भास्कर कैंपेन / गैरजिम्मेदारों का रवैया; मंत्री को 5 बार फोन किया, उठाया ही नहीं, एमडी बोले- मैं अखबार नहीं पढ़ता



Bhaskar Campaign: When will hospital machines be OK
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Bhaskar Campaign: When will hospital machines be OK

  • कब होगा मशीनों का इलाज?,15 जिलों के 25 अस्पतालों में 105 मशीनें खराब
  • जिस कंपनी को सरकार ने 7 दिन के अंदर खराब मशीनें ठीक करने का ठेका दिया, बेखबर है

Dainik Bhaskar

Jun 26, 2019, 01:12 AM IST

जयपुर. प्रदेश के 15 जिलों के 25 अस्पतालों में 105 मशीनें खराब हैं। रोज करीब पांच हजार मरीज बिना जांच लौटाए जा रहे हैं। भास्कर ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। बावजूद इसके जिम्मेदार मंत्री और अफसरों का गैर जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने तो पांच बार कॉल करने के बाद भी फोन नहीं उठाया।

 

आरएमएससीएल  (जिस कंपनी के पास मशीनें ठीक करने का ठेका, यह उससे सबंद्ध) के एमडी सुरेश गुप्ता ने कहा- मैं अखबार नहीं पढ़ता। आप बताएं कि किस अस्पताल में कौन-सी मशीनें खराब हैं। उनकी जांच कराएंगे। मशीनों को सही कराने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए। मगर वह उस कंपनी के भरोसे है, जिसे इस काम का ठेका दिया गया है। इस कंपनी को सरकार पैसे भी दे चुकी है। इसके तहत किसी भी अस्पताल में खराब मशीन को 7 दिन में सही करना होता है लेकिन ऐसा नहीं हो रहा।

 

कुछ मशीनें एक महीने में भी ठीक होने के आसार नहीं

सरकारी सिस्टम के अनुसार जिस कंपनी से मशीनें सही करने का अनुबंध है, वही सही करेगी। मशीन उस कंपनी से रजिस्टर्ड होनी चाहिए। जो रजिस्टर्ड नहीं हैं, वे सही नहीं होंगी। यदि अस्पताल मशीनों को रजिस्टर्ड कराते हैं तो समय लगेगा, कंपनी को ठीक करने में भी एक महीने लगेगा।

 

मंत्री रघु शर्मा ने मैसेज का भी जवाब नहीं दिया

मामले में चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा को दोपहर से रात तक भास्कर संवाददाता ने 5 फोन किए। उन्होंने किसी का जवाब नहीं दिया। उन्हें मैसेज भी छोड़े गए, लेकिन उनका भी कोई जवाब नहीं दिया।

 

मेडिकल कॉलेज का ये जवाब

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुधीर भंडारी ने शाम पांच बजे बताया कि इसकी रिपोर्ट मंगा लेता हूं। जल्दी सही कराएंगे।

 

^हमारे अधीन एक एजेंसी है जो टाइम शेड्यूल के हिसाब से काम करती है। आप तो नाम बताओ कि कौन-सी मशीन खराब है। आप जिनके भी नाम बताओगे, उनकी जांच करा देता हूं। मैं अखबार पढ़ता ही नहीं हूं। मेरा कोई पीआरओ नहीं है। आपके पास जो न्यूज है, वोे गलत है। यदि कोई मशीन पोर्टल पर रजिस्टर्ड है तो उसके खराब होने की शिकायत डाली जाएगी। इसके बाद कंपनी सात दिन में मशीन ठीक करेगी। यदि रजिस्टर्ड नहीं है तो संबंधित अधिकारी उसे रजिस्टर्ड कराएंगे, उसके बाद ही सही कराएंगे। जिनके पार्ट नहीं मिल रहे हैं, उनकी जगह तो नई आएंगी। उसके लिए पैसा चाहिए। हम कोशिश करेंगे कि जल्दी ही सभी खराब पड़ी मशीनें ठीक कर दी जाएं। - सुरेश गुप्ता, एमडी, आरएमएससीएल (जिस कंपनी से सम्बद्ध, वह कंपनी इनके अधीन आती है।)

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