लिए केवल फिजीशियन हैं। आर्थो फिजीशियन जरूर ऑन कॉल रहते हैं। अन्य कोई स्पेशलिस्ट को अस्पताल में नहीं लगाया गया है। ना ही मेडिकल स्टूडेंट यहां आते हैं क्योंकि सीखने के लिए कुछ भी संभव नही।

सेठी कॉलोनी सेटेलाइट अस्पताल इमरजेंसी की ही स्थिति खराब

मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध होने के दौरान अस्पताल के पास जगह की काफी कमी थी। निर्माण कार्य अगले एक महीने में पूरा होगा तब यहां मरीजों को एसएमएस के स्तर की सुविधाएं मिल सकेंगी। अभी 90% इमरजेंसी केस रैफर किए जाते हैं। न आईसीयू है और ना ही वेंटीलेटर। ओपीडी जरूर बढ़ी है। पहले जहां रोजाना करीब 600 मरीज आ जाते थे, अब वह संख्या बढ़कर 800 तक पहुंच गई है। लेकिन मेडिकल स्टूडेंट को सीखने की बेहतर व्यवस्था नहीं है।

कांवटिया अस्पताल ट्रोमा सेंटर की सबसे बड़ी जरूरत

यहां बेहतर व्यवस्थाएं हुई हैं। सीटी स्केन, एमआरआई सहित अन्य जांच शुरू हो चुकी हैं, लेकिन ट्रोमा केस को यहां परेशानी का सामना करना पड़ता है। एसएमएस अस्पताल के समकक्ष ट्रोमा सेंटर बनाए जाने को लेकर कई बार बैठक भी हुई है, लेकिन अभी काम नहीं हो सका है। अभी ब्लड कल्चर जांच नहीं हो रही हैं, इसलिए मरीजों को एमएमएस अस्पताल ही भेजा जाता है। ओपीडी लगभग दोगुनी हो गई है। पहले करीब 1100 तक की ओपीडी थी जो कि अब बढ़कर 2000 से अधिक हो गई है।

इनका कहना है

बनीपार्क में जगह ही नहीं है। स्टूडेंट को किसी तरह का फायदा नहीं है। इसलिए उन्होंने पत्र लिखा है। हमनें भी सरकार को इस बारे में कहा है। हम उसे नहीं रख सकते। कांवटिया अस्पताल में काफी सुविधाएं बढ़ी हैं और जल्दी ही वहां डायलिसिस और मरीजों के लिए अन्य सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। सेठी कॉलेानी वाले अस्पताल में भी अगले एक-दो महीनों में मरीजों को काफी सुविधाएं मिलना शुरू हो जाएंगी।

-डॉ. यूएस अग्रवाल,

प्रिंसिपल, एसएमएस मेडिकल कॉलेज।

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