राजस्थान / राम मंदिर में लगेगा बंशी पहाड़पुर का पत्थर, हर माह 10 से 20 ट्रक सेंड स्टोन भेजा जाएगा अयोध्या



पिंडवाड़ा में 9 साल तक रोजाना 300 कारीगरों ने राम मंदिर के लिए पिलर पर तराशी का काम किया।- फाइल फोटो पिंडवाड़ा में 9 साल तक रोजाना 300 कारीगरों ने राम मंदिर के लिए पिलर पर तराशी का काम किया।- फाइल फोटो
पिंडवाड़ा में पत्थरों पर बनाई गई डिजाइन। पिंडवाड़ा में पत्थरों पर बनाई गई डिजाइन।
कार्यशाला का पूजन करते अशोक सिंधल। - फाइल फोटो कार्यशाला का पूजन करते अशोक सिंधल। - फाइल फोटो
X
पिंडवाड़ा में 9 साल तक रोजाना 300 कारीगरों ने राम मंदिर के लिए पिलर पर तराशी का काम किया।- फाइल फोटोपिंडवाड़ा में 9 साल तक रोजाना 300 कारीगरों ने राम मंदिर के लिए पिलर पर तराशी का काम किया।- फाइल फोटो
पिंडवाड़ा में पत्थरों पर बनाई गई डिजाइन।पिंडवाड़ा में पत्थरों पर बनाई गई डिजाइन।
कार्यशाला का पूजन करते अशोक सिंधल। - फाइल फोटोकार्यशाला का पूजन करते अशोक सिंधल। - फाइल फोटो

  • अयोध्या पर कोर्ट के सुप्रीम फैसले के बाद मंदिर निर्माण को लेकर खान मालिकों से संपर्क शुरू
  • पिंडवाड़ा में तराशे गए 192 पिलर और दीवारों पर खड़ा होगा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का मंदिर

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 06:13 AM IST

भरतपुर. रामलला के पक्ष में फैसला आने के बाद भरतपुर के बयाना और बंशी पहाड़पुर के खनन क्षेत्र से पत्थर की आपूर्ति फिर प्रारंभ हाे जाएगी। राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण न्यास की ओर से प्रस्तावित मंदिर में क्षेत्र से निकलने वाले सेंड स्टोन का इस्तेमाल 60 प्रतिशत से अधिक होगा। मंदिर में करीब 4 लाख घन फीट पत्थर इस्तेमाल होगा, जिसमें से करीब 2.5 लाख घन फीट बंशीपहाडपुर का स्टोन लगेगा।

 

2006 से कारसेवक पुरम भेजा जा रहा पत्थर

साल 2006 से अयोध्या के कारसेवक पुरम में पत्थर भेजा जा रहा है। अब तक एक लाख घन फीट पत्थर की आपूर्ति हो चुकी है। इसमें 70 हजार घन फीट पत्थर अयोध्या की राम मंदिर कार्यशाला में तथा 30 हजार घन फीट पत्थर पिंडवाड़ा की कार्यशाला में भेजा जा चुका है। यहां पत्थर की नक्काशी की जा रही है। एक खेप महीने भर पहले ही भेजी गई है। पिछले दिनों 10 ट्रोला पत्थर भेजा गया, जिसमें एक में 400 घन फीट माल था। अब डेढ़ लाख घन फीट पत्थर की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए संबंधित खान मालिकों से विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी संपर्क में है। इसकी पुष्टि विहिप के विभाग अध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने की है।

 

महलपुरा और चूरा के पत्थरों की हुई जांच
महलपुर चूरा, तिर्घरा, छऊआमोड और सिर्रोंध क्षेत्र की खानों के पत्थर को टेस्टिंग के बाद चयनित किया गया है। यहां सहकारी समितियों और खान मालिकों से ब्लॉक निकालकर बयाना भेजने काे कहा गया है। यहां रफ माल की कटिंग होने के बाद अयोध्या रवाना किया जाएगा। पत्थर की आपूर्ति 6 माह तक हाेगी। 10 से 20 ट्रोला पत्थर प्रतिमाह भेजा जाएगा। इसके लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा कुछ ट्रोले स्थाई रूप से किराए पर लिए जाएंगे।

 

