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उप रेलवे के 11 अफसरों का होगा डिमोशन, एडहॉक पर मिला प्रमोशन होगा रद्द - v

उप रेलवे के 11 अफसरों का होगा डिमोशन, एडहॉक पर मिला प्रमोशन होगा रद्द - v

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 11:52 AM IST

जयपुर। रेलवे में करीब 300 अधिकारियों का कुछ दिनों में ही डिमोशन हो रहा है। रेलवे द्वारा पदोन्नति से जुड़े नियमों को मनमाने तरीके से लागू करने को लेकर कोर्ट की फटकार के बाद अब रेलवे को देशभर में अपने लगभग 300 अफसरों को एडहॉक के आधार पर दी गई पदोन्नति को वापस लेना पड़ रहा है। रेलवे बोर्ड द्वारा शुक्रवार को इसके आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। इन आदेशों की पालना करते हुए अब बोर्ड द्वारा जोनल व डिवीजनल रेलवेज के ऐसे अफसरों की सूची जारी की जा रही है जिनसे पदोन्नति वापस ली गई है। जानिए और इस बादे में ....

- बोर्ड ने इस दिशा में उप रेलवे के 11 अफसरों की सूची जारी की है। इन सभी अधिकारियों को पिछले दिनों ही रेलवे बोर्ड द्वारा सीनियर स्केल में प्रमोशन दिया गया था, लेकिन गुरुवार को हाईकोर्ट के फैसले के बाद रेलवे बोर्ड को इसे वापिस लेना पड़ा।

रेलवे बोर्ड ने इन अधिकारियों के डिमोशन के आदेश जारी किए

अधिकारी / वर्तमान पद (प्रमोशन के बाद) / नवीन पद (डिमोशन के बाद)
परमेश्वर सेन / डिप्टी सीपीओ (आईआर/मुख्यालय) / एसपीओ (आईआर/मुख्यालय)
सीएस कुरील / एडिशनल रजिस्ट्रार / एडिशनल रजिस्ट्रार
आरडी मीना / डिप्टी सीएसटीई / एसएसटीई
राजीव अवस्थी / डिप्टी सीएमई / एसएमई
संतोष विजय / सीनियर डीएमई, अजमेर / डीएमई, अजमेर
रामअवतार यादव / डिप्टी सीएमई, वर्कशॉप, अजमेर / एसएमई, वर्कशॉप, अजमेर
गजानंद झा / सीनियर डीएमई, आबूरोड / डीएमई, आबूरोड
एसआर मीमरोठ / डिप्टी सीईई / एसईई
आरके कुमावत / आईआरएसई (जेएजी) / आईआरएसई (एसएस)
एके आर्य / डिप्टी सीई (ट्रैक) / एक्सईएन (ट्रैक)

पीके अग्निहोत्री / सीनियर डीईएन (एस्टेट) / डीईएन (एस्टेट)

यह था मामला

- दरअसल कुछ दिनों से रेलवे में ग्रुप ‘बी’ और ग्रुप ‘ए’ अफसरों को मिलने वाली जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (जेएजी) में रेलवे द्वारा डीओपीटी के नियमों के विरुद्ध अपने ही नियम लागू किए जा रहे थे। इसे लेकर करीब दो साल से सीधी भर्ती (डायरेक्ट ऑफिसर्स) से आने वाले और पदोन्नत होकर इस ग्रेड तक पहुंचने वाले ग्रुप ‘बी’ के अफसरों के बीच रेलवे बोर्ड स्तर के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक में मामले चल रहे थे, लेकिन मामला तब अधिक गंभीर हो गया जब मध्य-पूर्व रेलवे ने आरके कुशवाहा को ग्रुप ‘ए’ में 6 वर्ष की सेवा के पश्चात सीनियर स्केल में प्रमोशन दिया। जिसके बाद से ही ग्रुप ‘बी’ के अफसरों को बिना किसी बाधा के सीनियर स्केल दिया जाता रहा।

- ग्रुप ‘ए’ अफसरों ने रेलवे बोर्ड में इसके खिलाफ आवाज उठाई तो अगस्त 2016 में नियम बदल कर 6 वर्ष की सेवा का प्रावधान हटा दिया गया। इससे ग्रुप ‘ए’ के अफसर सीनियर स्केल लेने में अव्वल हो गए। दूसरी ओर, वर्ष 2015 में एक याचिका पर कैट पटना की ओर से रेलवे बोर्ड चेयरमैन को स्पीकिंग आर्डर देने के निर्देश दिए गए थे, जिसकी आड़ में फिर से ग्रुप ‘बी’ के अफसरों को एडहॉक आधार पर सीधी भर्ती से अफसर बने लोगों से ज्यादा संख्या में सीनियर स्केल मिल गया। इसी को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और हाईकोर्ट ने इस वर्ष 12 मई को रेलवे बोर्ड चेयरमैन की नीति को गलत ठहरा दिया।