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निजी कंपनी ने 4 सालों में MRI जांचों से जितना कमाया, उसमें खुद लगा लेता 3 मशीनें

सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों की एक कमेटी ने सरकारी जांच निजी हाथों से कराने पर सवालिया निशान लगा दिया है।

संदीप शर्मा | Last Modified - Nov 17, 2017, 08:43 AM IST

निजी कंपनी ने 4 सालों में MRI जांचों से जितना कमाया, उसमें खुद लगा लेता 3 मशीनें

जयपुर.प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में एमआरआई और सीटी स्कैन जांच पीपीपी मोड पर कराने पर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) की आपत्ति के बाद अब सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों की एक कमेटी ने सरकारी जांच निजी हाथों से कराने पर सवालिया निशान लगा दिया है। कमेटी का कहना है कि पीपीपी के तहत एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें लगाकर निजी कंपनी ने चार वर्षों में जितना पैसा कमाया, उस रकम में एसएमएस अस्पताल स्वयं की जांच मशीनें लगा सकता था और उसके बाद आरआएमआरएस को मिलने वाली राशि से डवलपमेंट किया जा सकता था। साथ ही कमेटी ने पीपीपी पर हो रही जांच की रिपोर्ट की क्वालिटी में गड़बड़ी और उसमें देरी होने की बात भी कही है।


एसएमएस अस्पताल में लगाई गई निजी एमआरआई और सीटी स्केन सेंटर में हो रही अनियमितताओं की जांच के लिए वर्ष 2016 में डॉक्टरों की एक कमेटी गठित की थी। कमेटी ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल को सौंपी है। एमसीआई की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि किसी भी मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग इक्यूपमेंट नहीं होने चाहिएं और उन्हें लगाया भी नहीं जाना चाहिए। इससे स्टूडेंट की स्डटी पूरी तरह प्रभावित होती है। एसएमएस की कमेटी ने रिपोर्ट में इन बिन्दुओं को सही ठहराया है।

कमेटी ने यह कहा है रिपोर्ट में

- मरीजों को रिपोर्ट देरी से मिल रही है और इसकी वजह से उनका इलाज प्रभावित हो रहा है। एक दिन में मिलने वाली रिपोर्ट के लिए 48 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
- जिस गुणवत्ता की रिपोर्ट मरीजों को दी जानी चाहिए, वह भी डॉक्टर्स को नहीं मिल रही। ऐसे में या तो दो बार जांच करानी पड़ रही है या मजबूर होकर निजी सेंटर पर जाना पड़ जाता है।
- क्वालिटी ऑफ मेडिकल एज्युकेशन खराब हो रहा है। जिस स्तर पर स्टूडेंटस को नॉलेज और एक्सपीरियंस मिलना चाहिए।
- एमसीआई ने भी पीपीपी के तहत लगाई गई एमआरआई और सीटी स्केन सेंटर पर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे पीजी और यूजी स्टूडेंट की स्टडी प्रभावित हो रही है। स्टूडेंट को जिस स्तर पर सीखने को मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा है।
- पीपीपी के तहत एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनें लगाकर निजी कंपनी ने चार वर्षों में जितना पैसा कमाया, उस रकम में एसएमएस अस्पताल स्वयं की जांच मशीनें लगा सकता था और उसके बाद आरआएमआरएस को मिलने वाली राशि से डवलपमेंट किया जा सकता था।

दो तरह की एमआरआई प्रमुख

ब्रेन एमआरआई

- ~3200 प्रति जांच
- 48 रोजाना जांच एक दिन में करीब डेढ लाख रुपए की एमआरआई
- ~45 लाख महीने का आंकडा

स्पाइन एमआरआई

- ~2950 प्रति जांच
- 75 जांच रोजाना
- एक दिन में करीब दो लाख रुपए की एमआरआई
- 55 लाख एक महीने का आंकडा

3 तरह की सीटी - ब्रेन, चेस्ट और एब्डोमन

- औसत प्रति जांच 1900 रुपए - रोजाना 200 जांचें। - एक महीने का आंकड़ा एक करोड़ रुपए।

हर माह करीब दो करोड़ की जांच अस्पताल में

- 30% यानी कि 60 लाख रुपए अस्पताल को िदए जाते हैं।
- बीपीएल के कम से कम 10% केस निशुल्क यानी कम से कम 10 लाख रुपए का खर्च अलग।
- मशीनों के रख-रखाव और खर्च पर हर माह 50 से 60 लाख रुपए खर्च ।
- कंपनी को अनुमानित बचत हर महीने करीब 40 लाख और एक साल में 4 करोड़ 80 लाख रुपए।

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Web Title: niji kampany ne 4 saalon mein MRI jaanchon se jitnaa kmaayaa, usmein khud lgaaa letaa 3 mshinen
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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