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मेडिकल इमरजेंसी: राजस्थान में इलाज न मिलने से अब तक करीब 25 मौतें

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 04:46 AM IST

रेस्मा में अब तक 12 डॉक्टर हिरासत में, सेना के डॉक्टर बुलाए। रेजीडेंट्स भी हड़ताल पर उतर चुके हैं।
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    मंत्री ने खाेला डॉक्टरों का झूठ : इस्तीफे नहीं, खाली कागज से भरे लिफाफे भेजे थे।
    जयपुर. लगातार पांच दिनों से राज्यभर में नौ हजार से ज्यादा सेवारत डॉक्टर सामूहिक छुट्‌टी पर हैं। इलाज न मिलने से प्रदेशभर में मरीजों की मौतें हो रही हैं। हालात मेडिकल इमरजेंसी के हैं। अब तक करीब 25 मौतें हो चुकी हैं। रोज डेढ़ सौ से 200 ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। गंगानगर में सेना के डॉक्टरों को अस्पताल में लगाया गया है। सबसे बुरे हालात गांवों के हैं। हजारों मरीजों को शहर भागना पड़ रहा है।
    सरकार ने आंदोलन कर रहे डॉक्टरों की गिरफ्तारी के आदेश दे दिए हैं। रेस्मा के तहत डॉक्टरों की धरपकड़ की जा रही है। शुक्रवार रात तक 12 से ज्यादा डॉक्टरों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। अधिकतर डॉक्टर नेता भूमिगत हो चुके हैं। रेस्मा में पहली गिरफ्तारी जयपुर से डॉक्टर संघ की वार्ता के संयोजक डॉ. जगदीश मोदी की हुई। हालांकि,उन्हें शाम तक छोड़ दिया गया। वहीं, सरकार भी अब डॉक्टरों पर कार्रवाई के मूड में दिख रही है। इससे पूर्व, चिकित्सा मंत्री ने डॉक्टरों को काम पर लौट आने के लिए शुक्रवार शाम सात बजे तक का अल्टीमेटम दिया।
    मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा है कि सरकार दबाव में नहीं आएगी। जितने डॉक्टर चाहें, हड़ताल पर चले जाएं। सरकार अब वार्ता की पहल नहीं करेगी। डॉक्टर चाहें तो वार्ता के दरवाजे खुले हैं। मंत्री ने दावा किया-शुक्रवार को 60% डॉक्टर काम पर लौट आए। वहीं डॉक्टर संघ का कहना है कि 99% डॉक्टर छुट्टी पर है। सरकार ने रेजीडेंट्स और सेवारत चिकित्सकों को सार्वजनिक नोटिस के जरिए तुरंत काम पर लौटने को कहा है।
    हाईकोर्ट सख्त, कहा- डॉक्टरों को नोटिस थमाओ
    हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह डॉक्टरों को तुरंत काम पर लौटने के लिए व्यक्तिगत नोटिस जारी करे। कोर्ट ने सरकार से 15 नवंबर तक हड़ताली डॉक्टरों की सूची और उनके वेतन-भत्तोंं और सुविधाओं की जानकारी मांगी है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि उसने हड़ताली डॉक्टर्स के खिलाफ पूर्व में दिए गए आदेश के पालन में क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने यह अंतरिम निर्देश शुक्रवार को महेश शर्मा, डॉ. अभिनव शर्मा की याचिकाओं पर दिए। अदालत ने सरकार से कहा जो मांगें मानने योग्य हैं उन्हें तुरंत माने और हड़ताल के मामले में 2011 में दिए आदेश का पालन करवाए।
    अदालत ने कहा कि एसएमएस में हर डॉक्टर को एक दिन में 800 मरीज देखने होते हैं और उन पर वर्कलोड है, ऐसे में डाक्टर्स क्या करें। जवाब में प्रार्थी अभिनव शर्मा ने कहा कि वर्कलोड तो राज्य की पुलिस और इंडियन आर्मी पर भी है तो क्या उन्हें भी वर्कलोड के कारण हड़ताल पर चले जाना चाहिए।
    4 बार वार्ता, हर बार सहमति की बात...फिर भी क्यों नही टूट रही हड़ताल
    डॉक्टरों की चल रही हड़ताल का गतिरोध शुक्रवार को भी नहीं टूट पाया है। सरकार का अधिकांश मांगों को मानने के बावजूद हड़ताल को समाप्त नहीं करना, मौखिक समझौते के बाद सेवारत चिकित्सक संघ के पदाधिकारियों का अचानक से हस्ताक्षर करने से मना कर देना और लिखित सहमति बनने से तुरंत पहले रेजीडेंटस हड़ताल में शामिल हो गए। यहां तक कि रेस्मा लागू किए जाने और हाईकोर्ट की चेतावनी के बाद भी हड़ताल खत्म होने का नाम नहीं ले रही। आखिर पांच दिन से चल रही हड़ताल क्यों नहीं टूट रही, ऐसी क्या मांगे हैं जिन पर सहमति नहीं बन रही और इसकी क्या वजह है? इसे लेकर भास्कर रिपोर्टर ने हड़ताल के पहले दिन से पांचवे दिन की सच्चाई जानीं। कई चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। हर मुुद्दे पर जाना चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ का मत।
    -पेश है विशेष रिपोर्ट।
    हड़ताल नहीं टूटने की पहली वजह: क्रेडिट लेने की होड़
