आदर्श सोसायटी स्कैम / नीरव, मेहुल, माल्या से भी बड़ा जालसाज मोदी परिवार, जिंदा मवेशियों को भी मरा बताकर उठा लेता था क्लेम



गुड़गांव में खड़ी सिरोही के मोदी परिवार की आलीशान कोठी। गुड़गांव में खड़ी सिरोही के मोदी परिवार की आलीशान कोठी।
X
गुड़गांव में खड़ी सिरोही के मोदी परिवार की आलीशान कोठी।गुड़गांव में खड़ी सिरोही के मोदी परिवार की आलीशान कोठी।

  • पहले बीमा एजेंट था मुकेश मोदी, मवेशियों के फर्जी पोस्टमाॅर्टम करवा देता था
  • देशभर में 3.70 लाख एडवाइजर बनाए, जिन्हें 40% तक कमीशन दिया
  • मित्रों व परिजनों के नाम 187 लोन खाते खोल 12 हजार 414 करोड़ रु. ट्रांसफर किए

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 01:31 AM IST

पाली. आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव साेसायटी के 14,800 करोड़ के घोटाले से जुड़ी चार्जशीट के 40 हजार पन्नों में एक से एक चौंकाने वाले तथ्य हैं। मुकेश माेदी ने एडवाइजर के रूप में कागजों में महावीर कंसल्टेंसी नाम की कंपनी बना करोड़ों रुपए का कमीशन बांट दिया।

 

यह कंपनी सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश की पत्नी मीनाक्षी व पुत्री प्रियंका के पति वैभव लोढ़ा की है, जिसका प्रधान कार्यालय हरियाणा के गुड़गांव में सुशांतलोक फेस-1 में सुशांत शॉपिंग एक्रेड बिल्डिंग में था। राजस्थान एसओजी की टीम जब जांच करने यहां पहुंची तो ग्राउंड फ्लोर में 12 बाई 15 फीट की दुकान मिली। इसी में 125 फर्जी शैल कंपनियों का भी रजिस्ट्रेशन किया, जो अस्तित्व में नहीं थी।


दरअसल, 20 लाख निवेशकाें को धोखा देने वाला मास्टरमाइंड मुकेश मोदी कॅरिअर की शुरुआत से ही जालसाज रहा है। 1995 में वह बीमा एजेंट था। यह मामला उसके द सिरोही अर्बन कमर्शियल बैंक की प्रबंध समिति का अध्यक्ष बनने से पहले का है। बीमा एजेंट रहते हुए उसने ओरिएंटल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंश्योरेंस जैसी कंपनी के साथ काम किया। उस वक्त आरोप लगे थे कि मवेशियों के फर्जी पोस्टमार्टम करवाकर इंश्योंरेंस में फर्जीवाड़ा करके पैसे वसूलता था।

 

अब इस परिवार ने बड़ी जालसाजी कर डाली है। जालसाजी के किस्से भी इतने हैं कि सुनने वाला दंग रह जाए। एसअाेजी की चार्जशीट में बताया है कि मल्टी स्टेट को-आॅपरेटिव सोसायटी की धारा 25 में प्रावधान है कि कोई भी सहकारी समिति सिर्फ और सिर्फ अपने सदस्य को लोन दे सकती है। किसी भी संस्था को ऋण नहीं दे सकती और न किसी व्यक्ति या संस्था समिति में जमा राशि में से कमीशन दे सकती है। इस नियम को ताक पर रखा।

 

हल  : सहारा की तरह सोसायटी को रकम चुकाने का आदेश दे सकत है कोर्ट
आयकर विभाग ने 3 हजार करोड़ रुपए की सोसायटी जब्त कर रखी है, जबकि कुल 20 लाख से ज्यादा निवेशकों से कुल 14,800 करोड़ रुपए अटके हैं। ऐसे में सवाल यह है कि निवेशकों के पैसों के क्या होगा? हालांकि केंद्र ने डूबे रुपयों का पुनर्भरण के लिए योजना हाल ही में बनाई है, लेकिन इसके प्रारूप का अभी तक नोटिफिकेशन नहीं हुआ। ऐसे में कोर्ट ही यह रुपया लौटाने के आदेश दे सकती है कि घोटाला करने वाले आरोपी किसी तरह रुपयों का प्रबंध कर निवेशकों का पैसा दें। जैसा सहारा घोटाले में शीर्ष कोर्ट ने सुब्रत रॉय को 10 हजार करोड़ लौटाने के आदेश दे रखे हैं।

