Hindi News »Rajasthan »Jaipur »News» आरसीए सचिव ने अखबार में दिया नोटिस चुनाव अवैध, उपाध्यक्ष पहुंच गए पर्यवेक्षक के रूप में

आरसीए सचिव ने अखबार में दिया नोटिस चुनाव अवैध, उपाध्यक्ष पहुंच गए पर्यवेक्षक के रूप में

राजस्थान क्रिकेट में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। आईपीएल मैच कराने को लेकर जरूर ऊपर-ऊपर से सभी यह दिखा रहे हैं हम साथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 04:50 AM IST

आरसीए सचिव ने अखबार में दिया नोटिस चुनाव अवैध, उपाध्यक्ष पहुंच गए पर्यवेक्षक के रूप में
राजस्थान क्रिकेट में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। आईपीएल मैच कराने को लेकर जरूर ऊपर-ऊपर से सभी यह दिखा रहे हैं हम साथ हैं लेकिन असली पिक्चर कुछ और ही है। 29 मार्च को राजस्थान क्रिकेट संघ के सचिव आर.एस. नांदू के नाम से अखबार में एक विज्ञापन छपता है। इस विज्ञापन में आरसीए की ओर से साफ-साफ लिखा गया है कि सवाईमाधोपुर जिला क्रिकेट संघ के तथाकथित सचिव बालकिशन उपाध्याय जो चुनाव करा रहे हैं वे पूरी तरह से अवैध हैं। इन चुनावों को राजस्थान क्रिकेट संघ किसी भी तरह से मान्यता नहीं देता है। इसमें यह भी लिखा है कि जिला क्रिकेट संघ के चुनाव 2016 में हुए थे इसलिए अब ये 2020 में ही ड्यू हैं।

खास बात तो यह है कि सचिव के अखबार में नोटिस निकलने के बाद भी 31 मार्च को हुए चुनाव में आरसीए का पर्यवेक्षक वहां पहुंच गया। उपाध्यक्ष मोहम्मद इकबाल आरसीए की ओर से पर्यवेक्षक थे। वैसे आरसीए के संविधान के अनुसार, किसी भी जिले में पर्यवेक्षक भेजने की जिम्मेदारी सचिव की ही होती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इकबाल किसके कहने पर पर्यवेक्षक बन कर गए। इससे यह बात तो साफ हो गई है कि आरसीए में मतभेद और मनभेद अभी भी जारी हैं।

सवाईमाधोपुर जिला क्रिकेट संघ में शनिवार को हुए चुनाव, स्पोर्ट्स काउंसिल का ऑब्जर्वर भी नहीं पहुंचा

शुरू हो गया है नंबरों का खेल

सीपी जोशी गुट और ललित मोदी गुट में नंबरों का खेल चल रहा है। भवानी समोता को बीसीसीआई और रॉयल्स से कोऑर्डिनेशन का जिम्मा सौंपे जाने को लेकर दोनों गुटों में खींचतान सामने आई थी। इस बारे में सचिव नांदू ने मीडिया में मेल लीक कर दिए थे। सुनने में यह भी आया था कि उस समय ललित मोदी गुट या यों कहें कि नांदू को 17 जिला संघों का समर्थन प्राप्त था। अब सीपी जोशी गुट भी अपने नंबर बढ़ाने की कोशिश में लग गया है। जो भी सत्ता में होता है, ऐसे हथकंडे अपनाता ही है।

बालकिशन सवाईमाधोपुर के मेंबर भी नहीं हैं। इस प्रकार के अवैध चुनाव करवाना माननीय सिविल कोर्ट के आदेश की अवहेलना है। उन पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। -जे.एस. गिल

विवाद होने की स्थिति में आमतौर पर स्पोर्ट्स काउंसिल का पर्यवेक्षक चुनाव नतीजों की कॉपी पर साइन नहीं करता है। चुनाव की खबरें अखबारों की सुर्खियां बन रही थीं तो काउंसिल का पर्यवेक्षक नहीं पहुंचा।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पर्यवेक्षक के आदेश की अनदेखी

आरसीए चुनाव के दौरान वोटिंग का अधिकार सुप्रीम कोर्ट पर्यवेक्षक ज्ञानसुधा मिश्रा ने मौजूदा सचिव दीपक राज को दिया था। उस समय बालकिशन कोर्ट गए थे लेकिन उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट जज मनीष भंडारी ने भी जब गुप्त मतदान के आदेश दिए थे उस समय भी साफ-साफ कहा था कि जिन्होंने आरसीए चुनाव में हिस्सा लिया था वे ही वोट डाल सकते हैं। ऐसे में अचानक बालकिशन कैसे पिक्चर में आ गए। उन्होंने कैसे चुनाव का नोटिस निकाल दिया।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×