• Hindi News
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • News
  • भिंडी की अगेती बोआई कर किया जा सकता है अधिक उत्पादन
--Advertisement--

भिंडी की अगेती बोआई कर किया जा सकता है अधिक उत्पादन

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा भिंडी की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए संकर भिंडी की किस्मों का विकास किया गया हैं। ये...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:00 AM IST
भिंडी की अगेती बोआई कर किया जा सकता है अधिक उत्पादन
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा भिंडी की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए संकर भिंडी की किस्मों का विकास किया गया हैं। ये किस्में यलो वेन मोजेक वायरस रोग को सहन करने की अधिक क्षमता रखती है। इसलिए वैज्ञानिक विधि से खेती करने पर उच्च गुणवत्ता का उत्पादन कर सकते हैं।

कृषि पर्यवेक्षक विजय जैन ने किसानों को बताया कि बीज उगने के लिए 27-30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान उपयुक्त होता है तथा 17 डिग्री सें.ग्रे. से कम पर बीज अंकुरित नहीं होता। यह फसल ग्रीष्म तथा खरीफ दोनों ही ऋतुओं में उगाई जाती है। भिंडी को उत्तम जल निकास वाली सभी तरह की भूमियों में उगाया जा सकता है। भूमि का पीएच मान 7.0 से 7.8 होना उपयुक्त रहता है। भूमि की दो-तीन बार जुताई कर भुरभुरी कर तथा पाटा चलाकर समतल कर लेना चाहिए।

कृषि अधिकारियों ने बताया कि भिंडी की बोआई में सिंचित अवस्था में 2.5 से 3 किग्रा प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है। संकर किस्मों के लिए 5 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर की बीजदर पर्याप्त होती है। भिंडी के बीज सीधे खेत में ही बोये जाते हैं। बीज बोने से पहले खेत को तैयार किया जाता है। भिंडी की बोआई कतारों में करनी चाहिए। कतार से कतार की दूरी 25-30 सें.मी. एवं कतार में पौधे से पौधे के मध्य दूरी 15-20 से.मी. रखनी चाहिए। बीज की 2 से 3 से.मी. गहरी बोआई करनी चाहिए। बोआई के पूर्व भिंडी के बीजों को 3 ग्राम मेन्कोजेब या कार्बेंडाजिम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करना चाहिए। भिंडी की बोआई फरवरी-मार्च में की जाती है। कृषि अधिकारियों के अनुसार अभी भिंडी की बोआई का उपयुक्त समय है।

सूरवाल. क्षेत्र के एक खेत में उगी भिंडी की फसल।

X
भिंडी की अगेती बोआई कर किया जा सकता है अधिक उत्पादन
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..