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मेडिकल फीस 10 गुना बढ़ेगी, मंत्री को पता ही नहीं, बोले-ऐसा हो तो नहीं सकता

मेडिकल की पढ़ाई के लिए अब तक सबसे सस्ता माने जाने वाला राजस्थान अब बाकी राज्यों की तरह फीस बढ़ाने जा रहा है।

माधव शर्मा | Last Modified - Nov 05, 2017, 08:10 AM IST

मेडिकल फीस 10 गुना बढ़ेगी, मंत्री को पता ही नहीं, बोले-ऐसा हो तो नहीं सकता
जयपुर.मेडिकल की पढ़ाई के लिए अब तक सबसे सस्ता माने जाने वाला राजस्थान अब बाकी राज्यों की तरह फीस बढ़ाने जा रहा है। अगले सत्र से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल की पढ़ाई 10 गुना तक महंगी हो जाएगी। बहरहाल, फीस का अचानक इतना बढ़ाना तो चौंकाता ही है, इससे भी ज्यादा चिकित्सा मंत्री का जवाब चौंकाता है। मंत्री कालीचरण सराफ से जब भास्कर ने अचानक इतनी फीस बढ़ाने की वजह पूछी तो चौंकते हुए बोले, 'नहीं-नहीं, इतनी फीस कैसे बढ़ सकती है। आप सचिव से बात करिए, उन्हें पूरी जानकारी है।" इसी सवाल के जवाब में सचिव आनंद कुमार बोले, "फीस बढ़ाने का प्रस्ताव अचानक नहीं है। यह प्रक्रिया सालभर से चल रही थी। इसी साल जुलाई में फाइनेंस विभाग से फीस बढ़ाने की फाइल मिली है। 2 नवंबर को अगले सत्र से फीस बढ़ाने का आॅर्डर जारी भी हो चुका है।"
गौरतलब है कि अभी प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 1450 स्टूडेंट हैं। इनमें से 150 झालावाड़ और 100 स्टूडेंट आरयूएचएस में हैं। हैरानी यह भी है कि राज्य में अगले साल से मेडिकल की पढ़ाई पड़ोसी राज्यों से भी महंगी हो जाएगी। यहां तक कि मेडिकल की पढ़ाई के लिए सर्वोच्च माने जाने वाले एम्स से भी ज्यादा राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की फीस होगी। बढ़ी हुई फीस को लेकर विरोध शुरू हो गया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट-
मंत्री बोले-
ऐसा हो ही नहीं सकता। लगता है आपने सर्कुलर गलत पढ़ लिया है। इतनी फीस बढ़ ही नहीं सकती, मुझे आंकड़े पूरी तरह याद नहीं हैं। आप सचिव से बात कीजिए उन्हें पूरी जानकारी है।
-कालीचरण सराफ, चिकित्सा मंत्री
सचिव का जवाब
सरकार अभी 18-20 लाख रुपए एक मेडिकल स्टूडेंट पर खर्च कर रही है और फीस के नाम पर बहुत कम पैसा लिया जा रहा है। फीस का बड़ा हिस्सा सब्सिडाइज्ड है। पिछले 17 सालों से फीस नहीं बढ़ाई गई है। फीस बढ़ाने की प्रक्रिया बहुत पहले से चल रही थी। इसी साल जुलाई में फाइनेंस विभाग से फीस बढ़ाने की फाइल मिली है। अगले सत्र यानी 1 जुलाई 2018 से बढ़ी हुई फीस लागू होगी।
-आनंद कुमार, सचिव
दो नवंबर को जारी हो चुका आदेश, इसके बावजूद मंत्री को जानकारी नहीं
- वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में फीस 2000 से 2500 रुपए तक है, हॉस्टल फीस सिंगल सीट 3500 और डबल सीटेड 3000 रुपए है। यानी सालभर में 5500 से 6000 रुपए, लेकिन 1 जुलाई 2018 से शुरू हो रहे सत्र में यह बढ़कर 60,500 रुपए तक हो जाएगी।
- ट्यूशन फीस अभी सिर्फ 1000 रुपए है वह 12 गुना बढ़ाकर 12500 रुपए कर दी गई है। हॉस्टल मेंटिनेंस चार्ज 3000 (डबल सीटेड) से 10000 रुपए किया गया है। सिंगल सीट को 3500 से 15000। बुनियादी सुविधाओं की फीस हर साल 10% तक बढ़ेगी।
एम्स से भी महंगी पढ़ाई
एम्स को मेडिकल की पढ़ाई के लिए सर्वोच्च संस्थान माना जाता है। लेकिन वहां भी मेडिकल फीस पांच हजार रुपए ही है। इसी तरह बिहार में दस हजार, मध्यप्रदेश में 55 हजार से 60 हजार और गुजरात में 6000-8000 रुपए तक मेडिकल फीस है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि राजस्थान में अचानक इतनी महंगी फीस क्यों?
फीस तो बढ़ा दी लेकिन इन्टर्न्स का भत्ता न्यूनतम मजदूरी से कम
फीस में बढ़ोतरी सुविधाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के नाम पर की गई है लेकिन कोर्स पूरा करने पर इंटर्नशिप करने वाले स्टूडेंट्स को विभाग स्टाइपेंड के नाम पर सिर्फ 3500 रुपए देता है जोकि न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।
हॉस्टल में सुविधाएं बदतर, इसके बावजूद फीस कई गुना बढ़ाई
मेडिकल एजुकेशन निदेशालय से जारी किए ऑर्डर में हॉस्टल फीस को बढ़ाकर 15000 रुपए तक किया गया है लेकिन राजधानी के ही एसएमएस मेडिकल कॉलेज के हॉस्ट्ल्स की हालत बदतर है। हॉस्टल में हर जगह कचरा पड़ा रहता है।
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