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उपचुनाव हारी तो संसद से पहली बार प्रदेश कांग्रेस हो जाएगी साफ

4 वर्ष पहले
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राज्यसभा सांसदों का 3 अप्रैल तक कार्यकाल

पॉलिटिकल रिपोर्टर.जयपुर| वजहकोई भी रही हो, लेकिन अजमेर या अलवर संसदीय सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा ही नहीं बल्कि, संसद में अपना प्रतिनिधित्व बचाए रखने का कांग्रेस के पास एक सुनहरा अवसर मिला है। क्योंकि, ऐसा नहीं होता है तो आगामी चार अप्रेल यानी ठीक छह महीने बाद संसद के दोनों सदनों में प्रदेश कांग्रेस का कोई नुमाइंदा नहीं रह जाएगा। इसलिए, राजनीतिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए और कार्यकर्ताओं में ठंडे जोश में उबाल लाने के लिए जीत की जरूरत भाजपा से ज्यादा कांग्रेस को रहेगी। प्रदेश से लोकसभा में कांग्रेस का एक भी प्रतिनिधि नहीं है। राज्य सभा में भी संख्या धीरे-धीरे घटकर दो पर गई है। इनमें दोनों कांग्रेसी सांसदों का कार्यकाल आगामी तीन अप्रेल को पूरा हो रहा है और संभावना है कि राज्यसभा की इन खाली सीटों पर चुनाव होंगे। जिन पर कांग्रेस का जीतना नामुमकिन है। इसलिए, कांग्रेस किसी भी हालत में अलवर और अजमेर संसदीय सीट पर उपचुनाव जीतने के लिए दम लगाने की तैयारी में है। धौलपुर विधानसभा उपचुनाव की तर्ज पर भाजपा ने भी पूरी कमर कस ली है।

1 सीट रिक्त, 7 पर भाजपा

प्रदेशमें राज्य सभा की 10 सीटें हैं। इनमें सात सीट पर भाजपा और दो पर कांग्रेस के सदस्य काबिज है। केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू के उपराष्ट्रपति चुने जाने से राज्य सभा की एक सीट रिक्त हो गई है।

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी एवं नरेंद्र बुढानिया और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव 4 अप्रैल, 2012 को राज्य सभा सांसद चुने गए थे। इनका कार्यकाल तीन अप्रेल को पूरा होगा। विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस को कोई सीट हासिल होगी, इसकी संभावना नहीं है। ऐसा होते ही राज्यसभा में प्रदेश से कोई भी सांसद नहीं रह जाएगा।

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