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रजिस्ट्रार : अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के िलए राजकोष खर्च करना चाहते हैं परीक्षा नियंत्रक

राजस्थान विश्वविद्यालय के सत्र 207-18 की मुख्य परीक्षाओं में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के मामले में परीक्षा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:50 AM IST

रजिस्ट्रार : अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के िलए राजकोष खर्च करना चाहते हैं परीक्षा नियंत्रक
राजस्थान विश्वविद्यालय के सत्र 207-18 की मुख्य परीक्षाओं में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के मामले में परीक्षा नियंत्रक और कुलसचिव (रजिस्ट्रार) में ठन गई है। परीक्षा नियंत्रक ने परीक्षा कार्य ड्यूटी में कर्मचारियों की लिस्ट अप्रूवल के लिए रजिस्ट्रार को भेजी थी। इस लिस्ट पर रजिस्ट्रार-परीक्षा नियंत्रक ने व्यक्तिगत नोट लिखकर अपने बीच का विवाद सार्वजनिक किया है।

रजिस्ट्रार ने नोटशीट पर लिखा है- परीक्षा नियंत्रक विवि कोष में नुकसान पहुंचा कर कुछ विशेष लोगों को ऑब्लाइज कर करे हैं। जवाब में परीक्षा नियंत्रक ने नोटशीट पर लिखा है- रजिस्ट्रार स्वयं रिसिप्ट और डिस्पैच की टीम गठित कर परीक्षा कार्य संपूर्ण कराना चाहें तो करा सकते हैं।

विवि के सूत्रों के अनुसार परीक्षा कार्यों में कुलपति व कुलसचिव कार्यालय से 3-3 कर्मचारी परीक्षा कार्यों में लगाए हैं। कुलसचिव ने नोटशीट पर चुनिंदा 13 लोगों के नाम काट दिए। नोटशीट पर दोनों के आमने-सामने आने से परीक्षा काम पर असर पड़ने की आशंका है। इससे वर्तमान सत्र में परीक्षा दे रहे 5 लाख 51 हजार विद्यार्थियों की 45 लाख कॉपियां परीक्षा केंद्र पहुंचाने से लेकर परिणाम जारी करने तक के कार्य निश्चित रूप से पूरी तरह प्रभावित हो जाएंगे।

परीक्षा िनयंत्रक की िलस्ट से रजिस्ट्रार ने काटे 13 नाम

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यूनिवर्सिटी की परीक्षा : 5.51 लाख िवद्यार्थियों की परीक्षा लेकर 45 लाख कॉपियां भी इसी टीम को जांचनी हैं

सत्र 2016-18 की परीक्षा

विवि की सत्र 2016-17 की मुख्य परीक्षाओं में 6 लाख 55 हजार परीक्षार्थी थे, जिनकी 55 लाख कॉपियां चैक की गई थी। परीक्षाएं आयोजित कराने से परिणाम जारी करने तक के परीक्षा कार्यों के लिए 61 अशैक्षणिक कर्मचारी और 39 सहायक कर्मचारी सहित 100 लोगों की ड्यूटी लगाई गई थी।

सत्र 2017-18 की परीक्षाएं जारी हैं। इनमें 5. 51 लाख विद्यार्थी भाग ले रहे हैं। 45 लाख कॉपियां चैक होनी हैं। परीक्षा कराने के लिए इस बार 36 अशैक्षणिक कर्मचारी और 26 पियोन यानि 62 कर्मचारी लगाए गए हैं। परीक्षा नियंत्रक की ओर से भेजी गई नोटशीट में से 13 लोगों का नाम कुलसचिव ने काट दिया।

‘उनका जवाब धमकाने जैसा था’

 परीक्षा में लगाए कार्मिको की नोटशीट पर क्या आपत्ति थी?

 उसमें से स्टाफ कम कर दिया है, जितनी आवश्यकता थी उतने ही लगाए हैं। विवि कोष का पैसा इस तरह अधिक कर्मचारियों को लगा कर खर्च करना सही नहीं है।

 क्या इससे परिणाम प्रभावित नहीं होगा?

 नहीं होगा। सब काम समय पर होगा।

 परीक्षा नियंत्रक ने कहा है- चाहें तो अपने स्तर पर रिसिप्ट और डिस्पैच टीम बनाकर परीक्षा कार्य पूरा कर सकते हैं?

