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7वां पे स्केल : पोस्ट खत्म कर सरकार ने साल में बचाए 3600 Cr, फिर भी एरियर नहीं

कैंद्र के नियमों का हवाला देकर समय बढ़ाया, पर राज्य में केंद्र की तर्ज पर वेतनमान नहीं

विनोद मित्तल | Last Modified - Nov 06, 2017, 08:25 AM IST

7वां पे स्केल : पोस्ट खत्म कर सरकार ने साल में बचाए 3600 Cr, फिर भी एरियर नहीं
जयपुर.प्रदेश में 7वें वेतनमान को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। कर्मचारी अपने-अपने हिसाब से आंदोलन का रूख अपना रहे हैं। लेकिन प्रदेश के साढ़े तीन लाख शिक्षक समझ नहीं पा रहे हैं कि बार बार केंद्र के नियमों का हवाला देकर स्कूलों का समय बढाने, पदों में कटौती करने का काम करने वाली सरकार अब केंद्र के नियम लागू क्यों नहीं कर पा रही। पिछले साल सरकार ने 17 हजार स्कूल मर्ज कर दिए और स्टाफिंग पैटर्न लागू कर 70 हजार पद समाप्त करके 3600 करोड़ रुपए सालाना की बचत कर ली, लेकिन अब सरकार को एरियर देना भारी पड़ रहा है। शिक्षक 7वां वेतनमान 1 जनवरी 2016 से लागू करने की मांग कर रहे हैं। एक शिक्षक का 21 महीने के एरियर 1.50 लाख से 2 लाख रुपए तक माना जाए तो प्रदेश के साढ़े तीन लाख शिक्षकों का एरियर 6 हजार करोड़ रुपए के लगभग आता है। शिक्षकों का दावा है कि सरकार को जितना एरियर देना है, उसका आधा से अधिक तो एक साल में पहले ही बचा चुकी है। अब एरियर देने में क्या परेशानी है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार एरियर नहीं देनी, वे नए वेतनमान का विरोध करते रहेंगे।
केंद्र के नियमों के नाम पर 70 हजार पद खत्म किए
- सरकार ने 17 हजार स्कूलों को मर्ज कर दिया और नामांकन के आधार पर स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराने का नया नियम लागू कर दिया। इन दोनों की नियमों के कारण प्रदेश में शिक्षकों के करीब 70 हजार पदों को समाप्त कर दिया।
- शिक्षकों ने जब इसका विरोध किया तो सरकार ने केंद्र के नियमों का हवाला देते हुए यह नियम लागू करने की बात कही। लेकिन सरकार ने केंद्र के नियम नहीं बताए कि वहां इस संबंध में कहां क्या नियम है। बस शिक्षकों के आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्र के नियमों का शिगुफा छोड़ दिया।
कितना बजट
समाप्त किए गए पदों पर काम कर रहे एक शिक्षक को 40 से 50 हजार रुपए का वेतन भी माना जाए तो 70 हजार शिक्षकों का एक महीने का वेतन ही करीब 300 करोड़ रुपए बैठता है। यानी सरकार को हर साल 3600 करोड़ रुपए की बचत हुई।
केंद्र का ही हवाला देकर राज्य में स्कूलों का समय बढ़ा दिया
पहले यह होता था समय

पहले सरकारी स्कूलों का सर्दी में सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक और गर्मियों में सुबह 7 से दोपहर1 2 बजे तक का समय होता था। पहले सर्दियों में कुल 6 घंटे और गर्मियों में 5 घंटे का समय होता था।
फिर यह बदलाव किया
सर्दियों में सुबह 9:30 बजे से दोपहर 3:40 बजे तक और गर्मियों में सुबह 8 से दोपहर 2:10 बजे तक। अब सर्दियों और गर्मियों में समान रूप से 6 घंटे 10 मिनट का समय हो गया।
केंद्रीय स्कूलों का समय
केंद्रीय विद्यालयों में सर्दियों में सुबह 7:50 से दोपहर 2:10 बजे तक और गर्मियों में सुबह 7:30 बजे से 1:40 बजे तक का समय रहता है। इसके हिसाब से स्कूल का कुल समय सर्दियों में 6 घंटे 20 मिनट का और गर्मियों में 6 घंटे 10 मिनट का समय रहता है।
इनका कहना है
सरकार स्कूलों का समय बढा चुकी है और 70 हजार पद समाप्त कर चुकी है। 7वां वेतनमान लागू करते समय केंद्र के नियम कहां चले गए थे। सरकार को केंद्र के समान 1 जनवरी 2016 से 7वां वेतनमान लागू करना चाहिए।
- शशिभूषण शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
पहले ही पद समाप्त करके सरकार करोड़ों रूपए की बचत कर चुकी है। सरकार ने 1 अक्टूबर 2017 से सातवां वेतनमान लागू किया है, जिसका हम विरोध करते हैं। सरकार को तुरंत 1 जनवरी से 2016 से 7वां वेतनमान लागू करते हुए 21 महीने के एरियर का भी भुगतान करना चाहिए।
- कमला लांबा, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल राजस्थान महिला शिक्षक संघ
देश के कई राज्यों में सातवां वेतनमान 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया है। केवल राजस्थान ही ऐसा राज्य है जहां केंद्र के समान वेतनमान नहीं दिया जा रहा। इसको लेकर ना केवल शिक्षक बल्कि हर वर्ग में आक्रोश है।
- विपिन प्रकाश शर्मा, उपाध्यक्ष, राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत)
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