इंटरव्यू / जांच जारी है, दोषी पाए गए तो गिरफ्तार होंगे, बर्खास्त पुलिसवाले पकड़े न जाने के सवाल पर डीजीपी



Bhaskar interview with DGP Bhupendra Singh
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Bhaskar interview with DGP Bhupendra Singh

  • बजरी माफिया से पुलिस की साठगांठ पर बोले- अकेले कार्रवाई करने जाएंगे तो वसूली के आरोप लगेंगे ही
  • बहराेड़ थाने से पपला को छुड़ाने के मामले में पुलिस की मिलीभगत पर डीजीपी भूपेन्द्र सिंह से सवाल-जवाब

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2019, 12:14 AM IST

जयपुर (ओमप्रकाश शर्मा). बहरोड़ थाने में पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से हरियाणा के चर्चित गैंगस्टर पपला को छुड़ाने की वारदात पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। वर्दी द्रोह की इतनी बड़ी घटना हाल-फिलहाल कहीं देखने को नहीं मिली, जहां पुलिस ही अपराधियों का साथ दे रही हो। शांत प्रदेश माने जाने वाले राजस्थान के अलवर के थानागाजी में हुई गैंगरेप की घटना की चर्चा भी पूरे देश में रही। ऐसी खबरों से न सिर्फ राज्य की बदनामी होती है बल्कि पुलिस महकमे और राज्य शासन की भूमिका भी संदिग्ध बन जाती है। इन्हीं से संबंधित कुछ कड़वे सवालों को लेकर हम प्रदेश के डीजीपी भूपेन्द्र सिंह से रूबरू हुए। पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे हर सवालों के दिए जवाब...

 

भास्कर: बहराेड़ थाने से गैंगस्टर काे छुड़ाने के मामले में 76 पुलिसकर्मियाें पर कार्रवाई से क्या पूरी व्यवस्था सुधर जाएगी? 
डीजीपी:
 व्यवस्था काे सुधारने के बहुत से तरीके हाेते हैं। पुलिसकर्मियाें काे ट्रेनिंग देने की जरूरत है। जिम्मेदार अधिकारियाें का अधीनस्थ अफसराें और कर्मियाें पर सुपरविजन अच्छा रहे ताे काफी सुधार हाे सकता है। अच्छा काम करने वाले काे रिवार्ड मिले अाैर गलत करने वाले काे दंड। तभी व्यवस्था सुधरेगी। मेरा दायित्व सुधार करना है। ताकि पुलिस की छवि सुधरे।


भास्कर: आपने दाे हैडकांस्टेबलाें काे आपराधिक कृत्य सामने आने के बाद ही बर्खास्त किया है। इसके बावजूद दाेनाें काे गिरफ्तार क्याें नहीं किया?
डीजीपी:
 प्रशासनिक कृत्य और आपराधिक कृत्य दाेनाें अलग-अलग हैं। एसपी ने इस मामले में प्रशासनिक कृत्य माना है। इसी वजह से दोनों को बर्खास्त किया है। एसओजी आपराधिक कृत्य की जांच कर रही है। अगर अापराधिक कृत्य सामने आता है तो दाेनाें हैडकांस्टेबलाें के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की जाएगी।

 

भास्कर: मुंबई के अंडरवर्ल्ड की तरह राजस्थान में बजरी माफिया पनप गया है। पुलिस भी इसमें लिप्त है। काैन जिम्मेदार हैं?
डीजीपी:
बजरी माफिया के पनपने के पीछे हम सब जिम्मेदार हैं। मैं खुद काे भी इसका जिम्मेदार मानता हूं। जहां पर भी ऐसी गतिविधि हाे रही हैं, वहां पर लाेग कुछ प्रलाेभन के कारण उसमें लिप्त हाे जाते हैं। मैं मानता हूं कि पुलिस भी इसमें लिप्त है और भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ गई है। हालांकि हमने पुलिस काे अकेले माैके पर जाकर बजरी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की नसीहत दी है। सभी अफसराें काे बाेल रखा है कि दूसरे विभागाें के साथ मिलकर ही बजरी माफिया के साथ कार्रवाई करें। अकेले जाने पर ताे वसूली के आराेप लगेंगे ही।

 

भास्कर: आनंदपाल फरारी प्रकरण में एक कमांडाे की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। उसका भी प्रशासनिक कृत्य ही था? 
डीजीपी:
 आनंदपाल फरारी प्रकरण में कमांडाे का प्रारंभिक जांच में ही अापराधिक कृत्य सामने आ गया था। ऐसे में केस दर्ज कर गिरफ्तारी की गई थी। बहराेड़ मामले में दाेनाें कांस्टेबलाें द्वारा दायित्व निर्वहन नहीं करने की बात आई है। इनके षड्‌यंत्र में शामिल हाेने का सबूत नहीं है। आगे की कार्रवाई एसअाेजी की रिपोर्ट के आधार पर होगी।

 

भास्कर: अलवर में पहले गैंगरेप प्रकरण और अब बहराेड़ थाने में हमले में पुलिस की मिलीभगत सामने आई। क्या यह पुलिस में वर्दी द्राेह नहीं है?
डीजीपी:
 वर्दी द्राेह बहुत गंभीर शब्द है। इसकाे वर्दी द्राेह नहीं कह सकते। वर्दी के दायित्व का निर्वहन नहीं किया जाता। इसलिए एेसी गंभीर घटनाएं हाेती हैं। वर्दी द्रोह पुलिस द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार या गलत कामों से आगे की श्रेणी में आता है। अफसराें की मूर्खता और बेईमानी के कारण पुलिस का अच्छा काम भी जीराे हाे जाता है।

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