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बिजली का एवरेज बिल बंद: स्लैब का हर महीने अलग कैलकुलेशन होगा, ये होंगे फायदे

तनवीर अहमद | Last Modified - Nov 05, 2017, 06:37 AM IST

एक महीने का बिजली बिल रीडिंग, केलकुलेशन, स्लेबवाइज गणना जैसे सभी पहलुओं को प्रभावित करेगा।
बिजली का एवरेज बिल बंद: स्लैब का हर महीने अलग कैलकुलेशन होगा, ये होंगे फायदे
जयपुर. एक महीने का बिजली बिल रीडिंग, केलकुलेशन, स्लेबवाइज गणना जैसे सभी पहलुओं को प्रभावित करेगा। इस दिलचस्प गणना से कहीं उपभोक्ताओं को फायदा पहुंचेगा तो कुछ मामलों में दो महीने के बिल के मुकाबले ज्यादा बड़ा बिल बनेगा। अब तक एक महीने बिजली की खपत कम रहने और दूसरे महीने में खपत बढ़ने पर दोनों महीनों की खपत का औसत बिल बनता था। ऐसे में कम बिजली खर्च होने पर भी उपभोक्ता काे फायदा नहीं मिलता था। कुछ मामलों में एक-एक महीने के दो बिल औसत बिल से ज्यादा बनेंगे।

यूं होगा फायदा
- किसी परिवार में दो महीने में 350 यूनिट खर्च होती है। दो महीने की बिलिंग के सिस्टम में उसका औसतन उपभोग 175 माना जाता है। चाहे उसने एक महीने में 140 व दूसरे महीने में 210 यूनिट खर्च की हो।
- औसत बिल 175 यूनिट के हिसाब से तीसरी स्लैब से बनेगा, जिसमें उसे 6.40 रुपए प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना पड़ेगा। जिस महीने में 140 यूनिट बिजली खर्च हुई है, उसकी स्लैब 6.10 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से होना चाहिए।
- एक महीने में बिल बनने से ऐसे उपभोक्ता का एक महीने का बिजली का बिल 140 यूनिट का होगा, जिसके लिए उसे 6.10 रुपए प्रति यूनिट देना होगा, जबकि दूसरे महीने का बिल 210 यूनिट का होगा, जिसके लिए उसे 6.40 रुपए प्रति यूनिट देना होगा।
यूं समझें दोनों तरीकों से अलग-अलग गणना
यूं होगा नुकसान भी
- 2 माह का उपभोग 290 यूनिट
- औसत यूनिट 145
- स्लैब 6.10 रुपए प्रति यूनिट
- बिल बना 290 यूनिट गुणा 6.10 रुपए = 1769 रुपए
एक महीने का उपभोग 135
- स्लैब 6.10 रुपए प्रति यूनिट
- बिल बना 823.50 रुपए
- दूसरे महीने का उपभोग 155
- स्लैब 6.40 रुपए प्रति यूनिट
- बिल बना 992 रुपए
- दोनों महीनों के बिलों का याेग 1815.50 रुपए यानी 46.50 रुपए का नुकसान
भ्रांति और वास्तविकता
आम तौर पर लोगों में भ्रांति होती है कि दो महीने के बिल में उपभोग ज्यादा होता है, जिससे बड़ी स्लैब से गणना की जाती है और एक महीने के बिल में छोटा स्लैब होगा, यानी बिजली की दर भी कम लगेगी। जबकि दो महीने के बिलों की गणना का कंप्यूटराइज्ड तरीका यह है कि दाे महीने की कुल रीडिंग को औसतन आधा कर लिया जाता है, उसके अनुसार स्लैब निर्धारित किया जाता है।
उपभोक्ता को फायदा
- हर महीने बिल मिलने से घर खर्च की प्लानिंग मासिक स्तर पर ही होगा।
- कई बार उपभोक्ता घर से बाहर रहता है। बिजली खर्च में अंतर आता है। कम स्लैब के कारण उसका बिल भी कम आएगा।
उपभोक्ता को नुकसान
बिल जमा करवाने हर महीने कंपनी के काउंटर पर जाना पडे़गा।
- स्लैब 6.40 रुपए प्रति यूनिट
- बिल बना 1344 रुपए
- दोनों महीनों का कुल बिल 2198
- एक महीने बिल आने पर 42 रुपए का फायदा
दो महीने में बिल आता है तो.....
कुल यूनिट- 350
औसत यूनिट- 175
स्लैब 6.40 रुपए प्रति यूनिट
- बिल बना 350 यूनिट गुणा 6.40 रुपए 2240 रुपए
- दोनों महीनों का कुल बिल 2198
- एक महीने बिल आने पर 42 रुपए का फायदा
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Web Title: bijli ka evrej bil band: slaib ka har mhine alga kailkuleshn hoga, ye hongae faayde
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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