खाकी पर दाग / भ्रष्टाचार की दौड़ में एक और इंस्पेक्टर शामिल, 3 माह में एसीबी के चंगुल से भागे 5 अफसर



आस मोहम्मद और प्रकाश चंदू। आस मोहम्मद और प्रकाश चंदू।
रामलाल और प्रदीपचरण। रामलाल और प्रदीपचरण।
विजेंद्र सिंह गिल। विजेंद्र सिंह गिल।
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आस मोहम्मद और प्रकाश चंदू।आस मोहम्मद और प्रकाश चंदू।
रामलाल और प्रदीपचरण।रामलाल और प्रदीपचरण।
विजेंद्र सिंह गिल।विजेंद्र सिंह गिल।

  • एसीबी की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल, फरार पुलिस अफसरों को पकड़ने में नाकाम
  • सवाल यह भी है कि फरार अफसर मिल नहीं रहे या फिर इन्हें ढूंढना ही नहीं चाहते

Dainik Bhaskar

May 17, 2019, 11:52 PM IST

जयपुर. आरपीएस आस माेहम्मद, झाेटवाड़ा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी प्रदीप चारण, सब इंस्पेक्टर रामलाल, सीबीआई इंस्पेक्टर प्रकाश चंद के बाद अब टाेंक के पीपलू थाने के थाना प्रभारी बिजेन्द्र सिंह गिल भी फरार हाे गए। बड़े-बड़े घपले घाेटाले खाेलने वाली एसीबी की लिस्ट मे विजेन्द्र सिंह का नाम भी शामिल हाे गया मगर गिल के फरार हाेने के साथ ही एसीबी की कार्य शैली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि अपने ही विभाग के अफसराें काे एसीबी पकड़ने में फेल हाे रही है।

 

पुलिस अफसरों का यूं भाग जाना एसीबी के लिए भी बड़ा झटका है। क्योंकि, रिश्वत के इन बड़े मामलों में सबसे छोटी कड़ी कांस्टेबल या हैड कांस्टेबल या फिर एएसआई तो पकड़े जाते हैं, लेकिन बीच की कड़ी यानी इंस्पेक्टरों की फरारी से इसकी जांच बीच में ही अटक जाती है। जांच की दिशा आगे नहीं बढ़ पाती है। धीरे-धीरे मामला शांत हो जाता है और इसके मुख्य किरदार बच निकलते हैं।

 

एसीबी जिस तरह आराेपियाें काे पकड़ने के लिए जांच कर रही है उस तरीके की जांच काे फरार अफसर भी भली भांति जानते है। तभी ताे फरार अधिकारी न माेबाइल उपयाेग में ले रहे हैं न ही एटीएम से ट्रांजेक्शन कर रहे हैं और न ही परिवार वालाें के संपर्क में हैं। स्थिति चाहे कुछ भी हाे लेकिन, माना यही जा रहा है कि एसीबी अपने ही विभाग के अफसराें काे पकड़ने में फेल साबित हाे रही है। 
 

झाेटवाड़ा के तत्कालीन एसीपी आस माेहम्मद 
झाेटवाड़ा सर्किल के एसीपी रहते हुए आस माेहम्मद 13 फरवरी 2019 से फरार हैं। 16 मई काे आस माेहम्मद की जमानत खारिज हाे गई। धाेखाधड़ी के एक मामले में मदद के नाम पर आस माेहम्मद के लिए थाना प्रभारी के रीडर बत्तू खां व दलाल सुमंत सिंह ने एक लाख रुपए मांगे थे। एसीबी ने दाेनाें काे 13 फरवरी काे पकड़ा और आस माेहम्मद काे पूछताछ के लिए बुलाया ताे एसीपी फरार हाे गया। 

 

सीबीआई में प्रकाश चंद, 8 मार्च से फरार  
सीबीआई जयपुर में तैनात इंस्पेक्टर प्रकाश चंद 8 मार्च से फरार है। गृह निर्माण सहकारी समिति के खिलाफ सीबीआई जयपुर में दर्ज मामले में समिति के एक पदाधिकारी काे आरेापी बनाने की धमकी देकर दलाल के माध्यम से 90 लाख रूपए ले लिए थे और 75 लाख रुपए की रिश्वत और मांगी थी। एसीबी ने दलाल काे पकड़ा ताे सीबीआई इंस्पेक्टर फरार हाे गया। जिसका अाज तक पता नहीं चल सका है।

 

इंस्पेक्टर प्रदीप चारण 
झाेटवाडा थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी प्रदीप चारण भी 13 फरवरी से फरार है। रीडर और दलाल के पकड़े जाने के बाद इसी मामले में जब एसीबी ने थाना प्रभारी प्रदीप चारण काे बुलाया ताे वह भी आस माेहम्मद की तरह फरार हाे गए। हालांकि, उनका नाम एसीबी की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में नहीं है मगर वे अभी तक एसीबी के सामने पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए है। थाना प्रभारी के पास उसी मामले से जुड़ी जांच थी जिसमें बत्तू खां ने धाराएं हटाकर राहत देने के बदले रिश्वत मांगी। 

 

सब इंस्पेक्टर रामलाल 13 फरवरी से फरार  
झाेटवाडा थाने के एसआई रामलाल भ्रष्टाचार की गैंग में थे। एसीपी, थाना प्रभारी के बाद रामलाल का नाम सामने आया और एसीबी ने रामलाल काे पूछताछ के लिए बुलाया ताे वे भी दाेनाें की तरह 13 फरवरी काे थाने से फरार हाे गए। गिरफ्तार बत्तू ने एसीबी के सामने कबूल किया कि उसने सब इंस्पेक्टर रामलाल के लिए कई बार रिश्वत ली थी। हालांकि रामलाल काे पकड़ने के लिए एसीबी ने मार्च व अप्रेल माह में कई बार दबिश दी।

 

पीपलू थाना प्रभारी विजेन्द्र सिंह गिल 
टाेंक के पीपलू थाना प्रभारी विजेन्द्र सिंह गिल 16 मई काे एसीबी कारवाई के बाद से फरार है। एसीबी ने 16 मई की रात काे कांस्टेबल कैलाश चाैधरी व दलाल काे बजरी के ट्रकाें काे निकालने की एवज में रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इनके पास से एसीबी काे एक लाख 40 हजार रुपए बरामद किए थे। कांस्टेबल के गिरफ्तार हाेने के बाद थाना प्रभारी विजेन्द्र सिंह गिल फरार हाे गए।

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