पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

नाक-मुंह से खून आया, प्लेटलेट्स 7 हजार उतरी तब आए अस्पताल, जीत गई जिंदगी

8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
डेंगू का मच्छर।
  • बुखार को हल्के में ना लें
  • डेंगू से लड़ाई के लिए यह जरूरी है
Advertisement
Advertisement

जयपुर (नरेश वशिष्ठ). नगर निगम-चिकित्सा विभाग के अफसरों की लापरवाही से शहर के अस्पताल डेंगू के मरीजों से भर गए हैं। मरीजों के लिए बेड ही नहीं हैं। एसएमएस अस्पताल में ताे डाॅ. सीएल नवल की यूनिट में डेंगू के मरीजों काे बीच रास्ता गैलेरी में गद्दा लगाकर फर्श पर रखा जा रहा है। बाकी यूनिटों में डेंगू के मरीज फुल हाे रहे हैं। अस्पताल का दाैरा किया ताे कुछ डेंगू के मरीज एेसे भी सामने अाए, जाे जिन्दगी अाैर माैत से संघर्ष करके निकले हैं। इन मरीजों की प्लेटलेट 7 हजार तक पहुंच गई थी। नाक-मुंह सहित शरीर के दूसरे अंग से ब्लीडिंग शुरू हाेने के बाद ये लोग अस्पताल पहुंचे। उसके बाद पेशेंंट और परिजनों की हिम्मत और डाक्टरों की मेहनत से जिंदगी फिर मुस्कुराई है।
 

केस 1  दिवाली को बुखार हुआ, 1 नवंबर काे मुंह से खून आया, तब से अस्पताल में है
सीताराम कुमार, एसएमएस अस्पताल के यूनिट एसडब्ल्यू-2, बेड नंबर 46। दीपावली से बुखार हुअा। टाेंक में मेडिकल स्टोर से दवा ली। 1 नवंबर काे मुंह से खून अाने लगा। प्लेटलेट्स 10 हजार ही रह गई। टाेंक के डॉक्टर ने एक घंटे में एसएमएस अस्पताल पहुंचने के लिए कहा। मां नानगी बताती हैं- डॉक्टर ने एक घंटे का नाम लिया हाथ पांव फूल गए। एसएमएस में खून चढ़ाया। अब प्लेटलेट्स 40 हजार हाे गई है। डाक्टरों ने बताया कुछ भी हो सकता था, अब पेशेंट खतरे से बाहर है।
 

केस 2  बुखार ही समझा था, शरीर के अंदर खून बह गया, डॉक्टरों ने बचा लिय
सुरेंद्र सैनी, अलीगढ, एसएमएस अस्पताल की यूनिट एसडब्ल्यू-2, बेड नंबर 9। सुरेंद्र काे 28 अक्टूबर से बुखार चढ़ा। दो दिन बाद अलीगढ़ अस्पताल ले गए। सुधार नहीं हुअा। प्लेटलेट्स 7 हजार पर आ गई। शरीर में इंटरनल ब्लीडिंग हाे गई। वहां डाॅक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और जयपुर ले जाने को कहा। पिता किशन सैनी ने बताया कि पूरे रास्ते बुरे खयाल आते रहे। बेटे को देख हिम्मत जुटाई। यहां लापरवाही पर डाॅक्टरों ने डांटा, लेकिन मैंने अाज धरती पर भी भगवान देख लिए।
 

केस 3  भिवाड़ी में इलाज कराया, क्रिटिकल हालत में जयपुर पहुंचे, अब लगा जी जाएंग
मनाेज कुमार, एसएमएस अस्पताल यूनिट एसडब्ल्यू-2, बेड नंबर 11। दीपावली को अचानक बुखार हाेने पर खेतड़ी में डाक्टरों काे दिखाया। दूसरे दिन जांच कराई ताे डेंगू अाया। प्लेटलेट्स 8 हजार ही रह गई। 31 अक्टूबर काे मुंह-नाक से खून अाना शुरू हाे गया। कुछ परिवार वाले राेने लग गए। जैसे-तैसे एसएमएस पहुंचे। यहां पर डाक्टरों ने भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया। खून चढ़ाया गया। अब मेरी प्लेटलेट 45 हजार पहुंच गई है। लगता है मौत से लौटा हूं।
 

केस 4  चार दिन अलवर के अस्पताल मेंं रहे, खून बहा तो जयपुर लाए, अब सुधार ह
अशाेक कुमार, एसएमएस अस्पताल के यूनिट एसडब्लू-2, बेड नंबर 25 । झुंझुनूं के अशोक काे 28 अक्टूबर काे बुखार हुअा। अभी अलवर रहते हैं। वहां के अस्पताल में दिखाया ताे जांच में प्लेटलेट्स 10 हजार बताई गई। मुंह अाैर शरीर में कई जगह से ब्लीडिंग हाेना शुरू हाे गया था। मैं घबरा गया था। घरवालों को बुलाया। वे अलवर से जयपुर लाए। 1 नवंबर से एसएमएस में भर्ती हूं। अब प्लेटलेट्स 35 हजार है। सेहत सुधर ही रही है। 

डेंगू घर में तो नहीं पनप रहा
पुराने टायर, कपड़े धोने के टैंक, ड्रम, बैरल, बाल्टियां अौर कंटेनर, पालतू जानवरों के बर्तन, खुली बोतलें, टीन के डिब्बे, पेड़ के छेद अौर बांस, दीवारों के ऊपर ईंटो के बीच के स्थान, पुराने जूते, फूलदान, छत की नाली, बगीचे के कंटेनर डेंगू को पनपाने वाली जगह है।
 

डेंगू के डंक से एेसे बच सकते हैं

  • पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनें।
  • मच्छर मारने के लिए फोगिंग कराएं।
  • हर दूसरे दिन गमले का पानी बदलें।
  • सभी भंडारण बर्तनों अौर कंटेनरों को उपयोग न होने के दौरान उल्टा रखें।
  • जहां स्वच्छ पानी एकत्र होता है, वहां पर मच्छर पैदा न होने दें, तुरंत खत्म करें।
Advertisement
0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव - आज आप कई प्रकार की गतिविधियों में व्यस्त रहेंगे। साथ ही सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा। कहीं से मन मुताबिक पेमेंट आ जाने से मन में राहत रहेगी। धार्मिक संस्थाओं में सेवा संबंधी कार्यों में महत्वपूर्ण...

और पढ़ें

Advertisement