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मशीनें सही रखने के लिए 48 करोड़ का ठेका, फिर भी मशीनें खराब पड़ीं

एक वर्ष पहले
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  • एएमसी और सीएमएसी थी तो ठेका क्यों दिया गया?
  • जब विभाग ने हर जिले में कर्मी रखे हैं तो ठेका क्यों?

जयपुर (संदीप शर्मा). प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में खराब पड़ी मशीनों को सही रखने के लिए सरकार ने एक साल के लिए 16 करोड़ दे दिए, फिर भी कई मशीनें खराब हैं। कई ऐसी मशीनें हैं जिनकी सीएमसी (कॉम्प्रेसिव मेंटिनेंस कांट्रेंट ) का समय भी पूरा नहीं हुआ। ऐसे में इन मशीनों के खराब होने पर कौन सही करे, इस पर भी विवाद है। चिकित्सा विभाग ने फरवरी-2018 में किर्लोस्कर टेक्नोलॉजी प्रा.लि. कंपनी को 16 करोड़ का ठेका दिया। कंपनी की जिम्मेदारी थी कि खराब मशीनें सात दिन में ठीक करेगी। वर्ष 2016, 2017 में भी इसी कंपनी के पास ठेका था, तब भी मशीनें खराब रहीं।

 

सवाल ये कि तीन जगह पैसा क्यों खर्च कर रही सरकार

 

1. सरकार ने प्रदेश के हर जिले में बायोमेडिकल इंजीनियर लगाए हुए हैं। इनका काम है कि जहां भी मशीन खराब हो, उसे सही किया जाए। इसके लिए उन्हें हर महीने वेतन दिया जाता है। यह राशि लाखों रुपए में है।
2. अस्पतालों में नई मशीनें खरीदी गई। इनके साथ 3-4 तक के लिए सीएमसी दी गई। यानी मशीन खराब होने से लेकर उसके पार्ट तक की जिम्मेदारी कंपनी की थी। इसके लिए अस्पतालों ने कंपनी को कुछ अतिरिक्त पैसा भी दिया। लेकिन अब यह पैसा इसलिए बेकार गया क्योंकि अनुबंध में मशीनों को सही करने की जिम्मेदारी किर्लोस्कर की थी।

3. जब हर जिले में बायोमेडिकल इंजीनियर्स हैं और मशीनों की एएमसी और सीएमसी थी तो किसी अन्य कंपनी को ठेका क्यों दिया गया। यह 32 करोड़ रुपए क्यों खर्च किए गए।

 

मॉनिटरिंग किसने की? 
खराब मशीनों की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी विभाग के अफसरों की थी पर वह भी नहीं की गई। मशीनें लंबे समय तक खराब पड़ी रहीं। कंपनी ने छोटी मशीनें तो ठीक कर दीं, पर  बड़ी मशीनें ठीक नहीं की गईं।

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