 

2.10 करोड़ रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ था, लोन के दस्तावेज भी फर्जी निकले थे
19 साल पहले यदि सरकार गंभीरता से जांच करा लेती तो शायद आज देश के 20 लाख निवेशकों के करोड़ों रुपए लुटने से बच सकते थे। क्योंकि इस सोसायटी बनने के महज दो साल बाद ही 2001 में सहकारिता विभाग को शिकायत मिली थी। फिर भी विस्तृत जांच नहीं करवाई, जिससे कार्रवाई नहीं हो सकी। भास्कर को इस पूरी पड़ताल के दौरान पता चला कि 1999 में सहकारिता विभाग को शिकायत मिली थी। जिस पर बैंकिंग रजिस्ट्रार ने विभागीय जांच कराई। उस समय बैंकिंग रजिस्ट्रार की ओर से अंतरिम रिपोर्ट में खुलासा किया था कि कई खातों में क्रेडिट लिमिट बढ़ाने के लिए संदिग्ध लेन-देन हुआ था।

 

उदाहरण के तौर पर रिद्धि-सिद्धि वाइन्स की मालकिन इंदु टांक के खाते में 23 मार्च 2001 के दिन 2.10 करोड़ जमा करवाए। फिर उस रकम से उदयपुर के आबकारी विभाग के नाम 11 अलग-अलग रकम के ड्राफ्ट बनवाए गए। इसके तीन दिन बाद इन ड्राफ्ट को कैंसिल करवा लिया व नकद रकम खाते से निकाल ली गई। ऋण लेने के लिए जमीन के फर्जी कागजात जमा करवाए गए। रिपोर्ट में 14 ऐसे खाताधारकों के नाम लिखे, जिन्हें बैंकिंग के नियमों को ताक पर रखकर ऋण दिया। इन सब लोगों को 8.60 करोड़ से ज्यादा का ऋण दिया गया था जिसमें क्रेडिट लिमिट को समय-समय पर बढ़ाया था।

 

घर के नौकरों, परिचित महिला और पूर्व आईएएस का बेटा भी पार्टनर
 

खुलासा: जिस पते पर 125 कंपनियां बताईं वहां 15 फीट की दुकान मिली
गुडगांव में इस दुकान में एसओजी पहुंची तो 4 कुर्सी व एक मेज मिली। जहां एक कम्प्यूटर व रैक रखी थी। देखरेख के लिए 8 हजार रुपए महीना पगार पर वेस्ट बंगाल के नंदियाड़ का 21 वर्षीय मोती उल मोल हक मिला, जिसने बताया कि यहां बरसों से कोई नहीं आया। उसकी ड्यूटी सुबह 10 से शाम 5 बजे तक दुकान की निगरानी की है। जांच में पता चला मुकेश की पत्नी व दामाद ने यहां का एड्रेस देकर बतौर एडवाइजर सोसायटी से 720 करोड़ उठाए। इसी पते पर सैकड़ों फर्जी शैल कंपनियां का भी रजिस्ट्रेशन किया। मगर असल में ऐसी 125 कंपनियों का कोई अस्तित्व ही नहीं है, जबकि सोसायटी की ओर से उनको भी बतौर एडवाइजर करोड़ों रुपए का कमीशन दिया।

 

 

ललिता राजपुराेहित : 8 साल एमडी रही, 14 कराेड़ का वेतन उठाया
माउंट आबू मूल की ललिता राजपुरोहित मुकेश व वीरेंद्र मोदी की परिचित है। ललिता 2003 से 2011 तक एमडी रही। निवेशकों की जमा राशि में से 12,414 करोड़ रुपए को फर्जी शैल कंपनियां बना लोन की राशि बांटने में भूमिका अहम थी। पांच साल में 14 करोड़ बतौर वेतन लिए। ललिता की 2006 में सालाना सीटीसी 23 लाख थी, जो 2007 में 64 लाख हो गई। 2008 में 78 लाख तो 2009 में 1.9 करोड़, 2010 में 3.51 करोड़ और 2011 में 7.64 करोड़ रुपए कर दी गई। पांच साल में 13.89 करोड़ वेतन सोसायटी से हासिल किया।

