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राजस्थान / 85 विधायकों के टिकट काट सकती है भाजपा, नए चेहरों को देगी मौका; कांग्रेस में 150 नाम तय



Rajasthan vidhansabha chunav2018:  BJP will cancel 85 MLAs ticket
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Rajasthan vidhansabha chunav2018:  BJP will cancel 85 MLAs ticket

  • भाजपा की कोर कमेटी में 200 नामों पर सहमति बनी, अमित शाह की मंजूरी के बाद ऐलान 
  • कांग्रेस प्रत्याशियों के नाम मंगलवार तक आएंगे सामने, बैठक में मौजूदा विधायकों पर भरोसा जताने का फैसला
  • राज्य की 200 सीटों पर 7 दिसंबर को मतदान, परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 12:42 PM IST

जयपुर.   छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान में भी भाजपा विधानसभा चुनाव में नए चेहरों को मौका देगी। प्रत्याशियों के नाम को लेकर भाजपा कोर कमेटी की शनिवार को पांच घंटे बैठक चली। इसमें एंटीइन्कमबेंसी से बचने के लिए नए चेहरों पर फोकस करने का फैसला किया है। इसी वजह से करीब 85 विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं। इनमें 6 मंत्री भी हैं। 2013 में भाजपा ने 163 सीटें जीती थीं। उधर, कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की 7 घंटे तक चली बैठक में 150 सीटों पर सिंगल नाम तय किए गए। इनमें कांग्रेस ने मौजूदा विधायकों पर भी भरोसा जताया है।

 

कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ सभी 200 सीटों के लिए वन-टू-वन डिस्कशन हुआ। बैठकों से निकलकर आया कि एंटीइन्कमबेंसी से बचने के लिए पार्टी नए चेहरों पर फोकस करेगी। इससे पहले भाजपा ने मध्यप्रदेश में करीब पांच मंत्रियों समेत 40 विधायकों के टिकट काटे और नए चेहरे को मौका दिया। इसी तरह छत्तीसगढ़ में भी 16 से ज्यादा विधायकों के टिकट काटे गए। छत्तीसगढ़ में 12 और 18 नवंबर और मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को वोट डाल जाएंगे। 


भाजपा की बैठक में नए चेहरों पर मंथन : प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों पर टिकट के लिए दावेदारी करने वालों के पैनल तैयार कर भाजपा की कोर कमेटी शनिवार को चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर के घर पहुंची। इसमें मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, चुनाव प्रबंधन समिति के संयोजक गजेंद्र सिंह शेखावत, सह संयोजक अर्जुन राम मेघवाल, गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, प्रदेशाध्यक्ष मदन लाल सैनी और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर मौजूद थे। इसमें सीटवार सर्वे, जातीय समीकरण, विधायक के खिलाफ जनता में नाराजगी और नए चेहरों को लेकर मंथन हुआ। इसके बाद शाम को मुख्यमंत्री राजे और जावड़ेकर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के आवास पर पहुंचे। यहां तीनों के बीच डिस्कशन हुआ।

 

विधायकों के टिकट काटने की तीन वजह 

 

  • खिलाफत: कई विधायकों के क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं में उनकी खिलाफत हो रही है। कई विधायकों के खिलाफ पदाधिकारियों की दावेदारी ने नेतृत्व के कान खड़े किए।
  • नाराजगी: संगठन के स्तर पर ही उनका टिकट बदलने की मांग की जा रही है। इसके अलावा विधायक से नाराज होकर कई पदाधिकारी पार्टी तक बदल चुके हैं। 
  • निष्क्रियता : सबसे ज्यादा बदलाव एससी-एसटी टिकटों में देखने को मिल सकता है। इसकी बड़ी वजह एससी एसटी आंदोलन में इन विधायकों की निष्क्रियता रही।

 

कांग्रेस का मौजूदा विधायकों पर भरोसा : कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की शनिवार को करीब 7 घंटे तक बैठक चली। इसमें प्रदेश की 150 से अधिक विधानसभा सीटों के लिए सिंगल पैनल तैयार किए गए। सोमवार को राहुल गांधी की अध्यक्षता में होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की मीटिंग में इन्हें रखा जाएगा। यहां से ग्रीन सिग्नल मिलते ही 12 नवंबर को देर रात या मंगलवार को प्रत्याशियों की पहली सूची जारी हो सकती है।


पहली सूची में 100 नाम का ऐलान : पहली सूची में 100 से अधिक प्रत्याशियों के नाम शामिल होंगे। इससे पहले केंद्रीय चुनाव समिति की 31 अक्टूबर को हुई मीटिंग में 70 सीटों पर सिंगल नाम लगभग तय हो गए  थे। 20 सीटों को लेकर विवाद था, जिस पर नए सिरे से एक्सरसाइज की जानी थी। उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए स्क्रीनिंग कमेटी ने शनिवार को 80 सीटों पर सिंगल  नाम तैयार किए। ऐसे में अब कुल 150 सीटों पर दावेदारों के सिंगल नाम तय हो गए। तेलंगाना दौरे पर होने के कारण शनिवार को हुई मीटिंग में पूर्व सीएम अशोक गहलोत शामिल नहीं हो पाए।

 

 विधायकों पर भरोसे की 3 वजह

 

  • जीत: जो विधायक मोदी लहर के बीच जीते, उनकी जीत इस बार भी पक्की मानी  जा रही है। ऐसे में पार्टी मौजूदा विधायकों के  टिकट नहीं काटना चाहती।
  • माहौल: प्रदेश में भाजपा की सरकार है। कांग्रेस का मानना है कि जनता की नाराजगी भाजपा विधायकों से अधिक होगी। कांग्रेस मान रही है कि माहौल उसके पक्ष में है।
  • सक्रियता: मौजूदा विधायकों को लेकर संगठन स्तर पर खासी नाराजगी नहीं है। ये क्षेत्र में सक्रिय भी रहे। इनका टिकट काटने से पार्टी के भीतर पर गलत संदेश जाएगा।
     
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