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रियलिटी चेक / दूध के 150 सैंपल में मिला एल्फोटोक्सिन, इससे लीवर डैमेज, कैंसर का भी खतरा



Alfotoxin found in milk samples
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Alfotoxin found in milk samples
  • नेशनमिल्क सर्वे की रिपोर्ट- राजस्थान के 34 जिलों से लिए दूध के 300 सैंपल, 150 फेल...
  • अतिरिक्त निदेशक को पता ही नहीं, बोले- कन्फर्म नहीं कर सकता

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 05:37 AM IST

सुरेन्द्र स्वामी, जयपुर.  राजस्थान में बिकने वाला आधा दूध मिलावटी है। इसका खुलासा हाल ही में सामने आई नेशनल मिल्क सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। दूध में हमारे लिए खतरनाक एल्फोटोक्सिन और एंटीबायोटिक्स मिला  है, जिससे हमारा लीवर डैमेज हो सकता है या कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है।


केन्द्र सरकार ने पिछले महीनों राजस्थान समेत देश के दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब, गुजरात व हरियाणा में  मिल्क सर्वे के दौरान दूध की क्वालिटी की जांच की है। यह जांच सुप्रीम कोर्ट की फटकार व बढ़ रही मिलावट को देखते हुए की गई। टीम ने राजस्थान के 34 जिलों से दूध के 300 नमूने उठाए थे। इनकी जांच राष्ट्रीय स्तर की लैब में कराई गई, जिसमें से 150 नमूने फेल हो गए।

 

एक्सपर्टस के अनुसार चौंकाने वाली बात यह है कि चौंकाने वाली जानकारी ये है कि दूध में एंटीबायोटिक व एल्फोटोक्सिन के अभी तक मानक ही नहीं बने हैं। इनके सेवन से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगते है। धीरे-धीरे एंटीबायोटिक्स का असर भी कम होने लगता है। एल्फोटोक्सिन एक तरह का जहर है, जो लीवर डैमेज, लीवर सिरोसिस व कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों को जन्म देता है। 

 

किस, जिले में कितनी मिलावट :
एंटीबायोटिक : जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर, चूरू, अलवर, सीकर, दौसा, जैसलमेर, बाड़मेर, सिरोही, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सवाईमाधोपुर, करौली, भरतपुर, उदयपुर, चित्तोड़गढ़, राजसमंद व झालावाड़ मिला।
एल्फोटोक्सिन एम-1 : जयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, अलवर, श्रीगंगानगर, सीकर, चूरू, झुंझुनू, हनुमानगढ़, िचत्तौड़गढ़, प्रतापगढ़. डूंगरपुर के सैंपल में मिला।

 

2011 से फूड सेफ्टी एक्ट, लेकिन मिलावट नहीं रुकी : प्रदेश में 5 अगस्त 2011 से फूड सेफ्टी एक्ट लागू होने के बाद भी चिकित्सा विभाग दूध में मिलावट रोकने में नाकाम है। हाईकोर्ट ने प्रदेश में मिलावटी दूध की बिक्री पर वर्ष 2012 को स्वप्रेरित प्रसंज्ञान आदेश में राज्य सरकार को कहा था कि वह मिलावटी दूध की बिक्री नहीं होने दे, लेकिन आदेश बेअसर रहा। राज्य सरकार की ढिलाई के चलते आमजन को मिलने वाला दूध नहीं बल्कि सफेद जहर है। राजस्थान समेत पूरे देशभर में वर्ष 2011 व 2016 में मिल्क सर्वे हो चुका है। फिर भी मिलावट नही रुक पा रही है।

 

68% मानकों पर खरा नहीं : 68% दूध और इसके उत्पाद एफएसएसएआई के मानदंड पर खरे नहीं उतरते। भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के अनुसार डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, ग्लूकोज और रिफाइंड तेल की मिलावट आम बात है।

 

इसलिए बढ़ रहा है मिलावट का ग्राफ 

  • राजस्थान में दूध में मिलावट का ग्राफ बढ़ने के कई कारण हैं।
  • मौके पर जांच उपकरण उपलब्ध नहीं होना।
  • विशेषकर त्योहार जैसे- होली-दिवाली पर ही अभियान चलाना। ठीक से मॉनिटरिंग नहीं करना।
  • मिलावट करने वालों का नाममात्र का जुर्माना भर छूट जाना।
  • मिसब्रांड या सबस्टैंडर्ड मिलने पर दोबारा निरीक्षण नहीं।
  • मुनाफे के लिए न्यूट्रीलाइजर (कार्बोनेट वा बाईकार्बोनेट), फोरेन  फेट, स्टार्च, नमक, रिफाइंड ऑयल से दूध बनाना।
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यहां ज्यादा मिलावट : जयपुर (चौमू, कोटपूतली, गोविन्दगढ़, चीथवाड़ी, सांगानेर, बस्सी, जमवारामगढ़, चाकसू व आमेर), अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा, अलवर, भरतपुर एवं धोलपुर में दूध में पानी, यूरिया, डिटर्जेंट, स्टार्च, ग्लूकोस व फोरेन फैट मिला कर रहे ।

 

सड़े फल, सब्जी व चारे से  होता एल्फोटोक्सिन एम-1 : गाय-भैंस के सड़े-गले फल-सब्जियां, चारा-घास खाने से एस्पर्जिलस नामक फफूंद से हानिकारक टॉक्सिन पैदा हो जाता है। जो दूध में पाया जाता है। पशुओं के फफूंद लगे चारा-घास खाने से एल्फोटोक्सिन  बी-1 से एम-1 में बदल जाता है, जो हमार लिए खतरनाक है। इससे लीवर डैमेज होने के साथ ही लीवर सिरोसिस बीमारी होने की संभावना है।  
 

एंटीबायोटिक दूध से कम होती है प्रतिरोधक क्षमता : एंटीबायोटिक मिले दूध के सेवन से शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट होने से जरुरत पड़ने पर एंटीबायोटिक का असर नहीं होगा। और शरीर में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने से खतरा बना रहता है।  फार्माकोलोजी व टॉक्सीकोलोजिस्ट के अनुसार प्रति मिलीलीटर दूध में एंटीबायोटिक की मात्रा 0.1 माइक्रोग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। किसानों द्वारा बिना सोचे-समझे पशुओं को दिया जा रहा एंटीबायोटिक का डोज है।  

 

इन बीमारियों का खतरा : दूध में कार्बोनेट व बाइ कार्बोनेट, नमक, फोरेन फैट जैसी मिलावट होने पर पेट से संबंधित उल्टी-दस्त, किडनी व लीवर पर असर, हाइपरटेंशन, बच्चों में कमजोरी व मानसिक विमंदता जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है। 

 

एक्सपर्ट पैनल : डॉ. श्याम सुन्दर शर्मा, डॉ. पुनीत सक्सेना, डॉ. अशोक गुप्ता, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. अजय, डॉ. पी.डी.खंडेलवाल, 
डॉ. एन.बी,राजोरिया)  
 

मिल्क सर्वे की रिपोर्ट हमें नहीं मिली है। हालांकि दूध के लिए गए नमूनों में एल्फोटोक्सिन व एंटीबायोटिक मिलने की जानकारी मिली है। लेकिन कन्फर्म नहीं कह सकता। दूध में मिलावट रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर नमूने लेकर लैंब में जांच कराते हैं। मिसब्रांड, सबस्टैंडर्ड और अनसेफ पाए जाने पर नियमानुसार सजा का प्रावधान है। -डॉ. रवि प्रकाश माथुर, अतिरिक्त निदेशक (ग्रामीण स्वास्थ्य)

 

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