    हड़ताल के दूसरे ही दिन चिकित्सा मंत्री ने चिकित्सक संघ के पदाधिकारियों को घर बुलाया। जो पदाधिकारी पहुंचे उनमें प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. राकेश हीरावत और डॉ. वरिष्ठ उपाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह ओला मौजूद थे। प्रमुख 6 मांगों में से 5 पर सहमति बन गई। लेकिन रात करीब डेढ़ बजे डॉ. अजय चौधरी ने समझौता पत्र पर हस्ताक्षर से मना कर दिया। जबकि डॉ. हीरावत व जगदीश मोदी चाह रहे थे कि हस्ताक्षर कर हड़ताल समाप्त कर दी जाए। वजह यह सामने आई, डॉ. अजय और उनके साथियों को हस्ताक्षर करके हड़ताल समाप्त कर देना मंजूर नहीं था।
    मंत्री –हमने चिकित्सकों की हर मांग मानी। संघ के अध्यक्ष की लिखित में मांग पूरी करने की जिद पर हड़ताल खत्म करने के लिए रात एक बजे हैल्थ सेक्रेटरी तक को बुलाया। उनकी मांगें मानी गई लेकिन उसके बावजूद उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। जबकि एक धड़ा हस्ताक्षर करने और हड़ताल खत्म करने को तैयार था।
    दूसरी वजह: राजनीतिक रूप देने की कोशिश
    पांच नवंबर की रात को ही समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने को लेकर संघ में ही दो धड़े बंट गए थे। जिन सभी मांगों पर सहमति बन गई थी और अचानक ने डॉ. अजय चौधरी ने डॉ. लक्ष्मण सिंह को हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। बताया गया, एक फोन आने के बाद डॉ. अजय ने यह हस्ताक्षर करने से मना किया।
    मंत्री –हड़ताल को राजनीतिक रूप दिया गया है। डॉ. अजय चौधरी पूरी तरह राजनीति कर रहे हैं और उन्हें कोई राजनीतिक व्यक्ति ही सपोर्ट कर रहा है, इससे मना नहीं किया जा सकता।
    तीसरी वजह: व्यक्तिगत कारणों को तो नहीं साधा जा रहा
    डॉ. अजय पहले भी एक राजनीति पार्टी से जुड़े हुए माने जाते रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि चुनावों से ऐन पहले वह अपनी ताकत दिखाना चाह रहे हैं। संभव है कि चुनावों के समय वह किसी पार्टी से टिकट मांग लें या किसी राजनेता को वोटों का समर्थन दें। हड़ताल खत्म नहीं करने के पीछे की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है।
    मंत्री – डॉ. अजय चौधरी ही हड़ताल को खत्म नहीं होने दे रहे हैं। वे एक पार्टी से पहले से जुड़े हैं और अभी भी अपने हितों को साधने के लिए
    सभी साथी डॉक्टर्स और आमजन के साथ धोखा कर रहे हैं।
    #भास्कर सवाल : जब अधिकतर मांगें मान लीं, फिर भी हड़ताल क्यों?
    मंत्री बोले : हम मांगें मान चुके हैं, राजनीति कर रहे हैं अजय चौधरी
    हम मांगें मान चुके हैं। लेकिन किसी के इशारे पर हर बार डॉ. अजय चौधरी ने वार्ता तोड़ी। उनके पिता कांग्रेस से प्रधान थे। उनकी भी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस से टिकट लेने की कोशिश की थी। वे राजनीति कर रहे हैं।
    -कालीचरण सराफ, चिकित्सा मंत्री
    ...उधर डॉक्टर : मांगें मान ली होतीं तो आंदोलन ही क्यों करते
    चिकित्सा मंत्री का बयान दुर्भाग्यजनक है। हम न राजनीति से प्रेरित हैं। न किसी के इशारे पर आंदोलन चला रहे हैं। आंदोलन सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष स्तर पर नहीं है। दस हजार डॉक्टरों का आंदोलन है। अगर मांगें मान लीं होतीं तो आंदोलन क्यों करते।
    -डॉ. दुर्गाशंकर सैनी, महासचिव, से.चि.संघ
    वे कौन हैं..., जो नहीं चाहते हड़ताल टूटे
    सरकार ने गिरफ्तारी के लिए डॉक्टरों की एक सूची पुलिस को सौंपी है। इनमें डाॅ.अजय चौधरी, डाॅ. वर्षा सक्सेना, डाॅ. दुर्गा शंकर सैनी, डाॅ. लक्ष्मण सिंह ओला, डाॅ. विद्या प्रकाश, डॉ. मनीष चौधरी एवं मोहनलाल सिंधी के नाम हैं।
    चिकित्सा मंत्री के अनुसार- डॉ. अजय चौधरी मांगों पर कई बार बदले, समझौता पत्र पर हस्ताक्षर नहीं होने दिए। वार्ता में सहमति बन गई थी, लेकिन डाॅ.गोपाल मीणा, डाॅ.सोमेश खीचड़ और डाॅ.रमेश देवासी ने माहौल बिगाड़ दिया। तीनों पर भी कार्रवाई के निर्देश हैं।
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    आसार और असर: रेजीडेंट्स भी हड़ताल पर उतर चुके हैं। अस्पतालों में 60% काम इन्हीं के भरोसे...ऐसे में हालात बदतर होते जाएंगे।
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Web Title: Medical Emergency In Rajasthan Due To Doctors Strike
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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