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अगले आठ माह बाद जयपुर सहित जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर में चार ड्रग टेस्टिंग लैब

नकली दवाओं की जांच करने के लिए जयपुर समेत जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर की सरकारी ड्रग टेस्टिंग लैब में मेनपावर , उपकरण व...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 11, 2018, 04:50 AM IST

नकली दवाओं की जांच करने के लिए जयपुर समेत जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर की सरकारी ड्रग टेस्टिंग लैब में मेनपावर , उपकरण व जांंच किट के लिए करीबन 20 करोड़ रुपए की राशि बजट फाइनेन्सियल कमेटी (बीएफसी) में स्वीकृत की जा चुकी है। जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर लैब का भवन तो पहले से बनकर तैयार है, लेकिन मेनपावर व उपकरणों की कमी से जांच नहीं कर सकते थे। बजट मिलने से अगले आठ माह में न केवल असिस्टेंट ड्रग एनालिस्ट, जूनियर साइंटीफिक असिस्टेंट, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन के पदों पर भर्ती बल्कि उपकरणों की खरीद कर समय पर जांच रिपोर्ट मिल सकेगी। इसमें जयपुर की सेठी कॉलोनी स्थित लैब को अपग्रेड करना भी शामिल है। चार सरकारी ड्रग टेस्टिंग लैब वाला राजस्थान देश का पहला राज्य होगा। उल्लेखनीय है कि जयपुर की सेठी कॉलोनी में एकमात्र सरकारी ड्रग टेस्टिंग लैब होने के कारण करीबन 6 हजार दवाओं की जांच पेडिंंग चल रही है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) वीनू गुप्ता का कहना है कि तीन और लैब शुरू होने पर नकली दवाओं पर नियंत्रण करना आसान होगा। देश के किसी भी राज्य में इतनी सरकारी लैब नहीं है।

ये है मेडिकल डिवाइस

इंट्रा यूटेराइन डिवाइस, डिस्पोजेबल हाइपोडर्मिक सिरिंज व नीडिल, डिस्पोजेबल परफ्यूजन सेट, इन विट्रो डायग्नोस्टिक किट फॉर एचआईवी तथा एचसीवी, कार्डियक स्टेंट, ड्रग इल्यूटिंग स्टंट, कैथेटर्स, इंट्रा ऑक्यूलर लैन्सेज, आईवी कैन्यूला, बोन सीमेन्ट, हार्ट वाल्व, इंटरनल प्रोस्थेटिक रिप्लेसमेंट, स्केल्प वेन सेट, आर्थोपेडिक इंप्लांट तथा एब्लेशन डिवाइस है। नए कानून के तहत इन्हें अलग-अलग चार कैटेगरी ए, बी, सी व डी में बांटा गया है।

चार और दवाओं पर रोक लगी : औषधि नियंत्रण संगठन ने अमानक पाए जाने पर चार दवाओं के निर्माण पर रोक लगाई है।

एंटीबायोटिक भी नकली : ड्रग टेस्टिंग लैब जयपुर की जांच में भगवानपुर की निर्माता कंपनी सेनाइवा फार्मूलेशन की एमॉक्सीलिन ट्राइहाइड्रेट एंड पोटेशियम क्लेवेनेट टेबलेट (बैच नंबर टी-16052) में शून्य घटक पाया गया है। हिमाचल प्रदेश की एथेन्स लैब के एमॉक्सीलिन ट्राइहाइड्रेट एंड पोटेशियम क्लेवेनेट टेबलेट ( बैच नंबर बीटी-16-692) भी जांच में नकली मिला है। औषधि नियंत्रण संगठन ने दोनो के लिए राज्य के ड्रग कंट्रोलर को कार्यवाही के निर्देश दिए है।

इधर, दो माह बाद भी मेडिकल डिवाइस ऑफिसर नोटिफाइड नहीं : केन्द्र सरकार की ओर से ‘मेडिकल डिवाइस रुल्स-2017’ बनने के दो माह बीत जाने के बाद भी लापरवाही के चलते मेडिकल डिवाइस ऑफिसर नोटिफाइड नहीं किया है। जिसके कारण न तो निरीक्षण न ही मरीजों से मेडिकल डिवाइस के ज्यादा कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कार्यवाही कर सकते। जबकि मेडिकल डिवाइस रुल्स एक जनवरी -2018 से प्रभावी हो गए है। नियमानुसार पहले से कार्यरत ड्रग कंट्रोल ऑफिसरों व सहायक औषधि नियंत्रक को मेडिकल डिवाइस ऑफिसर के लिए नोटिफाइड करना था। हालांकि विभाग की ओर से अधिकारियों को नोटिफाइड करने के लिए लिखा जा चुका है।

तीन और लैब के मेनपावर व उपकरणों के लिए बजट स्वीकृत होने से जल्द दवाओं की जांच होने से पेन्डेसी नहीं रहेगी। और प्रदेश भर में अधिक नूमने की जांच की जा सकेगी। वर्तमान में एक ही लैब पर दवाओं के नमूनों की दवाब है। डीसीओ के 50 पदों पर भर्ती का प्रोसेस शुरू हो चुका है। कालीचरण सराफ, चिकित्सा मंत्री

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Web Title: अगले आठ माह बाद जयपुर सहित जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर में चार ड्रग टेस्टिंग लैब
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