 मैंने उन्हें कर्मचारियों की लिस्ट पर असेसमेंट कर ड्यूटी लगाने का नोट लिखा था। उनका जवाब धमकाने जैसा है।

 आपने परीक्षा नियंत्रक को विवि कोष का व्यय कर ऑब्लाइज करने का नोट लिखा था?

 जरूरत से ज्यादा की ड्यूटी कोष का पैसा बहाने जैसा है। जितने कर्मचारियों की जरूरत है उससे अधिक लगाए थे।

राजस्थान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार पुरुषोत्तम धानका

परीक्षा नियंत्रक : अपनी रिसिप्ट तथा डिस्पैच टीम बनाकर खुद रजिस्ट्रार करवा लें परीक्षा

सत्र 2017-18 की तैयारी

‘धमकाया नहीं, मैंने िलखा है’

 कुलसचिव का आरोप है कि आपने ऑब्लाइज करने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई हैं?

 मैं किसे ऑब्लाइज करूंगा, जो लगते रहे उन्हीं को लगाया।

 कुलपति-कुलसचिव के कर्मचारी भी ड्यूटी में लगाए हैं?

 एक-एक या दो-दो ही तो लगाए हैं।

 कुलसचिव ने आपके लिस्ट में से कुछ कर्मचारियों के नाम हटा दिए हैं?

 इस बार पहले से कम कर्मचारी लगाए थे। नाम काटना कुलसचिव का अधिकार है। अब उन्हीं से काम कराएंगे। यदि समय पर परिणाम नहीं आए तो परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी कम होगी।

 आपने लिखा है कि वह चाहें तो अपने स्तर पर रिसिप्ट और डिस्पैच कमेटी गठित कर परीक्षा कार्य पूरा करा सकते हैं?

 हां, मैने ही लिखा है।

राजस्थान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक वीके गुप्ता

इस पूरे मामले का यह रहेगा इम्पैक्ट

1) 5 लाख 51 हजार से अधिक परीक्षार्थियों के परिणाम समय पर जारी नहीं हो पाएंगे।

2) परीक्षा कार्यों के दौरान रिसिप्ट और डिस्पैच कार्य धीमी गति से होंगे जिसका सीधा असर परीक्षाओं केंद्रों पर सामग्री पहुंचाने व लाने से लेकर अंतिम परिणाम तक पड़ेगा।

3) परीक्षा परिणाम समय पर जारी नहीं होने से विद्यार्थियों को आगामी अन्य जगह दाखिला लेने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

14 मार्च को चली लिस्ट, रजिस्ट्रार की आपत्ति पर परीक्षा नियंत्रक के जवाब के बाद 16 मार्च को 13 नाम काटे

14 मार्च को परीक्षा नियंत्रक ने नोटशीट चलाई, इस पर 14 मार्च को ही कुलसचिव ने लिखा-

सीई एक्चुअल असेसमेंट करके स्टाफ प्रस्ताावित करें। क्या पूरी यूनिवर्सिटी का स्टाफ ही इस सेल में लग जाएगा। आपके प्रस्ताव से ऐसा प्रतीत होता है कि आप विश्वविद्यालय के राजकोष को इन लोगों को ऑब्लाइज करने में व्यय करना चाहते हो। कृपया एक्चुअल असेसमेंट कर स्टाफ प्रस्तावित करें ताकि राजकोष पर अनावश्यक भर न बढ़े।

14 मार्च के नोटशीट पर कुलसचिव के जवाब में 16 मार्च को परीक्षा नियंत्रक ने लिखा-

पैरा 93, में वर्णित व्यक्तिगत आक्षेप पर चाही गई जानकारी पैरा 97 से 101 पर उपलब्ध करा दी गई है। इसके पश्चात भी यदि कुलसचिव चाहें तो अपने स्तर पर रिसिप्ट तथा डिस्पैच टीम बनाकर परीक्षा कार्यों को समय पर पूर्ण करा सकते हैं।

16 मार्च को ही परीक्षा नियंत्रक के रिप्लाई का जवाब कुलसचिव ने नोटशीट पर कुछ इस तरह लिखा-

नियमानुसार स्टाफ परीक्षा कार्यक्रम का अनुमोदन किए जाने हेतु प्रस्तावित है।

(नोटशीट में मेंशन कर सेलर 1 और 2 से, कंट्रोल रूम सीई ऑफिस और रिसिप्ट एंड डिस्ट्रीब्यूशन टीम सहित 13 कर्मचारियों को हटा दिया गया)

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