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अक्षय तृतीया: सर्वार्थसिद्धि योग कल, हर कार्य रहेगा अक्षय

आभूषण, वाहन, जमीन, गृह आदि की खरीदारी के लिए अति उत्तम व शुभ दिन, दान, स्नान का सौ गुना फल

Bhaskar News | Last Modified - Apr 17, 2018, 12:06 AM IST

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    जयपुर. वैशाख शुल्क तृतीया पर बुधवार को सर्वार्थसिद्धि योग में अक्षय तृतीया (आखातीज) श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया पर किया गया कोई भी कार्य अक्षय रहता है और उसका 100 फल मिलता है। साथ ही अक्षय तृतीया को सोने के आभूषण खरीदने सहित जमीन, मकान, वाहन, वस्त्र आदि की गई खरीदारी के लिए भी अतिशुभ व फलदायी माना गया है। दूसरी ओर, मंदिरों में भी आखातीज महोत्सव मनाए जाएंगे। प्राचीन मंदिर आमेर रोड स्थित बद्री नारायण जी डूंगरी में वार्षिक मेला भरेगा। इस दिन किया गया दान, स्नान, जप, हवन, तर्पण, श्राद्ध का फल भी अक्षय रहेगा। इसके साथ ही नए संवत्सर का पहला व अबूझ सावा होने से विवाह, गृह प्रवेश, गृह आरंभ आदि शुभ व मांगलिक कार्य भी बिना मुहूर्त के किए जा सकेंगे। उधर, बद्रीनाथ व केदारनाथ के पट भी आखातीज को ही खुलेंगे।

    पूरा दिन है खरीदारी के लिए श्रेष्ठ
    - ज्योतिषशास्त्री पं. दिनेश मिश्रा के अनुसार यूं तो अक्षय तृतीया का पूरा दिन ही शुभ कार्यों व खरीदारी के लिए श्रेष्ठ रहेगा। फिर भी इन मुहूर्तों में वस्तु विशेष की खरीदारी व शुभ कार्य करने से अक्षय फल मिलेगा। फिर भी जमीन, मकान, दुकान के लिए सुबह 8:15 से रात तक, आभूषण, वाहन, वस्त्र के लिए 10:51 से रात तक, सजावट, फर्नीचर के सुबह 11:15 से शाम 6:48 तक और इलेक्ट्रिक सामान, मशीनरी के लिए दोपहर 3:40 से शुभ मुहूर्त है।


    बन रहे हैं कई योग

    - सूर्योदय से लेकर दिनभर सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। कृतिका नक्षत्र रात 12:27 तक रहेगा। फिर रोहिणी नक्षत्र आएगा। ये नक्षत्र लोगों के लिए खासा शुभ है।इसके साथ ही रात 12:27 से अगले दिन तक रवि योग भी रहेगा।

    यह है विशेष महत्व
    - भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अज्ञातवास के दौरान अक्षयपात्र प्रदान किया था। वहीं, अक्षय तृतीया भगवान परशुराम के अवतरण की तिथि भी है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। यह तिथि सदैव स्थायी रहती है। पंचांग में इसका कभी क्षय नहीं होता है। इस वजह से इसे ईश्वर की तिथि माना गया है। इसी दिन वृंदावन में बांकेबिहारीजी के चरणों दर्शन भी होंगे। सिर्फ इसी दिन भगवान विष्णु का अक्षत से पूजन होता है, अन्यथा विष्णु पूजन में अक्षत निषेध रहता है। इस दिन पंखा, चप्पल, सोना, चांदी, तांबा, छाता, गाय, कलश, जल से भरा बर्तन, स्वर्ण घड़ा, कुल्हड़ आदि मंदिर में दान किया जा सकता है।

    यह है विशेष महत्व
    - भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अज्ञातवास के दौरान अक्षयपात्र प्रदान किया था। वहीं, अक्षय तृतीया भगवान परशुराम के अवतरण की तिथि भी है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। यह तिथि सदैव स्थायी रहती है। पंचांग में इसका कभी क्षय नहीं होता है। इस वजह से इसे ईश्वर की तिथि माना गया है। इसी दिन वृंदावन में बांकेबिहारीजी के चरणों दर्शन भी होंगे। सिर्फ इसी दिन भगवान विष्णु का अक्षत से पूजन होता है, अन्यथा विष्णु पूजन में अक्षत निषेध रहता है। इस दिन पंखा, चप्पल, सोना, चांदी, तांबा, छाता, गाय, कलश, जल से भरा बर्तन, स्वर्ण घड़ा, कुल्हड़ आदि मंदिर में दान किया जा सकता है।

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