मजबूती और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है पत्थर

बंशी पहाड़पुर के पत्थर की खासियत मजबूती और सुंदरता के कारण सदियों से प्रसिद्ध है। इसमें अन्य पत्थरों के मुकाबले अधिक भार सहने की क्षमता और आसानी से पच्चीकारी होने की खासियत के कारण इसकी हमेशा से मांग रही है। संसद, लालकिला, बुलंद दरवाजा सहित अक्षरधाम और इस्कान के अधिकांश मंदिरों में बंशी पहाड़पुर का पत्थर लगा है। पत्थर कारोबारी नेमीचंद ने बताया कि इस पत्थर में रुनी यानी स्टोन कैंसर नहीं होता। बारिश से पत्थर के रंग में निखार आता है।

 

दीवार और छत के पत्थर तैयार
बंशी पहाड़पुर के स्टोन से मंदिर में लगने वाले सभी 106 खंभे तैयार हो गए हैं। विहिप के विभाग अध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने बताया कि मंदिर दो मंजिला बनेगा। इसके भूतल में 106 खंभे लगेंगे, जिनकी हाइट 16 फीट है। इसके अलावा सिंह द्वार, रंग मंडप, नृत्य मंडप, गर्भगृह और परिक्रमा मार्ग बनेगा। मंदिर की लंबाई 270 गुणा 135 फुट है। शिखर की ऊंचाई  125 फीट रहेगी। परिक्रमा मार्ग 10 फीट चौड़ा रहेगा। दीवार 6 फुट मोटी रहेगी। चाैखट में संगमरमर और सजावट के लिए अन्य पत्थर का इस्तेमाल होगा। खंभे, दीवार,  छज्जे, महराब, झरोखे, छत के लिए पत्थर तैयार किए गए हैं। इनमें पच्चीकारी का काम लगभग पूरा हो चुका है।

 

पिंडवाड़ा में तराशे गए 192 पिलर और दीवार
दो मंजिला राम मंदिर जिन पिलराें और दीवाराें पर खड़ा होगा, उसे तराशने का काम सिरोही जिले के पिंडवाड़ा में किया गया था। जानकारों की मानें तो दो मंजिला राम मंदिर जिन पर पिलर पर खड़ा होगा, उन्हें तराशने का काम यहीं किया गया है। प्रथम मंजिल पर ऐसे करीब 96 पिलर हैं और 96 पिलर ही दूसरी मंजिल पर हैं। इन सभी को अयोध्या के कारसेवकपुरम में रखा गया है। यहां करीब 7 साल तक पत्थरों को तराशने का काम चला था, जहां प्रतिदिन 10 घंटे 300 से अधिक कारीगर इन्हें तराशने का काम करते थे।

 

सात साल चला पत्थर तराशने का काम

करीब 7 साल तक पिंडवाड़ा में सैकड़ों कारीगरों ने पत्थर तराशने का काम किया। राम मंदिर को लेकर जब कवायद शुरू हुई थी तब बयाना, भरतपुर से बंशी पहाड़पुर पत्थरों का चयन किया गया था, जबकि इन पत्थरों को तराशने के लिए पिंडवाड़ा काे चुना गया। काम जल्द पूरा हो, इसके लिए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल, चंपत रॉय और रामबाबूजी ने जनवरी 1995 में पूजन कर यहां तीन कार्यशालाओं में कार्य शुरू करवाया था। सोमपुरा मार्बल इंडस्ट्री, भरत शिल्प कला केंद्र व महादेव शिल्प कला केंद्र (मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन) में विश्व हिंदू परिषद द्वारा इन पत्थरों को तराशने का कार्य किया गया। 2004 में यहां काम पूरा हुआ।

 

अयोध्या आंदोलन के समय बनी थीं भरतपुर में रामशिलाएं
1990 में हुए अयोध्या आंदोलन के दौरान भरतपुर प्रदेश का केंद्र रहा। इस आंदोलन में राम शिला पूजन के लिए श्रीराम लिखी विशेष ईंट भरतपुर के भट्टों में तैयार हुई। आरएसएस के तत्कालीन विभाग संघ चालक सीताराम अग्रवाल ईंट भट्टों  बड़े कारोबारी थे। उनके भट्टों में गुप्त रूप से रामशिला ईंटों का निर्माण हुआ था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार होने के कारण राजस्थान और गुजरात के कारसेवकों का भरतपुर पड़ाव स्थल था। उल्लेखनीय है कि  30 अगस्त 1990 को अयोध्या के कारसेवकपुरम् में पत्थरों को तराशने का काम शुरू हुआ था। इसके अलावा राजस्थान के पिंडवाड़ा में भी  काम चल रहा है।

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना