ग्राउंड रिपोर्ट / झील के रास्ते जयपुर से नागौर डिवीजन तक 35 किमी क्षेत्र में देखी ये हकीकत

वही पहाड़, वही सूरज, वही नदी लेकिन यहां परिंदे उड़ान नहीं भरते बल्कि दम तोड़ रहे... वही पहाड़, वही सूरज, वही नदी लेकिन यहां परिंदे उड़ान नहीं भरते बल्कि दम तोड़ रहे...
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वही पहाड़, वही सूरज, वही नदी लेकिन यहां परिंदे उड़ान नहीं भरते बल्कि दम तोड़ रहे...वही पहाड़, वही सूरज, वही नदी लेकिन यहां परिंदे उड़ान नहीं भरते बल्कि दम तोड़ रहे...

  • अब रेस्क्यू ऑपरेशन मर रहा,  आदेश 5:30 बजे तक काम करने के, टीम 2 बजे ही चली जाती है

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 05:42 AM IST

जयपुर (महेश शर्मा). पक्षियों की कब्रगाह बनी सांभर झील में मृत परिंदों की गिनती बदस्तूर जारी है...लेकिन अब रेस्क्यू ऑपरेशन दम तोड़ने लगा है। भास्कर जब जयपुर-नागौर डिवीजन तक 35 किमी झील के रास्ते हालात जानने पहुंचा तो लापरवाही की जिंदा तस्वीरें देखीं। रेस्क्यू टीम को शाम 5:30 बजे तक काम करने के निर्देश हैं, बावजूद इसके टीम 2 बजे ही सामान समेटकर चल देती है। सीएम अशोक गहलोत खुद 3 बार बैठकें करके रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर चलाने के आदेश दे चुके हैं।

दो दिन पहले ही वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की टीम ने कलेक्टर, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन, एनिमल हसबेंडरी के अफसरों को मृत परिंदों को लगातार और ऑपरेशन तेज कर बाहर निकालने की हिदायत भी दी थी। साथ ही आईवीआरआई-बरेली, पक्षी विशेषज्ञ संस्था सकोन के साइंटिस्ट और देशभर के एक्सपर्ट ने भी केवल यही टास्क सौंपा है कि जल्द से जल्द एक-एक मृत और घायल परिंदे को बाहर निकाला जाए। क्योंकि मरे परिंदों में पड़े कीड़ों से ही दूसरे पक्षियों में बीमारी (बोटूलिज्म) फैल रही है। ऐसे में इस साइकिल को तोड़ना जरूरी है। 

टीम ने कहा- अाज ज्यादा भीतर नहीं जा सकते हैं, लेट हो जाएंगे

दृश्य-1 : एसडीआरएफ टीम के 35 जवान दो अलग-अलग बसों में लौट रहे हैं। भास्कर ने गाड़ियां रुकवाकर वापस जाने का कारण पूछा। जवानों ने कहा-आज का काम हो गया, बाकी कल देखेंगे। ज्यादा भीतर नहीं जा सकते। दोपहर तक 22 मृत और 12 घायल परिंदे मिले हैं, जिन्हें संबंधित को सौंप दिया।

जगह: रतन-तालाब से पहले मुख्य रोड की ओर

5 कर्मचारी सुस्ताते मिले, पूछा बाकी कहां हैं, बोले- चले गए

दृश्य-1 : एसडीआरएफ टीम के 35 जवान दो अलग-अलग बसों में लौट रहे हैं। भास्कर ने गाड़ियां रुकवाकर वापस जाने का कारण पूछा। जवानों ने कहा-आज का काम हो गया, बाकी कल देखेंगे। ज्यादा भीतर नहीं जा सकते। दोपहर तक 22 मृत और 12 घायल परिंदे मिले हैं, जिन्हें संबंधित को सौंप दिया।

जगह: माता मंदिर से करीब 2-3 किमी आगे

15 किमी तक टीम नहीं दिखी, झील में सिर्फ उनके मास्क थे

दृश्य-3 :  झील के बीच से मुख्य पाल और नावां तक करीब 15 किलोमीटर के रास्ते में कोई रेस्क्यू टीम नजर नहीं आई। झील में सिर्फ उनके मास्क दिख रहे थे। मौके से ही संबंधित टीम के ऑफिसर को हालात बताए तो उन्होंने खुद ही इस पर चौंककर भास्कर से दोबारा संपर्क साधा।

जगह: पाल से नांवा वेटरनरी अस्पताल तक

और एसडीएम का ये तर्क:

भास्कर टीम ने 4 बजे फुलेरा एसडीएम राजकुमार कस्वा को फोन कर उनके क्षेत्र से 2 बजे ही रेस्क्यू टीम लौटने की हकीकत बताई तो उन्होंने कहा- अभी पता करता हूं। कुछ देर में फोन कर बताया- 2 टीमें लगाई हंै। आपको जाते हुए मिले हैं, अब हम खिंचाई करेंगे। एसडीआरएफ के संबंधित अधिकारी को अवगत करा दिया। हमारे पास तो और दूसरे काम भी हैं, इसलिए आज व्यस्त रहा। इसलिए रेस्क्यू टीम जल्दी निकल गई।

नावा पहुंचकर 4.40 बजे एसडीएम ब्रह्म लाल जाट को फोन पर हालात बताए तो बोले-5.30 बजे तक रेस्क्यू के आदेश हैं। मैं जनसुनवाई में व्यस्त हो गया, इसलिए टीम भी जल्दी आ गई। 
नागौर कलेक्टर दिनेश यादव ने कहा-टीमों को पूरे दिन रेस्क्यू के लिए पाबंद करेंगे। रेस्क्यू ही तो करना बचा हुआ है। हालात ठीक करेंगे। हम अवैध माइनिंग पर भी लगातार कार्रवाई कर रहे हैं।

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