जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल / सोनाली बेंद्रे बोलीं- फिल्मों में कमाई ज्यादा थी, इसलिए यहां आई; पिता के पास कॉलेज भेजने के लिए पैसे नहीं थे

सोनाली ने अपने बुक क्लब के बारे में भी जानकारी दी। सोनाली ने अपने बुक क्लब के बारे में भी जानकारी दी।
सोनाली ने मेरू गोखले के साथ चर्चा की। सोनाली ने मेरू गोखले के साथ चर्चा की।
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सोनाली ने अपने बुक क्लब के बारे में भी जानकारी दी।सोनाली ने अपने बुक क्लब के बारे में भी जानकारी दी।
सोनाली ने मेरू गोखले के साथ चर्चा की।सोनाली ने मेरू गोखले के साथ चर्चा की।

  • मेरू गोखले के साथ चर्चा करते हुए सोनाली ने फिल्मों में अपनी जर्नी की शुरूआत के बारे में भी बात की
  • सोनाली ने बताया "मेरे पिता ईमानदार सरकारी कर्मचारी थे, इस वजह से उनका ट्रांसफर होता रहता था"

दैनिक भास्कर

Jan 24, 2020, 11:13 AM IST

जयपुर. जेएलएफ (जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल) में गुरुवार को सोनाली बेंद्रे ने कहा- मैं फिल्मों में पैसे कमाने आई थी। मुझे पता था कि जितने पैसे यहां कमा सकती हूं, उतने और कहीं नहीं कमा पाउंगी। मेरू गोखले के साथ सोनाली बुक क्लब पर बात करते हुए उन्होंने कहा- मैंने 12वीं तक पढ़ाई की। उसके बाद खुद को एजुकेट करने का जिम्मा उठाया। क्योंकि मेरे पिता के पास मुझे कॉलेज भेजने के पैसे नहीं थे। मैं परिवार के साथ मुंबई आई थी। तब पॉकेट मनी भी इतनी नहीं थी। मेरे पिता ईमानदार सरकारी कर्मचारी थे। जिसके कारण एक जगह से दूसरी जगह उनका ट्रांसफर होता रहता था, इससे परिवार काफी परेशान रहता था।

किस्मत से मिला बॉलीवुड में कनेक्शन

सोनाली ने कहा- मैं अलग-अलग जॉब तलाशने लगी। कहीं एक फैशन शो हो रहा था, जिसमें किसी मॉडल के पैर में चोट लग गई। किसी ने कहा सिर्फ चलना ही तो है। जिसके बाद मैंने उसकी जगह काम किया। फिर अलग-अलग काम के लिए ऑफर आने लगे। उस दौर में विज्ञापनों में बदलाव आया। एक स्टोरी आने लगी, जिसके कारण सिर्फ मॉडल उसमें फिट नहीं बैठती थीं। मुझे वहां मौका मिला।

पिता से मांगा था तीन साल का वक्त

सोनाली ने बताया- उनके पिता उन्हें आईएएस बनाना चाहते थे। उन्होंने उसने कहा- मैं आईएएस का एग्जाम दूंगी, लेकिन मुझे कुछ वक्त दीजिए। उस वक्त वह बहुत छोटी थी। उनके पास काफी वक्त था। उन्होंने अपने पिता से 3 साल का वक्त मांगा।

कैंसर से जंग पर बात की

सोनाली ने कहा कि जब पता चला की मुझे कैंसर है तो हैरान रह गई थी। जिसके बारे में मैने सोशल मीडिया पर भी शेयर किया था। क्योंकि, मैं किसी तरह की गॉसिप नहीं चाहती थी। इसलिए मैने सब को बता दिया। लेकिन, उसके बाद जिस तरह का रिपॉन्स मिला, उससे मैं काफी हैरान थी। मुझे शहर और गांवों से हर तरह के लोगों ने कमेंट किए। हर उम्र के व्यक्ति के कमेंट आए, जिससे मुझे पता चला कि मै अकेली नहीं हूं। मेरे जैसे कई लोग हैं, जो इस बीमारी से जुझ रहे हैं। उस दौरान मेरे पति ने बताया कि मुझे क्या करना चाहिए। ऐसे बहुत लोग हैं जो इस बारे में अपने नजदीकियों से भी बात नहीं करते हैं। जिसके कारण मैंने इसके बारे में आगे भी सोशल मीडिया के जरिए बात की।

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