 

ड्राइवर : पहले अहमदाबाद, फिर पूरे ग्रुप का अध्यक्ष बना दिया
सिरोही का ईश्वरसिंह सिंदल सोसायटी के संस्थापक मोदी बंधुओं की गाड़ी चलाता था। उसे सोसायटी का अहमदाबाद अध्यक्ष बनाया। 2015 में सोसायटी के पूरे ग्रुप अध्यक्ष बनाया। ईश्वरसिंह ने भी कई फर्जी शैल कंपनिया बनाकर 387 करोड़ का लोन दिया। मुकेश मोदी की पत्नी, दामाद की फर्म को 720 करोड़ का कमीशन दिया, नोटबंदी में 223 करोड़ रु. खुर्द-बुर्द किए। ईश्वरसिंह 1 जून से न्यायिक अभिरक्षा में है। सिरोही के आदर्श नगर का कमलेश चौधरी सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष वीरेंद्र व मुकेश का ममेरा भाई है, जो 2011 से मई 2015 तक सोसायटी अध्यक्ष रहा।

 

पिता के बाद खुद मुकेश बना सिरोही अरबन कॉमर्शियल बैंक का अध्यक्ष

वीरेंद्र के बाद में सोसायटी का संस्थापक अध्यक्ष बनने वाला मुकेश मोदी शुरुआत से ही जालसाज जैसा रहा है। बीमा एजेंट रहते हुए मुकेश ने जिंदा मवेशियों को मृत बताकर पैसे हड़पे थे, जबकि इनके पिता प्रकाशराज ग्रामसेवक थे। बाद में भारतीय किसान संघ के संयोजक बने। 1992 में सिरोही अरबन कॉमर्शियल बैंक के अध्यक्ष निर्वाचित हुए, जिनका 1994 में निधन हो गया। उनके बाद मुकेश प्रबंध समिति का अध्यक्ष बना। बाद में मुकेश की पहल पर सिरोही अरबन कॉमर्शियल बैंक का नाम बदलकर माधव नागरिक सहकारी बैंक रखा गया। 1999 में मुकेश माधव नागरिक सहकारिता बैंक की प्रबंध समिति से हटे तो भाई वीरेंद्र को प्रबंध समिति का अध्यक्ष बनवा दिया। 1999 में मुकेश ने आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की नींव रखी।

 

mosi

 

20 लाख निवेशक पर 3,70,696 एडवाइजर बनाकर कमीशन बांटा
आरोपियों ने रिश्तेदारों, मित्रों को लोन बांट दिया जबकि को-ऑपरेटिव फर्म में निवेशकों की राशि में उसी को लोन दे सकते हैं, जिसने खुद भी उसी फर्म में निवेश किया हो यानि फर्म का सदस्य हो। लेकिन आदर्श सोसायटी ने देश में 3,70,696 एडवाइजर बनाए, जिन्हें नियम विरुद्ध निवेशकों के रुपयों से कमीशन दिया। निवेशकों की करोड़ों की राशि में मुकेश की पत्नी मीनाक्षी व दामाद वैभव की फर्जी फर्म महावीर कंसल्टेंसी को एडवाइजर बना 720 करोड़ रुपए कमीशन दिए। परिचित ललिता, पुत्री प्रियंका, पुत्र राहुल, रोहित व समीर के साथ दामाद वैभव लोढ़ा को ही पांच साल में 270 करोड़ बतौर वेतन बांट दिया।

 

मुकेश ने 2014 में भाजपा से सांसद का मांगा टिकट, लेकिन नहीं मिला
मुकेश का राजनीति में भी दखल रहा। 2009 में आदर्श को-ऑपरेटिव बैंक ने गुजरात के घाटे में चल रहे दो सहकारी बैंक डीसा नागरिक सहकारी बैंक व सुरेन्द्र नगर का मर्केंटाइल सहकारी बैंक का विलय कर इसे आदर्श क्रेडिट सोसायटी में मिलाया। इससे मुकेश का गुजरात में भी दबदबा बढ़ गया। मुकेश ने 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा से सिरोही-जालोर संसदीय सीट से टिकट मांगा था, लेकिन 2010 में मुकेश के खिलाफ आयकर जांच चलने के कारण टिकट नहीं मिला।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना